डाॅक्टर, नर्स, सफाईकर्मी, पुलिस
या चाहे हो वो पत्रकार
विपत्ति की विकट घड़ी में
लगते स्वयं ईश्वर का अवतार
स्वहित त्याग कर लोकहित के लिए
जिन्होंने त्यागा अपना घर-बार
उन्हीं में ढूंढो उसको, जिसके लिए
तुम जाते मन्दिर मस्जिद या गुरुद्वार
शत शत नमन भी कम पड़ते हैं
ये मानवता के सच्चे कर्णधार
न फेंको पत्थर, न रोको राहें
कुछ तो सोचों, कुछ तो करो विचार
कोरोना सहस्त्र फन फैलाए खडा है
बन्द करो उसके मुंह पर, अपने द्वार
घर पर रहो , हाथों को धोओ, मर्यादित रहो
पूर्वजों ने हमारे, हममें डालें
जीओ और जीने दो के संस्कार
– सुनीता मृदुल
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Comments ( 5)
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"व्रद्ध जनो का " हिंदी कविता - Baat Apne Desh Ki
6 years ago[…] के सच्चे कर्णधार मानवता के सच्चे कर्णधार Tagged hindi poems, mahadev […]
Sunita Sharma
6 years agoThank you
- Baat Apne Desh Ki
6 years ago[…] मानवता के सच्चे कर्णधार Tagged hindi poems […]
Dr. Garima Jain
6 years agoThankyou for respecting corona warriors . Very well composed
Dr Mukesh
6 years agoपोस्ट के।लिए धन्यवाद