मर्द में छिपा हुआ ए आई एजेंडा पहचानों !
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प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन का मानना है कि जानवरों में नर ज्यादा आकर्षक होते हैं और इंसानों में इसका उल्टा है यहां महिलाएं ज्यादा आकर्षक मानी जाती है ।एक रिसर्च में महिलाओं को भीअन्य महिलाएं सुंदर लगती है ।यह खबर पढ़कर पंडित सदानंद जी बोले पंडिताइन हर चार छः दिन में नजर उतारने का कहती है दो-चार बार मैंने नजर उतारी लेकिन हर बार नजर उतारने से तंग आकर मैंने सोचा इसे ही पूरी तरह नजर से उतार दू , लेकिन पत्नी व्रता होने के कारण यह दुस्साहसिक कार्य नहीं कर पाया ।
खैर जब मैंने श्रीमती से पूछा तो बोली मैं पुरुषों के किसी भी कार्यक्रम और समारोह. में पिछले दिनों नहीं गई ,महिलाओं में ही उठी बैठी तथा आना-जाना हुआ लेकिन अन्य महिलाओं से ज्यादा मैं बहुत सुंदर दिखी ,इसीलिए महिलाओं ने नजर लगा दी महिला की महिलाओं को जर्बदस्त नजर लगती है इसलिए नमक मिर्च उतार दो ताकि नजर उतर जाए।
सदानंद जी के महिला द्वारा महिला को नजर लगने या नजर से गिरने की बात सुनकर सुनील भैया बोले हम इंसानों और जानवरों में मामला उल्टा-पुल्टा है। जानवरों में नर सुंदर होते हैं और इंसानों में महिलाएं सुंदर एवं आकर्षक मानी जाती है। जब इंसानों में बदसूरती या वे कम सुंदर होते हैं तो वह अपनी बदसूरती को विलोपित करने और दबाने के लिए तथा सुंदर दिखने के लिए तरह-तरह के जतन करते हैं और उसके ठीक विपरीत महिलाएं अपनी सुंदरता को छुपाने के लिए घूंघट निकालती.है और स्कार्फ में सुंदरता छुपाती है ।मर्द उन्हें नौकरियों या सोशल कार्य से न जोडकर ,हाउसवाइफ, बनाकर हाउस से बाहर जाने से रोकते हैं ।सोशल वर्क करने वाली महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने देते हैं ।कारण यह की महिला की सुंदरता पर कोई नजर न लगा दे , आंच ना आ जाए कोई दाग न लग जाए! जब महिलाओं के आरक्षण की बात आती है तो पुरुष अपने वर्चस्व में खतरा भांपकर महिलाओं के आरक्षण का आटिॅफिशियल इंटीलेजेंस का इस्तेमाल करते है क्योंकि वे लोकतंत्र में सहभागिता करने वाली महिलाओं के पति ,पिता, बेटे ,भाई भतीजे बनकर महिलाओं के आरक्षित पद पर अनारक्षित होकर परदे के पीछे से राज करते हैं ।जब पुरुषों द्वारा महिलाओं को पीछे धकेलने की बात सामने आई तो चर्चा में शामिल धूमिल जी बोले अरे महिला ही महिला को आगे नहीं बढ़ने देना चाहती है महिलाओं के आरक्षण बिल के पारित न होने में आधी आबादी जो महिलाओं की है उसकी भूमिका आज तक आक्रमक न होने से उनका आरक्षण आगे नहीं बढा।
यही नही महिला में एक दूसरे की बुराई करने , चुगली करने, अपनी-अपनी सुंदरता की तारीफ करने में महिलाएं अव्वल है ।पनघट से लेकर गीत ,कथा,वार्ता, संगीत भजन अन्य कार्यक्रमों में महिलाएं एक दूसरे से ज्यादा सुंदर दिखने में तथा एक दूसरे को नीचा दिखाने में ऐसी मशगुल.हो जाती है कि समारोह कब और कैसे हुआ और कब खत्म हुआ मालूम ही.नहीं पड़ता है ।यह चर्चा चल रही थी कि स्वामी नरेंद्र जी आ टपके और बोले खूबसूरती में महिलाओं पर रिसर्च में महिलाएं एक दूसरे से ज्यादा सुंदर दिखती है और दिखाना चाहती है । उधर पुरुषों को भी अपनी के अलावा अन्य महिलाएं खूबसूरत लगती है जबकि पुरुष पुरुष को नहीं भाता है ,न हीं स्मार्ट देखना चाहता है।
वस्तुतः पुरुषों का छिपा हुआ एजेंडा रहता है जबकि महिलाओं को यह एजेंडा मालूम पड़ता है तो वह डंडा पेल देती है ।वे बोले खुल्लम-खुल्ला प्यार करेंगे दुनिया से नहीं डरने वाले पुरुष छिप छिप कर अपनी सुंदरता और पुरुषार्थ के जरिए आकर्षक दिखना चाहते हैं ।इस पर राम जी बोले पुरुषों से ज्यादा आकर्षक महिलाओं को अक्सर उम्र छिपाना पड़ती है लेकिन सुंदर दिखने के लिए वह सजने में घंटों लगाती है । ताकि वह सुंदर दिखे । इसके ठीक विपरीत उल्टा पुरुषों को ढेर सारी बातें छुपाना पड़ती है पुरुषों को अपनी उम्र छुपाने के लिए आए सफेद बालों को डाय करना पड़ता है ,पुरुषों को बड़ी हुई तौंद छिपाना पड़ती है ।पुरुषों को मोबाइल के मैसेज छुपाना पड़ते हैं अपनी खूबसूरत गर्लफ्रेंड छुपाना पड़ती है । वे बोले हद तो तब होती जब पुरुष अपना शरीर छुपाने के लिए ऊपर से नीचे तक पूरे शरीर को कपड़े से ढंक देता है ।जबकि महिलाओं की सुंदरता में कम कपड़े चार चांद लगाते हैं। हालांकि महिला पुरुष दोनों ही अपने लुक की परवाह करते हैं और लुका छुपी से सुंदरता को लुक लायक बनाना चाहते हैं। चाहे महिला हो या पुरुष उन्हें चिंता सताती है कि मैं कैसा दिख रहा मैं कैसी दिख रही ! लेकिन यह बात दिगर है कि इंसानों में यानी पुरुष महिलाओं की बनिस्बत कम सुंदर और कम आकर्षक दिखते हैं ,जबकि बेचारे जानवरों में नर आकर्षक होते हैं ।इसी कारण अनेक मर्द सोचते हैं कि यदि हम जानवर न होकर जानवरों जैसा व्यवहार और रवैया रखते तो ज्यादा सुंदर और आकर्षक दिखते !
उनके चेहरे पर चमक दमक मत देखो
मर्द में छिपे ए आय एजेंडे को भांपो !
Comments ( 1)
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डॉ मुकेश 'असीमित'
1 hour agoमर्द में छिपा हुआ एआई एजेंडा पहचानो! एक रोचक व्यंग्य है जो महिला सुंदरता, पुरुष मानसिकता, महिला आरक्षण और सामाजिक सत्ता संरचनाओं पर हास्यपूर्ण लेकिन तीखा प्रहार करता है। डॉ प्रेमचंद द्वितीय की शैली में लिखा गया यह लेख पाठकों को हंसाते हुए गंभीर प्रश्नों से भी रूबरू कराता है।