चौबे जी हो गये डब्बे जी-आरोप, गाली और गले मिलन की व्यंग्य गाथा

चौबे जी हो गये डब्बे जी

बड़ी पंचायत में आज बहस थी। रांगूजी ने पंचायताध्यक्ष से कह दिया कि तुम हमारे को बोलने नहीं देते हो , बात-बात पर टोकते हो,रोकते हो, तुम्हारे ये साथी मेरा मज़ाक उड़ाते हैं कोई हमें पप्पू कहता है तो कोई अनाड़ी। तो कोई डफ्फू कहते हैं तो कोई गप्पू । सो आपकी और हमारी कुट्टा। आप हमारे लिए अविश्वासी हो गये हो।

यह सुनते ही पंचायताध्यक्षजी कुर्सी पर बैठें पहले तो रूआसें हुए, फिर खड़े हो, बोल पड़े कि जब-तक मैं रांगूजी के लगाये आरोपों से मुक्त नहीं हो जाता इस पंचायत की ऊंची कुर्सी पर बैठना मेरे लिए हराम है और तुरंत कुर्सी छोड़ मंच से उतर गये। कुछ ने ना ना तो कुछ ने हूं- हूं, हां-हां के नारे लगा दिए।

कुर्सी खाली रखना अर्थात भूतों का वास हो जाया करता है सो पंचों ने तुरन्त एक वरिष्ठ पंच को बिठा दिया। इस तरह पंचायत भवन तो भूतों से बच गया पर विरोधियों को चिल्लाने का भूत लग गया। डाक्टरों का कहना था कि विरोधियों के दिमाग में जब भी गैस चढ़ जाती हैं, वह बिना हो हल्ले, गाली-गलौज के निकलने वाली नहीं है।

इधर अन्य विरोधी पक्ष वाले जो थोड़े समझदार थे ,आपसी चर्चा करने लगे।
अखूजी ने समझदारी भरें शब्दों में कहा – देखो,मेरी सलाह है कि हमें जरा शालीनता का व्यवहार करते हुए आरोप लगाने चाहिए, दूध के धोये हम भी नहीं है, कहीं छेड़ दिया तो वो भारी पड़ेंगे। हमारा राज काज लंबे समय तक रहा है सो घोटाले भी ज्यादा है। उनको जुम्मे जुम्मे थोड़ा टाइम मिला है। सारे बोलते बड़े धाकड़ है। उनके देशी सेवकी संघ में यही पढ़ाया, समझाया जाता है। मारवाड़ी में कहते हैं ठाढा डाम दियो जी। उसी से पार पड़ेंगे। नहीं तो कुत्ती भी खीर नहीं खायेंगी। ध्यान रखना। फिर मुंह ढीला कर फिरोगे।

इधर मुख्य विपक्षी दल में कुछ ऐसे लोग थे जो अपनी पार्टी की फजीहत कराने में विश्वास रखते थे। वे चाहते थे के पंचायत में अपनी पार्टी के लीडर रांगूजी की अच्छी बखिया उधेड़ हो ताकि भविष्य में वो धरती पर चले। पार्टी को पाताल लेजाने का गुरुतर काम इन्हीं का है। झटके लगने से ही सुधार संभव है।

बैठक में शामिल पंचों ने तय किया पंचायताध्यक्ष वाली पार्टी के कुछ पक्षीय बोलेंगे तो शेष विपक्षीय। अपनी अपनी बात रखें। निश्चित समयावधि में अपनी बात रखें।
बड़ा पंचायत भवन ठसाठस भर गया। कई वीडियो वाले भी आ गये। चोरी छिपे बटन कैमरा भी लग गये।

गांव के कुछ बड़े बूढ़ों ने धीमी आवाज में कहा भी – “तुम सब हमाम में सब नंगें हो, तुम्हारी उन बेशर्मी वाली कथाओं, घटनाओं को इस बहस के माध्यम से क्यों उजागर करने का बहाना बना रहें हों। चुपचाप में गनीमत है।”
आज कोई किसी की सुन नहीं रहा था,सब बोलने की आजादी में मशगूल थे।

रांगूजी पर राहु- केतु की दशा चल रही थी सो सलाहकारों की सलाह भी उन्हें खारी लग रही थी। इधर होनी को एक की फजीहत तो एक की प्रशंसा मंजूर थी।
ऊंची कुर्सी पर बैठे वरिष्ठ जी ने डंडा बजाकर कहा – आपका समय शुरू होता है अब – !
तुरंत भाषणों का दौर शुरू होगया। प्रारंभ ठीक हुआ। बिना हो-हल्ले के वक्ता पंच अपनी अपनी बात कह रहे थे कि रांगूजी ने आंखों का मिचमिचाना कर दिया तो मंच पर मौजूद वरिष्ठ ने टोक दिया। विपक्षियों में आग लगाने केलिए इतना काफी था। दोनों ओर से टेबलों की भचाभच के साथ सीटियां बज उठी।

विपक्ष पार्टी वक्ता – चुप रहो, हमारे लीडर को बोलने दो।
पक्ष पार्टी वक्ता – बोलेगा क्या,आता तो कुछ है नहीं। आंखें मारता है।
विपक्ष पार्टी वक्ता – जैसा भी है हमारा है हम चाहे उसको लीडर बनायेंगे, भले वो घोड़ा निकले या गधा।
पक्ष पार्टी वक्ता – इनके आगे आलू रख दो पीछे से सोना निकालो। खटाखट, यही है वो।
विपक्ष पार्टी वक्ता – खानदानी है, चार पीढ़ियों से नेतागिरी कर रहे हैं। आजादी की जंग लड़ी थी।
पक्ष पार्टी वक्ता – अंग्रेजों के पिट्ठू थे। पार्टी भी अंग्रेजों की, अरे! स्सालो अब तो कांगी नाम बदल लो। देसी नाम से वोट मिलते हैं।
इतने में पक्ष पार्टी वाले ने हवा में कुछ कागज़ लहरा दिये और कहने लगे- देखो ये फोटो देखो, रांगूजी की बड़ी नानी मरने के बाद इसके बड़े नाना विदेशी महिलाओं के साथ डांस करते थे। ऐसे पर विश्वास कैसे किया जा सकता है? अपना नहीं वो किसी का नहीं।
विपक्षी पार्टी वक्ता- अंग्रेजों से जब लड़ना था तब तो लड़ें नहीं अब हमें आपस में लड़वाते हो।
हम सब एक हैं। तुम ! गंवार कहीं के।
पक्ष पार्टी वक्ता – तुम चोर हो।
विपक्षी पार्टी वक्ता- तुम डाकू हो।
पक्ष पार्टी वक्ता -तुम देशद्रोही हो।
विपक्षी पार्टी वक्ता- देश को बेच रहे हों ।
पक्ष पार्टी वक्ता – तुम हरामी हो, गुंडे हो।
विपक्ष पार्टी वक्ता- (भद्दे इशारे के साथ) तुम हो ऐसे और तुम्हारे बाप भी ऐसे।
बाप शब्द सुनते ही पक्ष पार्टी वालों ने रांगूजी की मां बहन से लेकर सातों पीढ़ियों का हिसाब गिना डाला। अब तो बीच बचाव वाले भी ताने मारने में शामिल हो गये।
पंचायत का वायस रिकार्डर खराब था पर पत्रकारों से लेकर वहां बैठीं जेनजी ने रिकार्ड कर सब समझ लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड भी कर दिया। पक्ष पार्टी वालों को अगले इलेक्शन के लिए अच्छा खासा मैटर मिल गया।

हंगामें को देख वरिष्ठ जी डंडा बजाते रहे पर उनकी कोई नहीं सुन रहा था।
आखिर अखूजी समेत सभी विपक्षियों ने मुंह बिगाड़ते व्यंग्य पूर्वक रांगूजी से कहा – “अब आपकी- हमारी फजीहत में कोई कमी रही हो तो अभी कह दीजिए- आग में घी और भी डाल सकते हैं।”
यह सुनते ही मुंह ढीला किये रांगूजी ने अपने आसन्न से खड़े हो वरिष्ठजी से प्रार्थना की- सर, मेरी माथे की खाज का इलाज हो चुका है। इसके साथ ही मुझे काफी ज्ञान भी मिल चुका ह। अब पक्ष पार्टी वालों से गुजारिश है कि अपने तर्कश में कुछ तीर भविष्य केलिए बचा के रखें। फिर कभी भी जरुरत हो सकती है।

इसके साथ सभी को धन्यवाद देता हूं कि आपने हमारे खानदान के बारे में सारी झूठी सच्ची जानकारियां मेरे सम्मुख रखी जो मुझे भी ज्ञात नहीं थी और ऐसी सिक्रेट जानकारियां मुझे आपके सिवाय कोई बताने वाले भी नहीं है।
इसके साथ ही मैं पंचायताध्यक्ष को गले
लगाने के बाद उन्हें उनकी ऊंची कुर्सी पर बिठाना चाहता हूं। आप अनुमति प्रदान करें।
संपूर्ण सदन हर्ष ध्वनि के साथ अनुमति दे उससे पहले ही रांगूजी कूद कर पंचायताध्यक्ष जी से गले मिले और उनका हाथ पकड़ उन्हें कुर्सी तक ले गये।

इस तरह रांगूजी ने अपने खानदानी सम्मान को तिलांजलि दे कर लोकतंत्र में बोलने की आजादी को बरकरार रखा। यही सच्चा प्रजातंत्र है। लोग बरसों तक उनके त्याग को याद रखेंगे।

Ram Kumar Joshi

Ram Kumar Joshi

डा राम कुमार जोशी ललित कुंज, जोशी प्रोल सरदार पटेल…

डा राम कुमार जोशी ललित कुंज, जोशी प्रोल सरदार पटेल मार्ग, बाड़मेर (राज) [email protected]

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डॉ मुकेश 'असीमित'

30 minutes ago

लोकतंत्र, राजनीतिक बहस, आरोप-प्रत्यारोप और पंचायत की अराजकता पर आधारित डॉ. राम कुमार जोशी का तीखा एवं हास्यपूर्ण हिंदी व्यंग्य।