वास्तविक डेमोक्रेसी तभी जब वह सायास डेमोग्राफी बदले बिना हो
लोकतंत्र का आधार जनता का शासन है, परंतु जब जनसंख्या की संरचना बदलती है तो लोकतंत्र का संतुलन डगमगाने लगता है। भारत जैसे विविध देश में यह चुनौती और गहरी है। यदि किसी समुदाय की संख्या अत्यधिक बढ़े और अन्य हाशिये पर जाएँ, तो लोकतंत्र बहुमत का खेल बन जाता है। सच्चा लोकतंत्र तब ही सम्भव है जब अवसर, संसाधन और प्रतिनिधित्व में संतुलन कायम रहे।