The Philosophy of “Purushkaar” (Award-ism) डॉ मुकेश 'असीमित' August 21, 2025 Satire 0 Comments The hunger for awards has turned into a literary disease—treated at roadside “Purushkaar stalls” like quack clinics. A writer without an award looks impotent; with… Spread the love
“Pin the Saree, Please” – A Satirical Tale डॉ मुकेश 'असीमित' August 19, 2025 Humour 0 Comments In our home, “Can you pin my saree?” is not just a request—it’s the official ceasefire declaration after a husband-wife war. Pinning sarees for 26… Spread the love
आवारा कुत्तों का लोकतंत्र-व्यंग्य रचना Vivek Ranjan Shreevastav August 16, 2025 व्यंग रचनाएं 0 Comments “शहर की गलियों में लोकतंत्र आवारा कुत्ते के रूप में बैठा है। अदालत आदेश देती है, नगर निगम ठेका निकालता है, मोहल्ला समिति बहस करती… Spread the love
साठा सो पाठा-व्यंग्य रचना Vivek Ranjan Shreevastav August 14, 2025 व्यंग रचनाएं 2 Comments साठ के बाद ‘रिटायर’ नहीं, ‘री-फायर’ होना चाहिए—ये दुनिया के पुतिन, मोदी, ट्रंप, नेतन्याहू और खोमनेई साबित कर चुके हैं। अनुभव, जिद और आदतों का… Spread the love
आदमी और कुत्ते की आवारगी-व्यंग्य रचना डॉ मुकेश 'असीमित' August 13, 2025 व्यंग रचनाएं 2 Comments ह व्यंग्य इंसान और कुत्ते की आवारगी के बीच की महीन रेखा को तोड़ता है। अदालत के आदेश से कुत्तों को शेल्टर में डालने का… Spread the love
मेरी बे-टिकट रेल यात्रा-यात्रा संस्मरण डॉ मुकेश 'असीमित' July 14, 2025 संस्मरण 2 Comments हॉस्टल की ‘थ्रिल भरी’ दुनिया से निकली एक रोमांचक रेल यात्रा की कहानी, जहाँ एक मेडिकल छात्र पुरानी आदतों के नशे में बिना टिकट कोटा… Spread the love