ये फिक्रमंद लोग-हास्य व्यंग्य

Sanjaya Agrawal 'Mradul' Jul 6, 2025 व्यंग रचनाएं 1

यह रचना आज के 'व्हाट्सएप्प ज्ञानियों' पर करारा व्यंग्य है, जो ब्रह्म मुहूर्त में ही टॉयलेट से लेकर तहज़ीब तक ज्ञान बाँटने निकल पड़ते हैं। फॉरवर्ड्स, वीडियो लिंक, भक्ति संदेश और कविताओं से समाज की चेतना बढ़ाने का ज़िम्मा इन्हीं सज्जनों पर है — चाहे फ़ोन हैंग हो जाए या दिमाग।

अमरूद की अमर कथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 6, 2025 व्यंग रचनाएं 1

इस व्यंग्य चित्रण में एक हाई-फाई कॉलोनी की किट्टी पार्टी में एक अधिकारी की पत्नी, बाढ़ प्रभावित गांवों की त्रासदी को पर्यटन अनुभव की तरह प्रस्तुत करती है। महिलाएं फोटो देखकर वाह-वाह करती हैं — किसी के डूबते मवेशी, किसी माँ का छत पर रोता चेहरा भी ‘सीन’ बन जाता है। यह रचना सामाजिक संवेदनहीनता और आधुनिक तमाशाई मानसिकता पर करारा कटाक्ष है।

बाढ़ पर्यटन — जब त्रासदी तमाशा बन जाए! व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 6, 2025 व्यंग रचनाएं 1

बाढ़ सिर्फ पानी नहीं लाती, संवेदनहीनता की परतें भी उघाड़ती है। "बाढ़ पर्यटन" एक ऐसी ही कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जहाँ किट्टी पार्टी की महिलाएं बाढ़ को तमाशा मान बैठती हैं। अफसरशाही, मीडिया, सोशल मीडिया फॉलोअर्स और सजी-धजी संवेदनहीनता — सब मिलकर बना रहे हैं एक अमानवीय हास्यप्रद दृश्य। हँसी की आड़ में छुपी करुणा की चीख यहाँ साफ सुनाई देती है।

अधगल गगरी छलकत जाए-हास्य-व्यंग्य

Vivek Ranjan Shreevastav Jul 5, 2025 व्यंग रचनाएं 2

आज की डिजिटल दुनिया में अधजल गगरी का छलकना नए ट्रेंड का प्रतीक बन गया है। सोशल मीडिया पर ज्ञान कम और आत्मविश्वास ज़्यादा दिखाई देता है। व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी, ट्विटर वॉरियर्स और इंस्टाग्राम फिलॉसफर — सभी अधूरे ज्ञान से ज़ोरदार शोर करते हैं, जबकि असल ज्ञानी मौन रहते हैं।

लिख के ले लो यार ..हास्य व्यंग्य रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 4, 2025 व्यंग रचनाएं 2

हर मोहल्ले में एक ‘भविष्यवक्ता अंकल’ होते हैं—जो हर शुभ कार्य में अमंगल ढूँढने को व्याकुल रहते हैं। उनकी ज़ुबान पर एक ही ब्रह्मवाक्य रहता है—“लिख के ले लो!” ये आत्ममुग्ध, आशंकित और नकारात्मकता के सर्टिफाइड वितरक होते हैं, जो खुशखबरी को अपशकुन मानते हैं।

रिश्वतोपाख्यान — श्रीकृष्णार्जुन संवाद

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 3, 2025 व्यंग रचनाएं 1

श्रीकृष्ण अर्जुन को कलियुग की विभीषिका 'रिश्वत' के स्वरूप से अवगत करा रहे हैं। पार्श्व में छिपा राक्षसी रूप और धनराशि की पोटलियाँ इस भ्रष्टाचार के मायावी विस्तार का प्रतीक हैं। यह संवाद धर्म, विवेक और युगबोध का अद्भुत मिश्रण है।

भाषा एवं राजभाषा के रूप में हिंदी की विकास यात्रा

Dr Shailesh Shukla Jul 3, 2025 हिंदी लेख 0

यह आलेख हिंदी भाषा की ऐतिहासिक जड़ों, संवैधानिक स्थिति, डिजिटल युग में इसकी भूमिका और वैश्विक पहचान की गहराई से पड़ताल करता है। हिंदी के सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक विकास को रेखांकित करते हुए, इसे एक प्रभावी राजभाषा और सांस्कृतिक संवाहक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्राइवेट अस्पतालों का एनकाउंटर

Dr Rajshekhar Yadav Jul 2, 2025 Blogs 0

प्राइवेट अस्पतालों पर लूट के आरोप लगाने से पहले समाज को याद रखना चाहिए कि हमने ही इन्हें 'उपभोक्ता वस्तु' बना दिया। जिस प्रोफेशन पर सबसे ज़्यादा कानून लागू हों, जहां हर चूक पर जुर्माना लगे, और फिर भी हम मुफ्त सेवा की अपेक्षा करें — क्या ये किसी एनकाउंटर से कम है?

कैसे एक कंपनी महान बनती है -good to great company-Book summery Jim Collins

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 2, 2025 Blogs 0

महान कंपनियाँ केवल लाभ नहीं, एक दृष्टिकोण और विरासत बनाती हैं। 'गुड इज़ द एनिमी ऑफ़ ग्रेट' की अवधारणा पर आधारित यह लेख बताता है कि कैसे सही नेतृत्व, हेजहॉग कॉन्सेप्ट और सच्चे मूल्य एक कंपनी को औसत से महान बना देते हैं। एक जरूरी विचारशील पढ़ाई।

माँ बनने से कठिन है माँ बने रहना ! डॉ. श्रीगोपाल काबरा

Dr Shree Gopal Kabra Jul 2, 2025 Blogs 0

माँ बनने से कठिन है माँ बने रहना !डॉ. श्रीगोपाल काबरा उसने नौ महीने गर्भ वहन किया। प्रसव हुआ। प्यारा सा खूबसूरत बच्चा। शहर आई और बच्चे को मुँह-अंधेरे चुपके से बालगृह के पालने में छोड़ दिया। नहीं, बच्चा अवैध नहीं था। पति साथ था, दूर कोने में खड़ा था। वह पलट कर देखने लगी […]