“ज्यों जल” हिंदी कविता by Mahadev Premi

आज की मेरी कविता “ज्यो जल ” धन के सही उपयोग के बारे में बताती है.

” ज्यों जल”(कुण्डली 6चरन।)

ज्यों जल बाढ़े नाव में,घर में वाढे दाम ,
भर भर अंजलि निकालिये,यह सज्जन को काम,

यह सज्जन को काम,नाव जल कम नहिं होगा,
पैसा भी उस भांति,नित्य घर में बाढेगा,
,

“प्रेमी”कल युग माहि,बात मन राखो हर पल,
दोऊ हाथ उलीच,नाव में वाढे ज्यों जल

कविता का भावार्थ

नाव में बढ़ा जल और घर में बढे धन दौलत की एक ही दशा होती है. जैसे नाव में बढ़ा जल अगर अंजलि भर भर बहार को निकला नहीं गया तो वह नाव को डूबा देगा उसी प्रकार घर में बढे धन को अगर सदुपयोग नहीं किया तो बह विनाश की और ले जाता है ||

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Mahadev Prashad Premi

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी…

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी गर्ग होस्पीटल गंगापुर सिटी ,स0 मा0 (राज0)322201 मोबाईल 9667627720 संप्रति:चिकित्सा कर्मी कार्य क्षेत्र:चिकित्सा कार्य लेखन विधा-गजल,गीत,कविता और पहेली लेखन आदि प्रकाशन:(1)”बूझोबल” पहेली संग्रह प्राप्त सम्मान:कई सामाजिक व साहित्यिक सम्मान प्राप्त लेखनी उद्देश:सामाजिक विसंगतियों पर लिखना प्रेरणा पुञ्ज:स्वयम एवम अन्य लेखक रुचियां: साहित्य लेखन/अध्यापन

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