डॉ मुकेश 'असीमित'
Aug 23, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि सृष्टि, आत्मा, परमात्मा, वेद, उपनिषद, दर्शन, भक्ति, योग और मानव जीवन को समझने वाली विशाल ज्ञान-परंपरा है। इस लेख में पंचमहाभूत, चार वेद, षड्दर्शन, नवधा भक्ति, सप्तर्षि, 33 देवता, नवग्रह, मन्वंतर और अन्य प्रमुख वैदिक-वेदोत्तर अवधारणाओं को सरल भाषा में समझिए।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 9, 2026
शोध लेख/विमर्श
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आज का विश्व गहरे संकटों और विभाजनों से गुजर रहा है। ऐसे समय में भारत अपनी सांस्कृतिक चेतना, लोकतांत्रिक अनुभव, संतुलित विदेश नीति और युवा शक्ति के कारण विश्व को एक नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यह लेख विश्व निर्माण में भारत की संभावित और आवश्यक भूमिका का विश्लेषण करता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Apr 2, 2026
Important days
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हनुमान जयंती पर प्रस्तुत यह लेख हनुमान जी के पराक्रम से आगे बढ़कर उनके भक्ति, विश्वास और आंतरिक शक्ति के स्वरूप को समझने का प्रयास है—जहाँ हर मनुष्य के भीतर छिपे सामर्थ्य को जगाने का संदेश मिलता है।
Ram Kumar Joshi
Apr 2, 2026
व्यंग रचनाएं
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“ऊर्जा स्वयं न पाजिटिव होती है न नेगेटिव—वह तो मात्र साधन है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसे साधु साधे या ‘साहिब’ साधे।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 20, 2026
India Story \बात अपने देश की
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समस्या सुविधा में नहीं, उसे ही ज्ञान मान लेने में है।
ग्रेगोरियन कैलेंडर समय बताता है, पंचांग समय को समझाता है।
समय रेखा नहीं, एक चक्र है—लौटता हुआ, बदलता हुआ।
जब हम समय को केवल मापते नहीं, महसूस भी करते हैं—तभी समझ पूरी होती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 19, 2026
हिंदी कविता
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“छंटे कुहासा, सूरज निकले,
मन का हर अंधकार पिघले…
नव विचारों के साथ यह संवत्सर केवल तिथि नहीं,
बल्कि चेतना का एक नया उदय है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 18, 2026
India Story \बात अपने देश की
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विक्रम संवत और शक संवत का अंतर केवल दो कैलेंडरों का अंतर नहीं, बल्कि परंपरा और प्रशासन की दो अलग जरूरतों को समझने का विषय है।
हमारे त्योहार जहाँ तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त से संचालित होते हैं, वहीं राष्ट्रीय जीवन को एक स्थिर और सरल नागरिक कैलेंडर की आवश्यकता होती है।
भारत की समय-परंपरा इतनी समृद्ध है कि यहाँ एक ही देश में धर्म के लिए अलग समय-भाषा और शासन के लिए अलग समय-व्यवस्था साथ-साथ चलती है।
शक संवत को अपनाना विक्रम संवत का विरोध नहीं था, बल्कि आधुनिक प्रशासनिक सुविधा और वैज्ञानिक एकरूपता की आवश्यकता का परिणाम था।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 17, 2026
Darshan Shastra Philosophy
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“यहाँ समय केवल गिना नहीं जाता, समझा भी जाता है—भारतीय पंचांग इसी जीवंत विज्ञान का प्रमाण है।”“चंद्र और सूर्य के संतुलन में बसता है भारतीय कालज्ञान—जहाँ तिथि भी बदलती है और सोच भी।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 13, 2026
Lifestyle
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तंत्र भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की एक गंभीर साधना-पद्धति रहा है, जिसका उद्देश्य चेतना का विस्तार और ऊर्जा का संतुलन था। लेकिन समय के साथ इसके नाम पर भय, चमत्कार और अंधविश्वास का एक पूरा बाज़ार खड़ा हो गया है। आज आवश्यकता है कि हम असली तंत्र और उसके नाम पर चल रहे भ्रम के बीच अंतर समझें।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 10, 2026
समसामयिकी
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सोना कोई उपयोगी वस्तु नहीं, बल्कि मानव आकांक्षाओं और असुरक्षाओं का सबसे चमकदार प्रतीक है। न वह भूख मिटाता है, न ठंड से बचाता है, फिर भी सदियों से उसे सबसे अधिक मूल्य दिया गया। इस लेख में सोने की बढ़ती कीमतों को बाज़ार की चाल नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक मान्यताओं का परिणाम बताया गया है। कैसे हमने सोने को सम्मान, सुरक्षा, प्रतिष्ठा और विश्वास का पर्याय बना दिया—और बाज़ार ने इन्हीं भावनाओं को भुनाना सीख लिया। मंदिरों, बैंकों और आभूषणों में सिमटे सोने के माध्यम से यह रचना भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंधों पर गहन वैचारिक दृष्टि डालती है। यह लेख सोने से ज़्यादा मानव मन की कीमत पर सवाल उठाता है।