वाह भाई वाह -कविता -हास्य व्यंग्य

वाह भाई वाह –

सड़कों पर गड्ढे ,दारु के अड्डे , बैठे निठल्ले ,सन्डे हो या मंडे

जेबें खाली, सपने खयाली ,महंगाई डायन खाये जाये साली ,

गली के छोरे ,निरे छिछोरे , मारें सीटी निकले आह

फिर भी दिल बोले , ‘वाह भाई वाह’।

ट्रैफिक जाम में फंसा आवाम , महंगाई की मार ,बहरी सरकार ,

चाय भी भी नसीब नहीं, कोई तो करीब नहीं ,

ऑफिस की रेलमपेल ,घर बनी जेल,जीने की नहीं रही चाह,

फिर भी दिल बोले , ‘वाह भाई वाह’।

स्कूल की महंगी फीस ,पेरेंट्स की निकली टीस ,

खेलों में नबाब इनके रिजल्ट खराब

पढ़ाई का बोझ,होमवर्क रोज , बच्चों पर संकट अथाह

फिर भी दिल बोले , ‘वाह भाई वाह’।

खोखली बातें , बेचैनी में कटी रातें ,

उजड़ते गाँव,उजड़ी पीपल की छाँव ,

फूटी नहीं कोडी,भूख निगोड़ी ,कठिन पनघट की राह ।

फिर भी दिल बोले , ‘वाह भाई वाह’।

रिश्ते हुए दूर,सब अपने में मगरूर

सीमित राहें , ‘असीमित’ चाहें ,

रोटी के जुगाड़ में,रिश्तों की आड़ में सब कुछ हुआ तबाह

फिर भी दिल बोले , ‘वाह भाई वाह’।

रचनाकार -डॉ मुकेश असीमित

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डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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