युद्धोन्माद, बाज़ार और डीप स्टेट : सभ्यता के कगार पर खड़ी मानवता

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 10, 2026 समसामयिकी 0

“युद्ध अब अचानक नहीं फूटता—वह पहले बाज़ार में उतरता है, फिर जीवन में।” “जब शांति लाभकारी नहीं रह जाती, तब युद्ध नैतिक घोषित कर दिया जाता है।” “हर युद्ध के बाद कोई विजेता नहीं होता—सिर्फ़ आँकड़े होते हैं।” “इतिहास मनुष्य से एक ही प्रश्न पूछता है—क्या तुमने पहले से सीखा?”

बीता साल: घटनाओं का नहीं, प्रतिक्रियाओं का इतिहास

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 27, 2025 India Story 0

यह साल किसी कैलेंडर की तरह नहीं बीता, बल्कि अधूरी डायरी की तरह—जहाँ स्याही कम और धड़कन ज़्यादा थी। घटनाएँ बदलीं, लेकिन उनसे ज़्यादा बदले हमारे डर, ग़ुस्सा और चुप्पियाँ। यह साल हमें किसी नतीजे तक नहीं लाया, बल्कि सवालों की लंबी सूची सौंप गया—कि हम क्या सोचते हैं, कैसे सोचते हैं और कब चुप रहते हैं। आतंक, युद्ध, आस्था, कॉमेडी, सोशल मीडिया—हर मोर्चे पर यह साल हमें भीतर तक झकझोरता रहा। इतिहास बनता रहा, और हम बदलते रहे।

महँगी फ्लाइट, मनमाना किराया और एयरपोर्ट पर बस अड्डे जैसे हालात

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 6, 2025 समसामयिकी 0

हवाई जहाज़ के टिकट बुक करते समय हम लोग बड़े भोले होते हैं। वेबसाइट पर लिखा होता है – “ऑन टाइम इज़ अ वन्डरफुल थिंग” और हम मान लेते हैं कि यह कोई वादा नहीं, वेद मंत्र है। क्रेडिट कार्ड से पैसा कटते ही हमें लगता है कि हमने अपने भाग्य पर भी एक “कन्फर्म […]

“सरदार @150 यूनिटी मार्च : युवा कदमों से गूँजता एक भारत, आत्मनिर्भर भारत”

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 16, 2025 News and Events 0

“कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कोहिमा तक 779 जिलों में एक साथ उठते कदम, सरदार पटेल के सपने को फिर से जीवंत करेंगे—यह पदयात्रा सिर्फ दूरी नहीं, दिलों को जोड़ने की यात्रा है।” “करमसद से एकता नगर तक 152 किलोमीटर की राष्ट्रीय पद यात्रा उन युवाओं के संकल्प की कहानी होगी, जो खादी पहनकर एकता, आत्मनिर्भरता और सेवा के मूल्यों को अपने जीवन में उतारने निकले हैं।” “सरदार @150 यूनिटी मार्च सिर्फ स्मरण नहीं, बल्कि युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का खुला निमंत्रण है—जहाँ हर कदम ‘एक भारत, आत्मनिर्भर भारत’ का नारा बनकर गूँजेगा।”

हादसों का इन्तजार है

Ram Kumar Joshi Nov 5, 2025 India Story 0

देशभर में बढ़ते सड़क हादसे अब सिर्फ समाचार नहीं, बल्कि हमारी संवेदनहीन व्यवस्था का आईना हैं। जहाँ नियम पालन करने वाले मरते हैं, और व्यवस्था सिर्फ बयान जारी करती है। ट्रैफिक पुलिस की आँखें खुली हैं — मगर देखती नहीं। जब तक जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों में रहेगी, सड़कें श्मशान बनती रहेंगी।

भारत की बेटियाँ: एक राग, एक विजय — Women’s ICC Champions

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 3, 2025 India Story 0

“कप्तानों से बढ़कर, यह जीत उन सपनों की है जो साथ दौड़ते हैं—एक राग, एक भारत।” “जब विविध सुर मिलते हैं, जीत का आलाप अपने आप जन्म लेता है—भारत विश्वविजेता।” “साहस, संयम और संगति—इन्हीं तीन रंगों से तिरंगा ट्रॉफी छू लेता है।”

नोबेल, भारतीय लेखक और वैश्विक संवाद की सीमाएँ

डॉ मुकेश 'असीमित' Oct 16, 2025 शोध लेख 0

“भारतीय साहित्य में गहराई की कमी नहीं, पर संवाद और अनुवाद की दीवार उसे वैश्विक कानों तक पहुँचने नहीं देती। नोबेल से बड़ा है वह शब्द जो सीमाएँ लांघ जाए।”

‘डिजिटल इंडिया’ से ‘डिजिटल असमानता’ तक : क्या सबको मिल रहा है बराबरी का लाभ?

Dr Shailesh Shukla Jul 29, 2025 समसामयिकी 1

डिजिटल इंडिया के दस वर्षों बाद, आज़ादी और समानता का वादा अधूरा प्रतीत होता है। ग्रामीण भारत अब भी डिजिटल संसाधनों की कमी, तकनीकी अक्षमता और भाषा बाधाओं से जूझ रहा है। सरकारी ऐप्स और योजनाएं केवल कागज़ों में प्रभावी हैं, ज़मीनी स्तर पर आमजन तकनीकी अंधेरे में हैं। क्या यह समावेशी सशक्तिकरण है या डिजिटल बहिष्करण?

“कारगिल विजय दिवस 2025 – नई पीढ़ी के लिए शौर्यगाथा का संदेश”

Poonam Chaturvedi Jul 26, 2025 Important days 0

"अगर आप चाहें, तो इतिहास रच सकते हैं; लेकिन अगर आप चाहें कि पीढ़ियाँ उसे याद रखें, तो उसे अपने लहू से लिखना होगा।" कारगिल केवल युद्ध नहीं, चेतना का पुनर्जागरण था। कारगिल विजय दिवस — स्मरण से आगे, राष्ट्रधर्म का अभ्यास।

“उपराष्ट्रपति का इस्तीफ़ा – लोकतंत्र की चुप्पी में एक तेज़ दस्तक” 

Poonam Chaturvedi Jul 24, 2025 समसामयिकी 0

उपराष्ट्रपति का इस्तीफा सिर्फ एक पद त्याग नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के संतुलन में आए गहरे असंतोष का संकेत है। यह घटना नीतिगत असहमति, राजनीतिक पुनर्संरेखण या वैचारिक टकराव का प्रतिनिधित्व कर सकती है। ऐसे समय में संविधान, संसद और जनविश्वास की स्थिरता का मूल्यांकन आवश्यक हो जाता है। यह इस्तीफा लोकतंत्र की जड़ों को झकझोरने वाली घटना बन जाता है।