“जग में भारी” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 21, 2020 Poems 0

“जग में भारी ” आज के युग में मोबाइल की महत्ता को दर्शाती कविता है. कैसे मोबाइल आज एक आवश्यक निजी साथी बन गया है. कविता कुंदिली विधा में रची गयी है जिसके ८ चरण है “जग में भारी” (कुण्डली 8चरण) जग में भारी हो रहा,मोबाइल का भूत,झगड़ा दंगे हो ज़हां,पक्का लेय सबूत, पक्का लेय […]

“व्रद्ध जनो का ” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 21, 2020 Poems 0

आज के युग में वृद्ध जानो की व्यथा को बाया करती मेरी यह कविता “वर्द्ध जनों का ” आपको बहुत पसंद आएगी. कविता कुंडली विधा में रचित है जिसमे ८ चरण है. “वृद्ध जनों का”वृद्ध जनों का इस समय,नहीं है चोखो हाल?युवा वाल की इस समय ,बदल रही है चाल , बदल रही है चाल,भुले […]

“बेटी” हिंदी कविता महादेव प्रेमी द्वारा रचित

Mahadev Prashad Premi May 20, 2020 Poems 2

कविता शीर्षक “बेटी “,भगवान का सर्वश्रेष्ट आशीर्वाद बेटी के लिए समर्पित. “बेटी”कुण्डली 8चरण बेटी घर की लाडली बेटी घर का प्यार,बेटी एक मुस्कान है,कोमल हृदय उदार, कोमल हृदय उदार,आंगन की खुशवु बिटिया,मात पिता का दर्द,सहज अपनाती बिटिया, वह शाख है न फूल,जहां तितलियां नहीं हो,वो घर भी है नहीं,ज़हां बच्चियां नहीं हो, “प्रेमी” ये महमान […]

“इंग्लिश पटरानी” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 20, 2020 Poems 0

“इंग्लिश पटरानी”कुण्डली 8चरण इंग्लिश पटरानी बनी,हिंन्दी है लाचार,झेल रही निज देश में,सोतेला व्यवहार, सोतेला बर्ताव ,झेल रही अपनी हिन्दी,जो संस्कृति आधार,बनी भारत की बिंदी , आज बहुत से चला,रहे इंग्लिश विद्यालय,इंग्लिश में ही वहस , सुनें सवकी न्यायालय, “प्रेमी” इंगलिश वात,करै वो ही तो ज्ञानी,हिन्दि जगह पर बनी,आज इंगलिश पटरानी। रचियता -महादेव प्रेमी यह भी […]

“चलना सच की राह” हिंदी कविता

डॉ मुकेश 'असीमित' May 20, 2020 Poems 0

कविता शीर्षक “चलना सच की राह” हमे कैसी भी विपरीत परिस्थितियों में सच का मार्ग नही छोड़ने की प्रेरणा देती है। “चलना सच की राह” (कुण्डली 8चरणचलना सच की राह पर, आज नहीं आसान,झूठ विके झट पट यहां, सच की बंद दुकान,सच की बंद दुकान, बजी झूठों की तूती,झूठे सव आवाद ,बनी सव दुनियां झूठीभाषण […]

मंथन

Sunita Sharma May 20, 2020 Poems 6

रातें क्यूं है सोई सोई दिन की धूप भी है खोई खोई   क्या हुआ ये , कैसा है मंजर हाथों से छूटा, मानव का खंजर   इस खंजर से वो, प्रकृति को नोचता था स्वार्थ में हो अन्धा, कुछ न सोचता था   पक्षी उन्मुक्त हो, कैसे चहचहाए हवाएं भी सुगन्धित होकर गुनगुनाएं   […]

हरियाली हिंदी कविता महादेव प्रेमी रचित

डॉ मुकेश 'असीमित' May 19, 2020 Poems 0

कविता" हरियाली " प्रकृति की खूबसूरती को बयान करती कविता है. किस तरह कवी को श्रावण मास में गाँव का वो स्वछन्द वतावरण और प्रकृति की छटा याद आती है

नारी जीवन हिंदी कविता महादेव प्रेमी रचित

Mahadev Prashad Premi May 18, 2020 Poems 1

नारी जीवन’ कविता नारी के महत्व और समाज में उसके विशेष स्थान का बोध कराती है . “नारी जीवन” (कुण्डली6चरण ) नारी जीवन दायिनी,नारी से संसार,हर रिश्ते की जान,वो वो ही घर परिवार, वो ही घर परिवार,वही ये जग के नाते,नारी शक्ती रूप,प्रेम नारी से पाते, “प्रेमी” नर वुनियाद बनी ,नारी के ही तन,नारी की […]

“मिटा कभी कोई ” हिंदी कविता महादेब “प्रेमी “द्वारा रचित

Mahadev Prashad Premi May 17, 2020 Poems 0

मेरी कविता "मिटा कभी कोई" व्यक्ति के सहस और विवेक की बात करती है की कैसे एक व्यक्ति सहस और विवेक से साधन हीन होते हुए भी कर्मशील बन जाता है और जीवन में सफल हो सकता है.