देशभक्ति वर्क फ्रॉम होम: डिजिटल क्रांतिकारियों पर तीखा व्यंग्य

देशभक्ति वर्क फ्रॉम होम

अब देखिए, देश बदला है तो जाहिर है देशभक्ति भी बदली है। अब आप भी कहाँ पुराने देशभक्ति का राग छेड़ने लगे हैं… गया वो ज़माना जब देशभक्ति हल चलाते किसान के पसीने में टपकती थी, सैनिक की वर्दी में शान से सीना उठाए चलती थी, और देश के युवा खून में उबाल मारती थी। लेकिन अब आ गई है डिजिटल पालने में पली-बढ़ी यह कोमल पीढ़ी, और इनकी देशभक्ति की पौध,वो भी वाई-फाई से सिंचित होती है। यह पौध मनो की छुई मुई जैसी  कोमल भई  जो  नेटवर्क की तर्जनी उंगली भर दिखाने से मुरझा जाहीं । टेक्नोलॉजी ने ये सुविधा तो दे दी कि आप देशभक्ति भी वर्क फ्रॉम होम की तरह घर से ही निपटा सकते हैं।

आज का युवा अगर ऑनलाइन न हो, तो उसे लगता है कि देश खतरे में है।
जिसने आज तक मोहल्ले की लंगड़ी टांग की दौड़ में भाग नहीं लिया, वह इंस्टाग्राम पर “Running for Bharat!” लिखकर ऐसे हाँफ रहा है जैसे अभी-अभी कारगिल फतह करके आया हो। और जिसने आठवीं में ‘मौर्य कुल’ को ‘मोर कूल’ समझा था, वह आज मुगलों को ऐसे कोस रहा है मानो अकबर ने उसके जन्मदिन का केक काटने से इनकार कर दिया हो।

ऐसे हैं हमारे देश के ये नौनिहाल क्रांतिकारी,इनकी सारी रणनीति दिन में आठ बार DP बदलने में खप जाती है। शायद दुश्मन देश को भ्रमित करने के लिए ये सब करना पड़ता है,दुश्मन बेचारा सोचता रह जाए कि हमला किस फोटो से होगा! और कुछ ऐसे भी हैं जिनकी देशभक्ति का कोटा ‘मॉर्निंग शिफ्ट’ में ही पूरा हो जाता है,सुबह-सुबह दस लोगों को टैग करके राष्ट्र सेवा का अपना महत्वपूर्ण योगदान दे देते हैं,“Feeling love for my country with Pooja and 10 more friends।”

जिसने ATM से पैसे निकालते समय चार बार इधर-उधर देखा हो, वह अब “नकली नोटों की जड़ से सफाई” पर TED Talk दे रहा है। और जिसने घर में कभी अपनी चड्डी नहीं धोई, वह ‘स्वच्छ भारत’ पर भाषण देता है,वो भी बिसलेरी की बोतल हाथ में लेकर, ताकि शुद्धता बनी रहे।

कभी-कभी तो लगता है कि व्हाट्सएप इस देश का नया संसद भवन बन गया है, जहाँ रोज़ इतने ‘अंकल एंड पार्टी’ हैं जो नया अध्यादेश पास करते हैं,“500 लोगों को फॉरवर्ड करो, देश बच जाएगा।” कुछ अंकल ज़्यादा ही भावुक हो जाएँ तो माता रानी का पाप लगने की वैधानिक चेतावनी भी देंगे,अगर इसे फॉरवर्ड नहीं किया तो! और फिर फेसबुकिए शायर! उनकी रचनाएँ पढ़कर ग़ालिब की आत्मा अगर कहीं आस-पास भटक रही हो, तो वह पुनः शवासन में चली जाए,“लाहौल विला कुव्वत, ये क्या देख लिया!”

कल तक “क” से “कबूतर” लिखते-लिखते काकी याद आ जाती थीं,
आज वही उंगलियाँ लिख रही हैं,
“क़ैद-ए-वतन से बेहतर है, वाई-फाई में लिपटी देशभक्ति का आलिंगन।”

इनका राष्ट्र-प्रेम बड़ा उफान मार रहा है, बात-बात में छलक पड़ता है। ज्यादातर वो हैं जो रिजेक्टेड प्रेमी हैं,आशिकी में फेल होकर अब देशभक्ति के नए वेंचर में खुद को जबरन ढकेल रहे हैं। ‘रिजेक्ट हुआ प्रपोज़ल’ इनके प्रेम को देश प्रेम में बदल रहा है। और जिनके पास अपना आधार कार्ड तक स्कैन नहीं है, वे पाकिस्तान को सर्टिफिकेट दे रहे हैं,“तुम्हारा अस्तित्व अब समाप्त, बच्चू!”

इनके आइडिया भी बड़े कमाल के हैं, मित्र! मैंने एक ऐसे ही क्रांतिकारी का संदेश देखा,कसम के साथ कि “अगर सच्चा भारत का पुत्र है तो इसे 100 लोगों को फॉरवर्ड करेगा”,संदेश था: “अरे सुन ले पाकिस्तान… हम हैं 150 करोड़! अगर बॉर्डर पर जाकर सबने मूत्र विसर्जन कर दिया तो पाकिस्तान उसी में बह जाएगा!”
ये वही क्रांतिकारी हैं जो रेलवे प्लेटफॉर्म पर दस रुपये की पानी की बोतल के लिए रेल मंत्री को कोसते हैं, और अगले ही पल #BoycottChina ट्रेंड करवाते हैं,वो भी अपने चाइनीज मोबाइल से। यह आत्मनिर्भरता का ऐसा मॉडल है, मित्र, जिसे देखकर नोबेल पुरस्कार धारी अर्थशास्त्री भी चक्कर खा जाएँ।

महंगाई, बेरोज़गारी, जनसंख्या,इन पर इनके पास पूरी कॉपी-पेस्ट की फाइल है। यह ऐसी क्रांति है जो वर्क फ्रॉम होम में ही निपट जाती  है। घर से बाहर निकलना इनके सिद्धांतों के खिलाफ है। माँ कहे,“बेटा, सब्ज़ी ले आ,” तो बेटा इस मातृभक्ति के चक्कर में नेटवर्क का सिग्नल डाउन कर लेता है।
जिन्दगी में आर टी आई बस एक बार ही लगाई  यह जानने के लिए की सरकार की फ्री वाई फाई स्कीम कब लागू होगी?”

असल में, ये क्रांति नहीं, ‘कंट्रोल+C, कंट्रोल+V’ का आंदोलन है। विचार भी कॉपी-पेस्ट, गुस्सा भी फॉरवर्डेड, और देशभक्ति भी डाउनलोडेड। ये डिजिटल योद्धा न्यूज़फीड पर लड़ते हैं, जहाँ तलवार की जगह कमेंट और ढाल की जगह इमोजी काम आ रही हैं।

और इनकी बहादुरी का असली परीक्षण तब होता है जब नेट पैक खत्म हो जाता है। जैसे ही डेटा समाप्त, वैसे ही क्रांति ‘फ्लाइट मोड’ में चली जाती है,देशभक्ति भी एयरप्लेन की तरह लैंड कर जाती है।

हे देश के पंखविहीन कपोतों, हे कीबोर्ड क्रांतिकारियों! हर नोटिफिकेशन पर काँपना बंद करो, हर ट्रेंड पर थरथराना बंद करो, और हर बहस में वाइब्रेशन मोड पर जाना बंद करो। अगर वास्तव में ही “देश सेवा” का मन हो, तो पहले अपने मोबाइल में ‘जमीर’ ऐप अपडेट कर लो।
बाकी, लाइक, शेयर, सब्सक्राइब से देश नहीं बदलता।

जय व्हाट्सएप! जय ट्विटर!
क्रांति अमर रहे… जब तक डेटा पैक ज़िंदा रहे!

डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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