कचरा कचरा ही रहेगा-व्यंग्य कविता

कचरा, कचरा ही रहेगा —

चाहे आसमान में उड़ जाए,

या चाँदी जड़ी थाली में परोस दिया जाए।

वह अवसरवादी पंखों से उड़ेगा,

पर पहली वर्षा में मिट्टी से चिपक

घिसटता जाएगा।

चाहे स्वर्ण-आभूषण पहन ले,

या इत्र-सिंचित हो जाये—

परंतु दुर्गन्ध की नैसर्गिक गन्ध ,

हर हाल में फैलाए ।

सड़क पर बिखरे कणों में नहीं,

अब वह कार्यालयों में भी पसरा है—

नीति की फ़ाइलों में घुसा,

नैतिकता के पेट में मसोसा जा रहा है।

कचरा —

बन बैठा है मानवीय संबंधों का नया व्याकरण।

वह चाय के प्यालों में बहस बन कर उफनता है,

और व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ‘ज्ञान’ में

अवधारणाओं को सड़ा देता है।

कभी संगति बनता है वहशियों की,

कभी संसद की दीवारों पर चढ़ जाता है।

कभी दंगे की चिनगारी बन,

धर्म की आड़ में रंग बदल जाता है।

वह हर उस जगह मिलेगा —

जहाँ मौन बिकता है,

विवेक गिरवी रखा जाता है।

जहाँ आत्मा के कोने में

नियम, मूल्य और विवेक का पोस्टमॉर्टम किया जाता है।

“एक प्रतीकात्मक चित्र: चांदी-जड़ी थाली में रखा चमकता कचरा, जिसके ऊपर सुनहरे आभूषण और इत्र की शीशी पड़ी है, पर फिर भी उसके चारों ओर दुर्गन्ध का धुंधलापन फैला हुआ। पृष्ठभूमि में एक ऑफिस टेबल पर फ़ाइलें, टूटी नैतिकता के प्रतीक के रूप में बिखरी हुई। ऊपर आकाश में कागज़ी पंखों वाला कचरा उड़ता है और बारिश की पहली बूंद में गिरकर मिट्टी में चिपक जाता है। संसद भवन की दीवार पर कचरे की परछाईं, दंगे की आग, और व्हाट्सएप मोबाइल स्क्रीन—सब एक ही दृश्य में समाहित, मानवीय संबंधों की सड़ांध को दर्शाते हुए।”

कचरा —

जो केवल सड़कों पर नहीं,

संज्ञा और बोध के मध्य भी उगता है।

जो साहित्य में विचार नहीं,

कंटकीर्ण बनकर पंक्तियों में चुभता है।

उसे उड़ाओ,

तो वह झंडे पर चिपक जाएगा।

उससे मित्रता करो,

तो वह आपकी पहचान निगल जाएगा।

कचरा, कचरा ही रहेगा।

स्वर्णमृग की खाल ओढ़ भी ले,

तो अंततः—

जूतों के नीचे ही दबेगा।

— डॉ. मुकेश ‘असीमित’

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डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

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