डॉ मुकेश 'असीमित'
May 25, 2026
News and Events
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गंगापुर सिटी में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की साहित्यिक संगोष्ठी में ‘तत्वमसि’ उपन्यास, आत्मबोध, विश्वबोध और साहित्य की सामाजिक भूमिका पर गहन चर्चा हुई। डॉ. मुकेश गर्ग ने उपन्यास की समीक्षा प्रस्तुत की।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 19, 2026
व्यंग रचनाएं
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जब राजनीति पूजा करने लगे
और पूजा राजनीति करने लगे—
तब शंभो भी सोच में पड़ जाते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 18, 2026
India Story \बात अपने देश की
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पराधीनता का प्रश्न—इतिहास का नहीं, मानसिकता का “भारत बार-बार पराधीन क्यों हुआ?”—यह सवाल सुनते ही हमारे भीतर एक तैयार-सा उत्तर उठता है: “बाहरी आक्रमणकारी ताक़तवर थे… हमारे पास हथियार नहीं थे… हमारी सेनाएँ कमज़ोर थीं… हम तकनीक में पीछे थे…”। ये सारे उत्तर आंशिक रूप से सही हैं, पर पूर्ण नहीं। क्योंकि दुनिया में बहुत-से […]
Prem Chand Dwitiya
Feb 4, 2026
व्यंग रचनाएं
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पद्म पुरस्कारों की सूची ने एक बार फिर साबित किया कि नाम पहले नहीं, काम पहले आता है। जो लोग जिंदगी भर गुमनाम रहकर समाज की सफाई, शिक्षा, पर्यावरण और संवेदना की नींव मजबूत करते रहे—वही एक दिन नाम बन गए। असल में नाम कोई पदक नहीं, वह गुमनामी से निकलकर कर्मों की पहचान बन जाता है।
Sanjaya Jain
Jun 29, 2025
Poems
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यह आत्मपरिचयात्मक कविता एक लेखक के अंतरमन की झलक देती है — जहाँ लेखनी के गुण-दोष, धनहीनता में भी मन की समृद्धि, और समाज को जाग्रत करने की शक्ति निहित है। यह भावनाओं, चेतना और सभ्यता को एक नए रूप में ढालने का आह्वान करती है।