डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 27, 2026
Self Help and Improvements
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हम अपने निर्णयों को स्वतंत्र मानते हैं, पर क्या वे सच में हमारे हैं? जब तक हम अपनी आदतों, भय और उधार की इच्छाओं को पहचान नहीं लेते, तब तक हम प्रतिक्रिया-प्रधान जीवन जीते हैं। जागरूकता ही वास्तविक स्वतंत्रता का प्रारंभ है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Feb 18, 2026
India Story \बात अपने देश की
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पराधीनता का प्रश्न—इतिहास का नहीं, मानसिकता का “भारत बार-बार पराधीन क्यों हुआ?”—यह सवाल सुनते ही हमारे भीतर एक तैयार-सा उत्तर उठता है: “बाहरी आक्रमणकारी ताक़तवर थे… हमारे पास हथियार नहीं थे… हमारी सेनाएँ कमज़ोर थीं… हम तकनीक में पीछे थे…”। ये सारे उत्तर आंशिक रूप से सही हैं, पर पूर्ण नहीं। क्योंकि दुनिया में बहुत-से […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 30, 2025
Lifestyle
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हम बच्चे के हाथ में खिलौना नहीं, भविष्य थमा देते हैं।”
“शरारत दोष नहीं, जीवन की पहली प्रयोगशाला है।”
“थोपे गए संस्कार अनुशासन पैदा करते हैं, चेतना नहीं।”
“गलती न करने का अभिनय, गलती करने से ज़्यादा अनैतिक है।”
“जिस बचपन में शरारत मर जाती है, उस जीवन में साहस कभी जन्म नहीं लेता।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jun 30, 2025
Poems
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यह कविता एक बच्चे की अंतरात्मा की पुकार है—जो केवल अपने लिए जीना चाहता है, किसी की महत्वाकांक्षा की ट्रॉफी बनकर नहीं। वह अपने सपनों को जीना चाहता है, न कि दूसरों के अधूरे सपनों को ढोना। उसमें संवेदना है, विद्रोह है और मानवता की गूंज है।