सत्य बनाम सफलता: साध्य–साधन की कसौटी पर जीवन

सत्य बनाम सफलता: साध्यसाधन की कसौटी पर जीवन

जीवन के चौराहों पर सबसे पेचीदा प्रश्न यही उठता है  सत्य चुनें या सफलता? अनुभव कहता है कि झूठ, छल और शॉर्टकट से लोग जीतते दिखते हैं; मन डगमगाता है। पर इतिहास, संस्कृति और अंतरात्मा तीनों मिलकर धीरे-धीरे एक ही निष्कर्ष पर लाते हैं: साध्य तभी पवित्र है, जब साधन पवित्र हों  अन्यथा वह सफलता नहीं, मात्र उपलब्धि का मुखौटा है।

लोकमान्य तिलक ने मांडले जेल में गीता रहस्य रचा  शरीर कैद हुआ, चेतना नहीं। यह स्मरण दिलाता है कि बंधन बाध्यता नहीं; सत्य पर टिके मन का वजूद तिलिस्म तोड़ देता है। इसी सूत्र को रामकथा जीवंत करती है: रावण को परास्त करने के लिए राम बाली का साथ ले सकते थे  बलशाली, सिद्ध योद्धा, जिसने स्वयं रावण को कई बार पछाड़ा था। किंतु बाली खलचरित्र था  अनुज-वधू के प्रति दुराचार, अन्याय। इसलिए राम सुग्रीव को चुनते हैं  कमज़ोर सही, पर साध्य-संगत। यह निर्णय बताता है कि वक्त बचाने के लिए सत्य को बेचना दीर्घकाल में विजय नहीं, पराजय का बीज है।

सफलता की चमक अक्सर हमारी आँखें चौंधिया देती है। फ़िल्म का खलनायक दो घंटे तक शहर रौंदता है; अंत में एक सीन में धराशायी हो जाता है  क्योंकि दुष्टता की गति साधन के तेल से चलती है, पर सत्य की शक्ति साध्य के सूर्य से। रावण की लंका सौ बरस चले या दो सौ  एक दिन कौशल्या का बेटा निकलता ही है, और अधर्म का अभिमान राख बनता है। यही इतिहास का धीमा, पर अडिग न्याय है  जो आज नहीं, तो कल, पर होकर रहता है

साध्य-साधन की यह सूक्ष्म रेखा हमारे रोज़मर्रा के छोटे चुनावों में भी उतरती है। बचपन की “रबर” जितनी मामूली चीज़ पर माँ का कठोर पाठ  “चुराकर लाई है तो लौटेगी, तभी सिरहाने जगह मिलेगी”  आगे चलकर बड़े निर्णयों का नैतिक कम्पास बनता है। परिवार के संस्कार, स्वाध्याय और सत्संग  ये तीनों वह रस्सी हैं जो फिसलन भरी राजनीति, पद-लोलुपता और लोभ के दलदल में पैरों को थामे रखती हैं। नहीं तो कुतर्क हमारा वकील बन जाता है और अंतःकरण कटघरे में खड़ा रहता है।

तो सफलता क्या है? सटीक उत्तर वही  यदि तुम्हारे होने से दुनिया थोड़ी सुन्दर होती है, तो तुम सफल हो। बाहें भर दुनिया: परिवार, सहकर्मी, छात्र, मोहल्ला  यदि आपकी उपस्थिति से विनम्रता, न्याय, भरोसा, सेवा बढ़े  यही सत्य-आधारित सफलता है। धन, पद, शोहरत  ये किराएदार हैं; चरित्र मालिक है। शिवाजी, महाराणा, झांसी की रानी  इनका गौरव जीत-हार के आंकड़ों से नहीं, गोली छाती पर खाने के साहस से आँका गया। इतिहास युद्ध का परिणाम नहीं, युद्ध की रीढ़ पढ़ता है।

आधुनिक द्विविधा  “कोर्स पिछड़ जाएगा या कुंभ जैसी जीवंत प्रयोगशाला का अनुभव लूँ?”  का उत्तर भी इसी कसौटी पर है। चेतना वैज्ञानिक रखें, चिंतन आध्यात्मिक, चिंता शून्य। समय-साधना की ठोस योजना बनाइए  जाने से पूर्व-पश्चात अतिरिक्त अध्ययन-ब्लॉक, नोट्स/रिकॉर्डेड लेक्चर, डेडलाइन-बफ़र। अनुभव (जीवन की विश्वविद्यालय) और अध्ययन (पुस्तक की विश्वविद्यालय) का संतुलन ही विद्या का पूर्ण वृत है। सत्य से अर्जित अनुभव आपकी पढ़ाई को गहराई देता है; छल से मिली फुर्ती अंततः फिसलन बन जाती है।

चार आत्मकसौटियाँ (निर्णय से ठीक पहले)

  1. साधन जाँच: क्या यह तरीका मैं अपने शिष्य/संतान को गर्व से सिखा सकता हूँ?
  2. दिखना बनाम होना: अगर कोई न देखे तब भी मैं यही करूँगा?
  3. दीर्घकाल लाभ/हानि: पाँच साल बाद यह मुझे भीतर से मजबूत करेगा या खोखला?
  4. परहित संकेत: मेरे इस कदम से सबसे कमजोर पर क्या असर पड़ेगा?

सत्य-संगत साधन धीमे हो सकते हैं, पर स्थायी जीत वहीं से आती है; असत्य की फुर्ती तेज़ हो सकती है, पर टिकती नहीं। साध्य महान हो  राष्ट्रनिर्माण, समाजसेवा, शोध, कला  तो साधन भी उतने ही निर्मल हों। यही जीवन का धर्म है: सत्य से सफलता, सफलता से सुन्दरता, और सुन्दरता से शांति।

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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