रोने वाले रोना चाहें, पर रो न पाएं!—क्राइंग क्लब और आंसुओं की कला पर व्यंग्य

Prem Chand Dwitiya Jul 28, 2026 व्यंग रचनाएं 1

लाफिंग क्लब के बाद अब क्राइंग क्लब! आधुनिक जीवन, अकेलेपन, आंसुओं और रोने की कला पर डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का रोचक हास्य-व्यंग्य।

मर्द में छिपा हुआ ए आई एजेंडा पहचानों !

Prem Chand Dwitiya Jun 7, 2026 व्यंग रचनाएं 1

क्या पुरुष सचमुच महिलाओं की उन्नति चाहते हैं या उनके भीतर कोई छिपा हुआ 'एआई एजेंडा' काम करता है? सुंदरता, आरक्षण, सामाजिक व्यवहार और पुरुष मानसिकता पर एक धारदार व्यंग्य।

रंग बदलने के खतरे को लेकर गिरगिटों की हाई लेवल मीटिंग !

Prem Chand Dwitiya Apr 8, 2026 व्यंग रचनाएं 1

रंग बदलने के पुराने उस्ताद गिरगिट भी आजकल इंसानों की रंगबाज़ी से हैरान हैं। सुरक्षा के लिए रंग बदलने वाले जीव अब अपनी साख बचाने की बैठक कर रहे हैं। व्यंग्य यह है कि बदनाम गिरगिट हैं, मगर रंग बदलने की असली महारत इंसानों ने हासिल कर ली है।