अभी विश्राम में रहें — रिश्वतखोर अफसरों के नाम गोपनीय सावधानी-पत्र

अभी विश्राम में रहें
डा राम कुमार जोशी
अत्यंत गोपनीय ई-मेल प्रदेश की राजधानी से रवाना हो कर हर आफिस के हैड आफिसर तक को भेजा गया जिसकी लिखावट भी गोपनीय थी। सभी के पढ़ने में केवल इतना आया कि मैसेज कोड वर्ड में है। आपकी पहिचान सिद्ध होने के बाद ओटीपी से खुलेगा। इस अवधि तक कृपया आप अपनी औकात में रहें, कहीं लीक से हटकर छलांग लगा दी तो सीधे लोहे की सलाखों के पीछे सीट रिजर्व हो जायेगी। इसके साथ डेन्जर का खोपड़ी वाला लाल निशान छपा हुआ था। जिसकी रोशनी ज्यादा ही चमक रही थी।

सभी अफसरों को भय के साथ बड़ा कौतुक जागा, आखिर मांजरा क्या है? समाचार सीएमओ से नहीं बल्कि खाईकी से अमीर हुए अफसरों की हाई-लेवल एसोसिएशन से आया था जिसमें सदस्यों के सुनहरे भविष्य के प्रति सावधानी बरतने का आगाह था।
कुछ खोजी तो कुछ राजधानी के मूल प्रताड़ित अफसर निवासियों ने पता लगाया तो वाकई मामला अत्यंत सीरियस निकला। गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार:-

“प्रदेश के रिश्वती अफसरों की स्टेटिस्टिक्स से स्पष्ट था कि जो भी रंगे हाथों पकड़े गये है वे सभी अपने आफिस में एकता, भाईचारा व समान भाव से बंटवारा भाव को कमजोरी के साथ दकियानूसी विचार मानते हैं उनका हिटलर शाही में विश्वास व मिल बांट खाओ जैसी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के विरुद्ध मनमाना आचरण रहा है। जैसे –

अपने से जस्ट नीचे वाले पदासीन अफसर की कद्र में कमी व उससे तुरंत नीचे वाले को तव्वजो, उनके पकड़ में आने का मूल कारण सिद्ध हुआ है। जैसे कई कलेक्टर साहेबान अपने से नीचे प्रौढ़ हो रहे एडीएम से सलाह मशविरा प्राप्त नहीं करते हैं और जवां एसडीएम से खुसर-पुसर होना उनके अपने चमकीले भविष्य के स्वास्थ्य को ख़राब करने जैसा है। अफसर शाही का इतिहास यही कह रहा है। ऐसे अफसरों को अपने व्यवहार में सुधार की तुरंत आवश्यकता है। अन्यथा उनके उपर राहु की छाया और घनेरी मंडरायेंगी।

एक महोदय के किस्से को आपके लाइम लाइट में लाना अत्यंत आवश्यक है:
(नाम गोपनीय है) उनका चपरासी यानि आफिस के सबसे निचले कैडर का प्रतिनिधि दो लाख रुपए लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। रंग भी बहुत उतरा, बेचारा दस-बीस रूपये की औकात युक्त छोटे हाथ वाला कारिंदा कितना रंग पचा सकता था? एसीबी के मात्र धमकाने से नया पुराना सब कुछ उगल दिया,- “मैं तो हुकुम का गुलाम हूं। हमेशा की तरहां एक आदमी आया और थैली पकड़ा गया, और कहा कि गिन लेना और बड़े साहब की बड़ी टेबल के दराज में रख देना। मैंने वही किया।”

यदि इसके स्थान पर हायर अफसर से रूटीन कलेक्शन करवाया जाता तो बचाव संभव था।

सावधान रहें, इस केस में जेल के पानी के छीटें ठेठ उपर तक उछलें है। यह आप सभी जानते ही होंगे।
एक एसपी साहब के यहां “घर संभाल हेतु” नये इंस्पेक्टर की ड्यूटी लगाई गई। रोकड़ का हिसाब-किताब वहीं रखते थे। घर में अन्य सदस्यों से निकटता हो गईं और फुसफुसाहटें बाहर फैल गई। गाज जहां गिरनी थी वहीं गिरी। सीधे लाइन हाजिर कर दिया गया। नौजवान इंस्पेक्टर के खेल ने एसपी साहब के भविष्य को हाथों के रंग में उतार दिया। यदि यही सेवाएं किसी बुजुर्ग से ली जाती तो न वो होता न ये होता। बदनामी हुईं सो अलग।
उपरोक्त इन सभी सलेक्टिव उदाहरणों से स्पष्ट है कि माना रिश्वत लेते पकड़े जाना निंदनीय है पर इस तरह से रंगे हाथों पकड़ा जाना अत्यंत मूर्खतापूर्ण कृत्य है। फिर आपको इन्टलेक्ट कैसे माना जाए जबकि आप समाज के इन्टलेक्च्यूल सोसायटी से आते हो, ऐसी आमजन में धारणा है।

यदि पकड़ में आने की दर इसी प्रकार रहीं तो प्रदेश में एक दिन ऐसा भी आ सकता है कि यह प्रदेश,अफसर विहीन हो जायेगा और जेलें ओवर क्राउडेड भरी होगी। फिर उन्हीं अफसरों से जेल से शासन चलाने केलिए कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ेगी जैसे कुछ महीने पूर्व दिल्ली का शासन जेल से संचालित हुआ था।

इन दिनों की वर्तमान सरकार अपने को जनता के समक्ष सक्षम, ईमानदार व लोक हितकारी सिद्ध करने में तुली हुई है क्योंकि अभी आगामी दो तीन सालों में कोई चुनाव संपादित होने वाले नहीं हैं इसलिए इन सफेद दा नेताओं को हमारी धन-श्रम युक्त सहायता की आवश्यकता नहीं है। इस बिंदु को लाल स्याही से नोट करें।

इसके साथ यह भी ज्ञात हुआ कि अपने में संतुष्ट रहने वाले छुटभय्यै अधिकारी हमारी ब्रिटिश कालीन अफ़सरी एकता के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं जो भर्त्सना योग्य है। ऐसे अधिकारी स्वयं के स्थान पर आमजन को तरजीह देते रहे हैं। इन सत्यवादी कारिंदों से सावधान रहना होगा।

हो सके तो ऐसे अधिकारियों की पुख्ता पहचान कर इनके नाम केन्द्रीय एसोशिएशन को भेजें ताकि राज बदलने पर ‘टिट फोर टेट’ मुहावरे का सही प्रयोग किया जा सके।

याद रखिए हर रात के बाद सवेरा आता है। एसोशिएशन ने अपनी कर्तव्य पूर्त्ति व आप सभी के कल्याण हेतु यह पत्र प्रेषित किया है।
“बचाव ही उपाय है।”
यह पत्र आपको हौसला अफजाई केलिए लिखा गया है न कि निराश होकर अपने बंगले के सरकारी पंखे से लटक कर जीवन लीला समाप्त करने केलिए। जीवन अमूल्य है, रहेगा नर तो बसायेगा घर। विशेष याद रहे।
ज्योतिषियों के अनुसार अफसर नाम पर शनि, राहु- केतु आदि सभी क्रूर ग्रहों की कड़ी दृष्टि पड़ रही है जो एसीबी के रूप में सभी स्थानों पर छापे मार रही है।
अतः सभी रिश्वत लेऊं अफसरों से आग्रह है कि वर्तमान में इन प्रकरणों से स्वयं को अलग रख रात्रि जागरण भजन मंडलियों पर ध्यान केंद्रित करें। इसी में ही कल्याण निहित है।
यह अंग्रेजी दा अनुभवी एसोशिएशन आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए सावधानी सलाह पत्र को यही समाप्त करती है।
यह पत्र जेल प्रांगण से पूर्व शीर्ष अधिकारी द्वारा लिखा गया है। गोपनीयता में शक्ति है। इसका पालन करें नहीं तो आप अपने और हम अपने लेखें।”

Ram Kumar Joshi

Ram Kumar Joshi

डा राम कुमार जोशी ललित कुंज, जोशी प्रोल सरदार पटेल…

डा राम कुमार जोशी ललित कुंज, जोशी प्रोल सरदार पटेल मार्ग, बाड़मेर (राज) [email protected]

Comments ( 1)

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डॉ मुकेश 'असीमित'

37 minutes ago

सरकार ईमानदारी सिद्ध करने पर तुली हो, एसीबी ग्रहों की तरह वक्र दृष्टि डाले बैठी हो और चुनाव भी निकट न हों—तो अनुभवी अफसरों के लिए एक ही सलाह बचती है—“अभी विश्राम में रहें!”

डॉ. राम कुमार जोशी की यह व्यंग्य रचना भ्रष्ट अफसरशाही की एकता, हिस्सेदारी, भय और अवसरवादी नैतिकता पर करारा कटाक्ष करती है।