हुकूमत बदली और हवेलियाँ काँपी: बुलडोज़र राजनीति पर तीखा व्यंग्य

Ram Kumar Joshi Apr 18, 2026 हिंदी कविता 1

एक तीखा व्यंग्य जो सत्ता परिवर्तन, बुलडोज़र राजनीति और रसूखदारों के बदलते चेहरे पर करारा कटाक्ष करता है। पढ़ें यह समकालीन सामाजिक-राजनीतिक कविता।

वाह भाई वाह -कविता -हास्य व्यंग्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 7, 2025 हिंदी कविता 0

सामाजिक विडंबनाओं पर करारा व्यंग्य करती ये कविता ‘वाह भाई वाह’ हमें उन विसंगतियों का एहसास कराती है जहाँ ज़िंदगी त्रासदी बन चुकी है, फिर भी आमजन तमाशबीन बना बैठा है। गड्ढों, महंगाई, रिश्तों की दूरी और शिक्षा की मार के बीच भी मुस्कुराता देश – ‘वाह भाई वाह’!