विश्वास करने की कला –आर्ट ऑफ़ बीलिविंग

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 24, 2026 व्यंग रचनाएं 0

विश्वास जीवन की सबसे पुरानी मुद्रा है। गणित के मास्टरजी के “मान लो” से लेकर प्रेमी के चाँद-तारे, बाबा के स्वर्ग, बाजार की स्कीम और राजनीति के घोषणा पत्र तक—हर जगह आदमी विश्वास करता कम है, करवाया ज्यादा जाता है।

हनुमान जी का नामांकन और जाति का कॉलम

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 14, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब हनुमान जी चुनाव लड़ने पहुँचे, तो उन्हें सबसे बड़ा संकट रावण नहीं, बल्कि ‘जाति’ कॉलम में मिला। यह व्यंग्य भारतीय लोकतंत्र के उस कटु सत्य को उजागर करता है, जहाँ इंसानियत से पहले जाति पूछी जाती है।

झूठ का मेगा मॉल

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब झूठ ने मार्केटिंग का चोला पहन लिया, तो सच आउटडेटेड घोषित कर दिया गया। “झूठ महा-सेल” में हर वर्ग के ग्राहक उमड़े—नेता, एंकर, धर्मगुरु, कोचिंग संचालक—सब अपने-अपने झूठ के पैकेट खरीदते दिखे। इसी भीड़ में एक बूढ़ा आदमी सच खोजता रह गया…

नेताजी कर्मदास की कैंची लीला

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 30, 2026 व्यंग रचनाएं 0

नेताजी कर्मदास की राजनीति जनसेवा से नहीं, फीता-कटिंग से संचालित होती है। कैंची उनकी पहचान है और उद्घाटन उनका धर्म। लेकिन जब बाबा धर्मदास ने उनकी जगह ले ली, तो नेताजी के राजनीतिक अस्तित्व पर ही कैंची चल गई।

मक्खनमहापुराण-चापलूस्योपनिषद् का उत्तर आधुनिक खंड

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 26, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मक्खनमहापुराण” चापलूस्योपनिषद् का उत्तर-आधुनिक संस्करण है, जहाँ प्रशंसा और चाटुकारिता के बीच की महीन रेखा पर तीखा व्यंग्य किया गया है। यह रचना दिखाती है कि कैसे ‘मक्खनयोग’ आज के दफ्तर, साहित्य, राजनीति और सामाजिक जीवन का अनिवार्य शास्त्र बन चुका है—जहाँ योग्यता से ज्यादा ‘लोचदार जीभ’ और सही समय पर किया गया लेपन ही सफलता की असली कुंजी है।

आज रपट जाएँ तो हमें न उठइयो

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 24, 2026 व्यंग रचनाएं 1

“भाइयो-बहनो, आज अगर हम रपट जाएँ… तो हमें न उठइयो।” लोकतंत्र के इस विचित्र महोत्सव में हर वर्ग अपनी-अपनी शैली में फिसल रहा है—कोई वादों पर, कोई सच्चाई पर, कोई सिद्धांत पर… और आम आदमी, वह तो रोज़ की आदत से फिसल ही रहा है।

नेता जी का इंटरव्यू – हम झूटन के बाप

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 7, 2025 व्यंग रचनाएं 0

नेता जी का यह इंटरव्यू लोकतंत्र के नाम पर एक शानदार हास्य-नाट्य है। हर सवाल का जवाब वे इतनी आत्मा-तुष्ट गंभीरता से देते हैं कि सच्चाई उनसे सावधान दूरी बनाकर खड़ी रहती है। बेहतरीन व्यंग्य, तीखे संवाद और कैमरे के सामने झूठ की अग्निपरीक्षा—सब कुछ यहाँ मौजूद है।