Prem Chand Dwitiya
Sep 4, 2026
व्यंग रचनाएं
0
सोशल मीडिया के डिजिटल दरबारों ने घाघ-भड्डरी की लोक-कहावतों से लेकर मौसम विभाग तक सबको पीछे छोड़ दिया है। पढ़िए मौसम की ऑनलाइन भविष्यवाणियों और किसानों की उलझनों पर डॉ. प्रेमचंद द्वितीय का चुटीला व्यंग्य।
Ram Kumar Joshi
Jun 24, 2026
व्यंग रचनाएं
2
गांव का धन्ना सेठ अमरीक सिंह धन, भय और प्रभाव के बल पर पंचायत को अपने पक्ष में कर चुका था। जब उसके अत्याचारों से त्रस्त ऐनाराम न्याय की उम्मीद लेकर पंचों के सामने पहुंचा, तो फैसला भी उसी शक्तिशाली व्यक्ति के हित में सुनाया गया। यह व्यंग्य-कथा बताती है कि निष्पक्षता का मुखौटा पहनी संस्थाएं किस तरह कमजोर से समर्पण और ताकतवर से शांति की अपेक्षा करती हैं।
Ram Kumar Joshi
May 25, 2026
हास्य रचनाएं
1
छोटे से गांव में फैले प्रेम प्रसंग, पंचायत की चिंता और एक चतुर कोतवाल की अनोखी परीक्षा—“भूत इश्क का” हास्य, विडंबना और देसी मनोविज्ञान से भरपूर व्यंग्य कथा है, जो इश्क़ के चढ़ते और उतरते बुखार का मज़ेदार चित्रण करती है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 16, 2026
व्यंग रचनाएं
0
फरवरी की गुलाबी ठंडक में वैलेंटाइन घाट पर इंसान प्रेम का प्रदर्शन कर रहे थे, और दो भोले गधे इंसान बनने की कोशिश में पकड़े गए। भला हो धोबी का—कम से कम दो गधों को इंसान बनने से बचा लिया!