भूत इश्क का-हास्य रचना

मनु के शारिरीक उभार कहने लग गये थे कि अब वह जवान होने जा रही है। एकांत में रहना, अपने आप अनायास व अकारण हंसना तो कभी गुमसुम हो जाना रोज की घटनाएं हों गईं। कई बार गोद लिए बच्चे को इतने जोर से भींचती कि वह रुआंसा हो जाता।
उधर गांव पुलिस के छोरे चिम्मन को भी जवानी का जोश छा रहा था। सिर के बालों की लटें बढ़कर गर्दन से नीचे तक आ चुकी थी। बात-बात में अपने हाथों की मांसल मछलियों को प्रदर्शित करता रहता था।अपनी चढ़ती जवानी का इजहार कभी सीटी बजाकर तो कभी फिल्मी गीत गुनगुना कर कर लेता था।
जब भी मौका मिले कभी तालाब किनारे तो कभी कमीज के बटन खोले मनु के घर वाली गली के किनारे बैठा रहता। कोई पूछता तो उसके ही गले पड़ जाता। गांव पुलिस का छोरा था। अभिमान तो आ ही जाता है।
मनु और चिम्मन के इश्क के किस्से छोटे से गांव में फ़ैल गये। बातों के चटकारों में जो नहीं हुआ था वह भी जुड़ गया। दोनों के घरवाले परेशान हो गये। जहां तक हो सके पाबंदियां लगी पर एक दूसरे को किये वादे सबको डरा रहे थे। कहीं कोई कुआं न भरदे या पेड़ से लटक कर जान न दे-दे। दोनों के घरवालों ने केरोसिन तक खरीदना बंद कर दिया था। गांव के मौजिज लोग सावधान तो हो गये पर इस इश्क़ का तोड़ नहीं मिल रहा था।

एक दिन शहर कोतवाल आये। गांव पंचायत बैठी,गांव पुलिस ने सारा रिकार्ड रख दिया। हुक्के पानी के आदर मान से ख़ुश हो गये। पूजा पाठी थे सो बहुत ज्यादा इंतजाम की आवश्यकता नहीं थी। गांव पंच अपने घर खाने ले गये और शालीन तरीके से मनु चिम्मन का किस्सा कह डाला। हाथों हाथ दोनों के घरवालों को बुलवा लिया और समझाइश की। दोनों परिवारों ने हाथ खड़े कर दिए कि मामला हमारे हाथ से निकल चुका है आप जो चाहें जो करें हमारी सहमति है , बदनामी से हमें बचाओ।

कोतवाल सब समझ गये। नामी मनोविज्ञानी थे। इनकी सलाह से बड़े बड़े अपराधियों ने अपनी गृहस्थियां वापस बसा ली थी।
अब तो बाज़ी मनु -चिम्मन पर अटक गई। दोनों को बुला लिया। कोतवाल ने बंद कमरे में बात की। दोनों ने एक दूसरे केलिए मरने जीने की कसमें खाईं।
कोतवाल -तुम दोनों आपस में प्रेम करते हो तो एक परीक्षा देनी होगी।
दोनों एक साथ बोल पड़े – हम तैयार हैं। आप जो कहोगे, हम करेंगे।
कोतवाल – ठीक है। इस कमरे में खंबे से तुम दोनों को एक साथ चिपके हुए बांध दिया जायेगा। एक दूसरे से प्रेम करते हो इसलिए परीक्षा अवधि में न खाने को मिलेगा न कुछ पीने को। बस चिपके साथ खड़े रहना है। अगले दिन इस समय कमरा खोलेंगे। फिर कहना कि कितना प्रेम करते हो और भविष्य में क्या चाहते हो?
आपसी मंजूरी के बाद दोनों को एकसाथ खंबे से बांध दिया। गांठें ऐसी कि खोल न सके।
एकबारगी एक प्रहर तक दोनों बड़े खुश हुए एक दूसरे को सहलाते रहे हाथ, मुंह ख़ूब चलते रहे। शरीरों के मिलने से एकबारगी तनाव भी आया और क्षणिक आनंद भी।
पर समय बीतने के साथ बदलाव हो रहा था। अब एक दूसरे के मुंह से बदबू आने लग गईं तो एक-दूसरे से मुंह दूर रखने का कहने लगे। पसीना बह निकला जैसे बरसों का इश्क़ बह कर बाहर आ रहा हो। चिपचिपे शरीर बदबू देने लग गये। अगले छः सात घंटों में तो टट्टी पेशाब सब निकल आया। अभी तो रात भी नहीं हुई थी कि दोनों के शरीर कीचड़ नुमा बन गये। कमरा बदबू से भर गया। हद तो उस समय हुई जब मनु को उल्टी हो गयी जो चिम्मन के मुंह पर सीधे गिरी।
अब तो एक दूसरे को कोसने डकारने के साथ गालियां देने लग गये। इश्क का मुलम्मा उतर गया और दोनों एक दूसरे पर चिल्लाने लग गये।
कोतवाल जी ! हमें छोड़ो। अब हम कभी नहीं मिलेंगे।
इसके साथ एक दूसरे पर फसाने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। तू रांड ऐसी और तू मल्लूका ऐसा।
अभी तक बारह घंटे भी बीते नहीं दोनों एक-दूसरे को जान से मारने केलिए चीख रहे थे।
आखिर बाहर बैठे शहर कोतवाल को दया आ गयी। कमरा खोल अंदर आये और दोनों को खंबे से खोल अलग किया ही था कि चिम्मन पूरब की ओर भागा तो मनु उसकी उल्टी दिशा में।
शहर कोतवाल उनको आवाज देते रहे पर दोनों के सिर से जैसे इश्क का भूत भागा वैसे ही खुद भी भाग गये।

Ram Kumar Joshi

Ram Kumar Joshi

डा राम कुमार जोशी ललित कुंज, जोशी प्रोल सरदार पटेल…

डा राम कुमार जोशी ललित कुंज, जोशी प्रोल सरदार पटेल मार्ग, बाड़मेर (राज) [email protected]

Comments ( 1)

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डॉ मुकेश 'असीमित'

1 hour ago

इश्क़ जब तक दूर से होता है, गुलाब लगता है…
ज़्यादा देर पास रहो तो असली “मानवता” बाहर आने लगती है। 😄
पढ़िए गांव के चर्चित प्रेम प्रसंग और कोतवाल की अनोखी “लव टेस्ट” कथा — भूत इश्क का।