बालम, आवो हमारे गेह रे—भीतर बसे प्रियतम की खोज का कबीर निर्गुण भजन

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 25, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

भागती जिंदगी, रिश्तों की भीड़ और उपलब्धियों के बीच मन क्यों सूना रह जाता है? पढ़िए और सुनिए कबीर-भाव से प्रेरित लोक–सूफ़ी भजन “बालम, आवो हमारे गेह रे” की आत्मिक यात्रा।

तन माटी रो पुतला: कबीर भजन श्रृंखला की चौथी निर्गुण भजन प्रस्तुति

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 19, 2026 Culture 0

“तन माटी रो पुतला” डॉ. मुकेश असीमित की कबीर भजन श्रृंखला की चौथी रचना है। यह निर्गुण भजन देह-अभिमान, माया, धन और जीवन की क्षणभंगुरता पर कबीर-वाणी जैसे सहज लोक-सत्य को सूफ़ियाना-फोक संगीत शैली में प्रस्तुत करता है।