“Roses and Thorns” : मेरी एक नई तीखी-मीठी उड़ान!

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 27, 2025 Blogs 0

Roses and Thorns – a satire bouquet straight from the OT (Operation Theatre) of an orthopedic doctor turned wordsmith. No enlightenment. No “6-pack abs” philosophy. Just full-blown prep to shake your brainstem and tickle your funny bone. 👉 From viral buffaloes to potholes with divine ambitions, every chapter is a comic detonation with a side of social X-rays. You may spot a few fractures in society that no scan could detect – but satire can.

साल की विदाई: क्या भूलूं, क्या याद करूं?

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 31, 2024 Blogs 0

यह वर्ष अपने अंतिम पायदान पर है, और हम सब एक नई छलांग लगाने की तैयारी में हैं। कल एक नया सवेरा, नया साल, और नया सूरज लेकर आएगा। पर मन पूछता है—क्या भूलूं, क्या याद करूं? समय की इस गहरी घाटी में झांकते हुए, ऐसा लगता है जैसे हर बीतता साल हमारे जीवन की […]

Mooshak Maharaaj Stuti -मूषक महाराज स्तुति

डॉ मुकेश 'असीमित' Sep 7, 2024 व्यंग रचनाएं 0

आज गणेश चतुर्थी के अवसर पर विध्नहर्ता गणेश जी की स्तुति तो सभी करते ही हैं,उनके वाहन मूषकराज की भी स्तुति अत्यावश्यक है ! एक स्तुति गान मैंने वक्रतुण्डाय गणाधिपति से खैरात में मिली बुद्धी से सृजित की है,अगर पसंद आये तो कृपया अपने लायक ,कमेंट ,शेयर के मोदक मुझ खाकसार को प्रदान करें ! […]

“मजे की राजनीति: भारतीय जीवन का मस्ती भरा दर्शन”

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 14, 2024 व्यंग रचनाएं 2

भारतीय आम आदमी की ज़िंदगी में काम नहीं, मज़ा ज़रूरी है। वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स उसे नहीं समझ पाया — लेकिन वो तो मस्ती के लिए जीता है! नेताओं के भाषण हों या सरकारी घोषणाएं, सब कुछ ‘मजा आया की नहीं?’ से तय होता है। यही तो असली लोकतंत्र है – मजेदार लोकतंत्र!

“कोचिंग की कक्षाओं में क़ैद कच्चे ख्वाब: आधुनिक शिक्षा का अक्स”

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 13, 2024 हिंदी लेख 4

आजकल सोशल मीडिया पर रिजल्टों की मार्कशीटों की बरसात हो रही है, हर बच्चे के नब्बे प्रतिशत से कम अंक नहीं दिख रहे । माना कि आजकल शिक्षा नीति में परिवर्तन हुआ है, और अब बच्चों को उदारता से मार्क्स दिए जाते हैं,किसी को फ़ैल नहीं किया जाता है लेकिन हमारे जमाने की तरह तो […]

मकान मालिक की व्यथा –व्यंग रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 12, 2024 व्यंग रचनाएं 7

किराए के लिए उन्हें फोन करता हूँ तो पता लगता है, वो बहुत दुखी हो गए हैं, उनकी सात पुश्तों में भी कभी किसी ने ऐसे टटभुजिये मकान में शरण नहीं ली , मकान उनकी नजर में पनौती है ,कह रहे थे इस माकन में घुसते ही उनकी बेटी बीमार हो गयी ,डेड लाख रु […]

**पड़ोसियों को प्यार करो – व्यंग्य रचना**

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 9, 2024 व्यंग रचनाएं 0

बचपन से ही हिंदी और अंग्रेजी की लोकोक्तियाँ और मुहावरों को रटते आए हैं, लेकिन कभी उनके गूढ़ार्थ पर दिमाग नहीं लगाया। वैसे भी, तब दिमाग था भी नहीं लगाने को। एक इंग्लिश का इडीयाज्म याद आता है, “लव दाई नेबर ” यानी “अपने पड़ोसी को प्यार करो”। कहते हैं न, आप दोस्त बदल सकते […]

दवा प्रतिनिधि से मुलाकात –

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 7, 2024 व्यंग रचनाएं 0

चैम्बर में अपनी एकमात्र कुर्सी पर धंसा ही था कि एक धीमी आवाज आई, “में आई कम इन सर ?” नजरें उठाकर देखा तो आगन्तुक मेरे सर के ऊपर खड़ा मुझसे अंदर आने की अनुमति मांग रहा था। शक्ल से दीन-दुखी सा, घबराया हुआ, जर्द चेहरा, आंखों में उदासी और शरीर थोड़ा सा कांप रहा […]

मेरा लोकतंत्र महान -व्यंग रचना

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 6, 2024 व्यंग रचनाएं 0

हे प्रजातंत्र के प्रहरीगण, लोक तंत्र के इस विशाल नाटक का पटाक्षेप हो गया है. नाटक जहाँ झूठे वायदों की दुंदभी के आगे सच्चे संकल्प और भाव की तूती की आवाज दब के रह गयी थी.ये लोकतंत्र का आइना है, आपको चेहरा वो ही दिखाया जाता है जो आप देखना पसंद करते हैं. जाहिर है […]

*नेताजी का पर्यावरण दिवस आयोजन *

डॉ मुकेश 'असीमित' Jun 4, 2024 व्यंग रचनाएं 0

नेताजी पिछले पांच साल में जब से विधायक की कुर्सी हथियाई है, तब से प्रकृति प्रेम दिखाने के जो भी तरीके हो सकते हैं वो सभी अपनाए हैं। बंजर पड़ी चरवाहे की भूमियों को अपने अधिग्रहण करके उनमे एक आलिशान  फार्म हाउस बनवाया है . उसमें  पाताल तोड़ सबमर्सिबल लगाकर उसके मीठे पानी से   विदेशी […]