राजनीति में ‘काम कर दिया’ की संस्कृति : विरोध, तमाशा और लोकतंत्र की गिरती मर्यादा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 11, 2026 समसामयिकी 0

एआई समिट के बाद राहुल गांधी के बयान से उठे विवाद ने केवल एक राजनीतिक बहस को नहीं जन्म दिया, बल्कि यह भी उजागर किया कि भारतीय राजनीति में विरोध और व्यवधान के बीच की रेखा कितनी धुंधली होती जा रही है। क्या लोकतंत्र में असहमति अब प्रदर्शन और सुर्खियों का खेल बनती जा रही है?

साहित्य: जीवन, संस्कृति और समाज का रचनात्मक दर्पण

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 10, 2026 शोध लेख 1

साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं बल्कि मनुष्य के अनुभवों, संवेदनाओं और समाज की चेतना का जीवित दस्तावेज़ है। यह लेख साहित्य की अवधारणा, कला-संस्कृति और समाज से उसके संबंध तथा हिंदी साहित्य के प्रमुख वादों—छायावाद, प्रगतिवाद, प्रयोगवाद और नई कविता—को रोचक और प्रवाहपूर्ण ढंग से समझाता है।

अयोध्या 2047 — विकसित भारत का सांस्कृतिक प्रतीक

Dr Shailesh Shukla Mar 9, 2026 Blogs 0

अयोध्या 2047 — विकसित भारत का सांस्कृतिक प्रतीक22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। उस दिन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं हुआ था, बल्कि एक राष्ट्र ने अपनी सांस्कृतिक चेतना को पुनः जागृत किया। इस ऐतिहासिक क्षण के बाद मंदिर के द्वार जनता के लिए 23 जनवरी 2024 को खुले और […]

रक्तरंजित रणांगन का रुदन:ईरान पर उन्मादपूर्णआक्रमण के नौ दिन

Dr Shailesh Shukla Mar 8, 2026 समसामयिकी 0

मध्य पूर्व में छिड़ा ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष केवल एक सैन्य टकराव नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, कूटनीति और मानवीय संकट को गहराई से प्रभावित करने वाला भू-राजनीतिक तूफान बन चुका है।

काहे का महिला दिवस…?

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 8, 2026 Important days 0

महिला दिवस पर मंचों, भाषणों और सोशल मीडिया के शोर के बीच एक सवाल बार-बार उठता है—क्या सचमुच महिलाओं के जीवन में कुछ बदलता है? यह व्यंग्य रचना उसी विडंबना को उजागर करती है, जहाँ सम्मान के समारोह तो बहुत हैं, पर असली महिला आज भी श्रम, जिम्मेदारियों और असमानताओं के चक्र में उलझी हुई है।

ढलती उमर पर चढ़ता होली का रंग !

Prem Chand Dwitiya Mar 8, 2026 व्यंग रचनाएं 1

कस्बे के अज्ञान चबूतरे पर जमा हुई यह होली की टोली केवल रंग-गुलाल का उत्सव नहीं, बल्कि ढलती उम्र के अकेलेपन, अनुभव और हास्य का संगम है। सेवानिवृत्त अधिकारी, प्रोफेसर, पंडित और पुराने मित्र — सब मिलकर होली के बहाने जीवन की त्रासदियों को ठिठोली में बदल देते हैं।

फ़िल्म “Accused”: आरोपों, महत्वाकांक्षा और अधूरी कहानी का सिनेमाई मुक़दमा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 7, 2026 Cinema Review 0

नेटफ्लिक्स की फिल्म Accused एक सफल सर्जन डॉ. गीतिका की कहानी है, जिसका जीवन तब उलट जाता है जब उस पर कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगते हैं। विषय गंभीर और समकालीन है, लेकिन कमजोर लेखन और अधूरे किरदारों के कारण फिल्म अपनी संभावनाओं को पूरी तरह साकार नहीं कर पाती।

डॉ. शैलेश शुक्ला की 5 लघुकथाएँ

Dr Shailesh Shukla Mar 7, 2026 लघु कथा 1

डॉ. शैलेश शुक्ला की ये पाँच लघुकथाएँ — वारिस, नमक का हक़, कागज़ की ढाल, जाति की छतरी और मुफ़्त का नशा — हमारे समाज की गहरी विडंबनाओं को उजागर करती हैं। लालच, विश्वासघात, व्यवस्था की असमानता, जातिगत राजनीति और मुफ़्तखोरी की मानसिकता पर ये कथाएँ संक्षिप्त होते हुए भी तीखा सामाजिक प्रश्न खड़ा करती हैं।

भ्रष्टाचार सर्वोत्तम व्यवहारअस्ति

Dr Shailesh Shukla Mar 7, 2026 व्यंग रचनाएं 1

सरकारी व्यवस्था की सुस्त गति में यदि कोई शक्ति अचानक फाइलों को पंख लगाकर उड़ाती दिखाई देती है, तो वह है भ्रष्टाचार। यह व्यंग्य लेख बताता है कि कैसे रिश्वत की अनौपचारिक व्यवस्था आम नागरिक, अधिकारी और ठेकेदार—सभी के लिए “सुविधाजनक तंत्र” बन चुकी है।

मिलती पेंशन तो काहे का टेंशन,नो मेंशन?

Dinesh Gangarde Mar 7, 2026 व्यंग रचनाएं 2

जब नौकरी विदा लेती है तो जीवन में एक नई नायिका प्रवेश करती है—पेंशन। यह ऐसी प्रेमिका है जो हर महीने समय पर आती है, मूड नहीं बदलती और बुढ़ापे में आत्मसम्मान और सुकून का सहारा बन जाती है। हास्य-व्यंग्य के अंदाज़ में पेंशन की इसी “वफादार महबूबा” पर यह रोचक लेख।