“नित सुवह से शाम” हिंदी कविता

“नित सुवह से शाम”
कुण्डली 8चरण

नित सुवह से श्याम तक,उछल कूद हुडदंग,
योवन तक धूमिल हुए,बचपन के सव रंग,

बचपन के रंग भूल,राह कुछ ऐसी पकड़ी,
तीन चीज रहि याद,नमक तेलहि अरु लकडी,

गिल्ली डंडा और,कबड्डी दौड रेल में,
चोर सिपाही खो कि,सु मस्ती बनी खेल में,

“प्रेमी”योवन साथ,हुए सव पारिवारिक काम,
धूमिल हुआ बचपन,खेला नित सुवह से शाम।

रचियता-महादेव प्रेमी

Mahadev Prashad Premi

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी…

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी गर्ग होस्पीटल गंगापुर सिटी ,स0 मा0 (राज0)322201 मोबाईल 9667627720 संप्रति:चिकित्सा कर्मी कार्य क्षेत्र:चिकित्सा कार्य लेखन विधा-गजल,गीत,कविता और पहेली लेखन आदि प्रकाशन:(1)”बूझोबल” पहेली संग्रह प्राप्त सम्मान:कई सामाजिक व साहित्यिक सम्मान प्राप्त लेखनी उद्देश:सामाजिक विसंगतियों पर लिखना प्रेरणा पुञ्ज:स्वयम एवम अन्य लेखक रुचियां: साहित्य लेखन/अध्यापन

Comments ( 0)

Join the conversation and share your thoughts

No comments yet

Be the first to share your thoughts!