सड़कों से गायब हुए फुटपाथ : अतिक्रमण पर आँख बंद करके बैठा प्रशासन

Dr Shailesh Shukla Mar 29, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

भारत के शहरों में फुटपाथों का गायब होना सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि शहरी नियोजन की विफलता और सामाजिक असमानता का प्रतीक बन चुका है।

राम तत्व: सत्ता से संवेदना तक – एक आंतरिक यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 27, 2026 Culture 0

क्या राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र हैं या हमारे भीतर की एक चेतना? यह लेख राम को देह से तत्व तक समझने की एक गहन यात्रा है, जो बताता है कि राम किसी धर्म तक सीमित नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च संवेदनशील अवस्था हैं।

कृत्रिम मेधा और पारिवारिक जीवन : बच्चों के विकास पर प्रभाव

Dr Shailesh Shukla Mar 26, 2026 Culture 0

आज का बच्चा कहानियों से नहीं, एल्गोरिद्म से सीख रहा है। क्या हम सुविधा के नाम पर उसके भावनात्मक विकास से समझौता कर रहे हैं?

“नक्षत्र और राशि: आकाश को देखने की दो खिड़कियाँ”

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 23, 2026 India Story \बात अपने देश की 1

नक्षत्र और राशि एक ही चीज़ नहीं—वे आकाश को देखने की दो अलग खिड़कियाँ हैं। नक्षत्र चंद्र की गति से बने हैं, राशि सूर्य के चक्र से। पंचांग पहले गति को समझता है, फिर इकाई बनाता है—यही उसका विज्ञान है। जब हम समझते हैं कि समय के दो मान साथ चल रहे हैं, तब त्योहारों की बदलती तारीख़ें समझ में आने लगती हैं।

गणगौर  : स्मृतियों के आँगन में सजी एक जीवित परंपरा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 21, 2026 Culture 0

गणगौर केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि स्त्री-जीवन की भावनाओं, आशाओं और सौंदर्य का उत्सव है। गाँव की उन गलियों में, जहाँ गीतों के साथ रिश्ते भी गूंजते थे, यह पर्व सचमुच “जीया” जाता था—न कि केवल निभाया जाता था।

पोथी नहीं, सूत्र: पंचांग का जीवित विज्ञान

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

पंडित पोथी नहीं खोलता, वह सूत्र खोलता है—और गणना करता है। पंचांग कोई स्थिर किताब नहीं, हर साल दोहराई जाने वाली एक जीवित गणितीय प्रक्रिया है। ग्रहण भविष्यवाणी नहीं, सूर्य और चंद्र की गति का सटीक परिणाम है। पंचांग इसलिए जीवित है क्योंकि उसने बदलाव को परंपरा का विरोध नहीं, उसका विस्तार माना।

समय: सुविधा नहीं, समझ की यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

समस्या सुविधा में नहीं, उसे ही ज्ञान मान लेने में है। ग्रेगोरियन कैलेंडर समय बताता है, पंचांग समय को समझाता है। समय रेखा नहीं, एक चक्र है—लौटता हुआ, बदलता हुआ। जब हम समय को केवल मापते नहीं, महसूस भी करते हैं—तभी समझ पूरी होती है।

दुर्गा सप्तशती: भीतर के असुरों से युद्ध और देवी का जागरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 Book Review 0

हम दुर्गा सप्तशती को अक्सर केवल पूजा का ग्रंथ मानते हैं, लेकिन यह हमारे भीतर चल रहे संघर्षों की कथा है। मधु-कैटभ से लेकर रक्तबीज तक—हर असुर हमारे मन के किसी विकार का प्रतीक है, और देवी वह चेतना है जो हमें इनसे मुक्त करती है।

समय का धर्म: BC, AD और Year Zero की उलझी हुई कहानी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 19, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

हम जिस कैलेंडर को पूरी तरह वैज्ञानिक मानते हैं, उसके भीतर धर्म, इतिहास और सत्ता की परतें छिपी हैं। BC, AD और Year Zero की उलझन यह बताती है कि समय केवल गिनती नहीं, एक मानसिक फ्रेमवर्क भी है।

तारीख़ों का सच: ग्रेगोरियन कैलेंडर—विज्ञान, सत्ता और संयोग की कहानी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 19, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

हम रोज़ जिस कैलेंडर पर भरोसा करते हैं, वह केवल समय गिनने का साधन नहीं, बल्कि इतिहास, सत्ता और मानवीय समझौतों का जीवित दस्तावेज़ है। ग्रेगोरियन कैलेंडर उतना सीधा और वैज्ञानिक नहीं जितना हम मानते हैं—उसके भीतर कई परतें हैं, जिन्हें समझना ज़रूरी है।