अब रिश्वत देना भी एक स्किल है जनाब,एक लर्नेबल स्किल। रिश्वत लेना तो हर भारतीय गर्भ से ही अपने खून और जीन में लेकर आता है, लेकिन रिश्वत देना बड़ा जोखिम का काम है। दस रिस्क हैं यार,सामने वाला ले ले और फिर मुकर जाए! कोई रसीद-वसीद भी तो नहीं मिलती। कोई एग्रीमेंट भी नहीं। मुँह-जुबानी भरोसा भी नहीं। साल भर सेवा निर्बाध चलती रहे, ऐसा कोई कॉन्ट्रैक्ट भी नहीं। सर्विस ट्रांसफरेबल भी नहीं। इधर अफसर का ट्रांसफर हुआ और उधर दूसरा अफसर फिर नए सिरे से..बहुत ही माथापच्ची वाला मामला !
इधर देखा है, आजकल अफसर भी बड़े घाघ किस्म के हो गए हैं। जब ट्रांसफर होने वाला होता है, उस समय रिश्वत का अपना कोटा फुल ओपन कर देते हैं,खुलेआम, खुले सांड की तरह। वरना पहले यही रिश्वत लेते पकड़ा गया अफसर , कई दिन तक रिश्वत की लाल रुमाल देखकर मरखने सांड की तरह मारने दौड़ता था।
अब आप कतई चिंता न करें। अब मैदान में आ गए हैं रिश्वत देने की ऑथराइज़्ड तकनीक सिखाने वाले ‘न्यू एज रिश्वत प्रोफेशनल’। ऑनलाइन कोर्स उपलब्ध हैं, “पे एंड मेक अ वे अहेड ”, “ई एम् आई पर फर्जी एंट्री” । कोर्स पूरा होते ही ई-सर्टिफिकेट के साथ नौकरी का ऑफर लेटर, पेंडिंग डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सहित, भी मिलता है।
“हम लेकर आए हैं,रिश्वत में इनोवेशन, भ्रष्टाचार में डिजिटाइजेशन की नई तकनीक!”
“हम आपकी रिश्वत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे,’भाटी रिश्वत एंड फर्ज़ी प्लेसमेंट सर्विसेज’ आपके साथ है!”
इस नई रिश्वत-व्यवस्था में पारदर्शिता का सॉफ़्टवेयर है। जवाबदेही सरकार है! ऑर्गनाइज़्ड व्यवस्था है, इंसेंटिव है, सिंगल विंडो प्रणाली है,जहाँ रिश्वत देना अपराध कतई नहीं गिना जाएगा, बल्कि यह माना जाएगा कि आप प्रोग्रेसिव लोकतंत्र को 2047 में धकेलने में मदद ही कर रहे हैं!
बस अभी थोड़ा यह प्रावधान किया गया है कि सिस्टम हर पाँच साल में ‘फॉर्मेट’ हो जाता है। पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त किए जाते हैं। सरकारी दफ्तरों में आग लगने की घटनाएँ बढ़ जाती हैं। नए बैच के लिए, नया अपडेटेड वर्ज़न आता है,वे बग्स भी दूर करके, जो पिछली सरकार में रह गए थे।
“भाटी रिश्वत एंड फर्ज़ी प्लेसमेंट सर्विसेज” को इस बार का टेंडर मिल गया है,भ्रष्टाचार 2.0। एप लेकर आ गया पट्ठा! वाह, क्या बात है! स्लोगन देखिए,अब रिश्वत डिजिटल वॉलेट से दीजिए, हर पेमेंट पर 1% कैशबैक भी मिलेगा। और पहले 500 ग्राहकों को मिलेगा,फ्री बायोमेट्रिक अपॉइंटमेंट लेटर साइनिंग किट!
“डू इट योरसेल्फ मॉडल” पर घर बैठे अपॉइंटमेंट लेटर या फर्ज़ी दस्तावेज़ तैयार कीजिए,वो भी ऐसे, जो असली से भी ज़्यादा असली लगें।
अब रिश्वत का पूरा मॉडल बड़ा दिमागधारी हो गया है। सिस्टम खुद तय करता है कि आपको कितनी रिश्वत देनी चाहिए,आपकी जाति, उम्र, क्षेत्र, राजनीतिक झुकाव और आपके पिछले व्यवहार के आधार पर।
सोचिए, कितना अच्छा हो कि क्रेडिट स्कोर की तरह ही आपका रिश्वत स्कोर हो,
“आपका रिश्वत स्कोर 742 है। आप 1.5 लाख तक की घूस के योग्य हैं। उसी के आधार पर वे सभी विभाग फिल्टर होकर आपको दिखाए जाएंगे, जहाँ आपकी रिश्वत कैपेसिटी से मेल खाते अधिकारी उपलब्ध हैं।”
यह सब आपकी फालतू फंड की दौड़-भाग को बचाएगा!
अब हर रिश्वत देने वाले को एक आर आई एन – रिश्वत आइडेंटिफिकेशन नंबर दिया जा रहा है, जिससे उसका रिश्वत इतिहास ट्रैक किया जा सके। सरकारी फॉर्म में नए कॉलम जुड़ चुके हैं, मित्र! तनिक गौर तो करें,
आपने आख़िरी रिश्वत कब दी?
पिछली रिश्वत की ईएमआई चल रही है या बंद?
क्या पिछली रिश्वत की कोई बकाया ईएमआई है?
कहीं पिछली रिश्वत के मामले में कोई धरपकड़ तो नहीं हुई?
रिश्वत देने वाला किसी राजनीतिक या पुलिस घराने से संबंध तो नहीं रखता?
इन्हीं के आधार पर तैयार होगी आर सी एस-रिश्वत क्रेडिट स्कोर ।
जिनका RCS स्कोर 800 से ऊपर है, वही रिश्वत देने के अधिकारी होंगे। जी, कैसा लगा मेरा आइडिया?
अब भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह एप एक तरह से क्रांतिकारी साबित होगा, मित्र। जिस प्रकार से भर्तियों में पेपर लीक पर अंधाधुंध सवाल खड़े करके लोग भर्ती प्रक्रिया को निहायत ही पारदर्शी बनाने पर तुले हुए हैं, ऐसे में नेताओं, मंत्रियों और अफसरों के धंधे के पेट में जो लात मारी जा रही है, उसका एक ही निवारण है,
“भाटी रिश्वत एंड फर्ज़ी प्लेसमेंट सर्विसेज”
सौ प्रतिशत प्लेसमेंट की गारंटी के साथ।
रिश्वत सही हाथों से सही हाथों को ट्रांसफर होगी।
“ब्राइब सिंक ” जैसा फीचर भी है, जिसमें आप लाइव ट्रैक कर सकते हैं कि आपकी रिश्वत कहाँ तक पहुँची है।
ट्रैकिंग स्टेटस:
“साहब की बीवी को गहने पसंद आ गए हैं, फाइनल अप्रूवल बाकी है।”
कितनी सुविधा हो जाएगी, सोचिए ज़रा। अब रिश्वत नकद नहीं दी जाएगी। वह डिजिटली ट्रैकलेस ट्रांजैक्शन जाएगी। नोटबंदी का कोई लफडा भी नहीं। इनबिल्ट ट्रांजैक्शन सेव करने का सिस्टम रहेगा। अफसरों का प्रोफाइल होगा,कौन कितना भ्रष्ट है, उसकी ग्रेडिंग होगी, रिश्वत लेने और उसे पचाने की क्षमता की भी ग्रेडिंग होगी।
ED, CBI और मीडिया से बचने के लिए भी ‘रिश्वत एप’ में नए एडवांस फीचर हैं, जैसे,ब्लैकआउट मोड इनेबल करना होगा। ट्रांजैक्शन दिखेगा ही नहीं।
और तो और, अगर कभी खुदा न खास्ता,खाया नहीं तो ढूलाया ही सही,इस भावना के साथ किसी ने शिकायत कर दी और रेड पड़ भी गई, तो एप खुद को सेल्फ-सुसाइडल मोड में डिलीट कर लेगा,मोबाइल से ही, जी!
रिश्वत-फाइनेंसिंग भी उपलब्ध है, मित्र। वो भी क्रेडिट स्कोर मॉडल पर आधारित है,
“आपका पैन नंबर देखा गया है। आप पहले ही कई घोटालों में लिप्त हैं। आपकी नस पहले से अफसर के टेबल पर दबी हुई है। आपसे रिश्वत लेने में किसी अफसर माई के लाल को कोई जोखिम नहीं है। आप नो-रिस्क ज़ोन में हैं। आपको प्री-अप्रूव्ड रिश्वत लोन मिल सकता है।”
खोजी पत्रकारिता से बचाव हेतु इसमें खास एंटी-स्टिंग तकनीक विकसित की गई है। जैसे ही कोई हिडन कैमरा या ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस चालू होगी, सिस्टम खुद ही गीत बजा देगा,
“बड़े धोखे हैं इन राहों में… बाबूजी धीरे चलना…”
भ्रष्टाचार पीढ़ियों तक सस्टेनेबल रहे, इसके लिए ज़रूरी है कि कुछ ऐसे इनोवेटिव आइडिया अपनायें जो आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करें। इसी उद्देश्य से हर फर्ज़ी नियुक्ति के साथ एक “रिश्वत ट्री” प्लांट किया जाना भाटी बंधुओं द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत शुरू किया गया है।
और अब सबसे नया इनोवेशन,
जिसके दादा ने घूस दी थी, उसके पोते को विशेष आरक्षण मिलेगा। ऐसे परिवार, जिनमें वर्षों से रिश्वत दी जाती रही है, उन्हें “रिश्वत शिरोमणि पुरस्कार” से नवाज़ा जाएगा।
रिश्वत NFT के रूप में भी संचित रहेगी। आप अपने बच्चों के भविष्य के लिए रिश्वत निधि में रकम जमा करवाइए। इसके साथ ही रकम की सुरक्षा बीमा योजना भी रहेगी। भविष्य में आपकी अगली पीढ़ी में किसी को फर्ज़ी नियुक्ति या फर्ज़ी कागज़ के लिए रिश्वत देनी पड़े, तो भविष्य निधि से दी जाएगी।
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