मेरी OPD का शीशा: मरीजों की आदतों और व्यवहार पर हास्य-व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Aug 31, 2026 व्यंग रचनाएं 0

#   मेरी OPD का शीशा  मेरी OPD के दरवाज़े में एक शीशा लगा दिया गया था। जब लगाया गया था, तब कोई बहुत गहरी सोच-विचार नहीं हुई थी। बस किसी दूसरे अस्पताल में ऐसा शीशा लगा देखा और हमने भी उसकी नकल कर ली। शीशा लगाने वाले ने बड़े गर्व से उसकी खासियत बताई, […]

जंतर मंतर और छूमंतर!-haasy vyangya

Prem Chand Dwitiya Aug 2, 2026 व्यंग रचनाएं 1

जंतर-मंतर केवल आंदोलनों का ठिकाना नहीं, बल्कि लोकतंत्र का ऐसा जादुई मंच है जहाँ नारों की आवाज संसद तक पहुँचती है। यहाँ कुछ आंदोलन तंत्र को बदल देते हैं, तो कुछ स्वयं छूमंतर हो जाते हैं। कॉकरोच-पार्टी से लेकर तंतर, मंतर और टाइम-आउट तक—डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का रोचक राजनीतिक व्यंग्य।

अभी विश्राम में रहें — रिश्वतखोर अफसरों के नाम गोपनीय सावधानी-पत्र

Ram Kumar Joshi Jul 13, 2026 व्यंग रचनाएं 1

प्रदेश के रिश्वतखोर अधिकारियों को एक अत्यंत गोपनीय ई-मेल मिलता है। उसमें चेतावनी दी गई है कि फिलहाल सरकार, एसीबी और ग्रह-नक्षत्र—तीनों प्रतिकूल चल रहे हैं। इसलिए कुछ समय रिश्वत से विश्राम लेकर भजन-कीर्तन में मन लगाना ही सुरक्षित है। अफसरशाही, भ्रष्टाचार और सत्ता के बदलते चरित्र पर तीखा व्यंग्य।

शोक सभा में जाने की कला: बाब्बन चाचा की फील्ड ट्रेनिंग

डॉ मुकेश 'असीमित' May 8, 2026 व्यंग रचनाएं 0

शोक सभा में जाना भी एक सामाजिक परीक्षा है। बाब्बन चाचा इस परीक्षा में इतने अनुभवी हैं कि संवेदना व्यक्त करते-करते रिश्ता, पुट्टी और प्रॉपर्टी तक की चर्चा छेड़ देते हैं।

मक्खनमहापुराण-चापलूस्योपनिषद् का उत्तर आधुनिक खंड

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 26, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मक्खनमहापुराण” चापलूस्योपनिषद् का उत्तर-आधुनिक संस्करण है, जहाँ प्रशंसा और चाटुकारिता के बीच की महीन रेखा पर तीखा व्यंग्य किया गया है। यह रचना दिखाती है कि कैसे ‘मक्खनयोग’ आज के दफ्तर, साहित्य, राजनीति और सामाजिक जीवन का अनिवार्य शास्त्र बन चुका है—जहाँ योग्यता से ज्यादा ‘लोचदार जीभ’ और सही समय पर किया गया लेपन ही सफलता की असली कुंजी है।

कोई हमारे नाम के आगे भी तखल्लुस सुझाए -व्यंग रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' May 16, 2024 Blogs 0

'कोई हमारे नाम के आगे भी तखल्लुस सुझाए -व्यंग रचना' में लेखक ने अपने लेखनी के सफर को जिस खूबसूरती से बयां किया है, वह न सिर्फ आपको मुस्कुराने पर मजबूर कर देगा, बल्कि कई बार आपको गहराई से सोचने पर भी विवश कर देगा। अगर आप भी चाहते हैं कि लेखन की इस कला में आपके नाम के आगे एक खास पहचान जुड़े, तो इस लेख को अवश्य पढ़ें। आइए, हमारे साथ जानिए कि एक डॉक्टर कैसे अपने लेखन के जरिए अपने आस-पास के माहौल का न केवल चित्रण करता है, बल्कि उसमें व्यंग्य का तड़का भी लगाता है। इस विचारोत्तेजक यात्रा में हमारे साथ शामिल हों और इस लेख को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।