डॉ मुकेश 'असीमित'
May 23, 2020
Poems
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पंडित की कुल्फी , लाला की पताशी , मुरली का पान , जयपुर वालो के दिल मे ऐसे कई नाम !संपत की कचोरी , सम्राट का समोसा , मानसरोवर से आते लोग, खाने स्वामी का डोसा !ब्रजवासी की पताशी से बनती कंवर नगर कि शाम , अनु पान वाले का चॉकलेट वाला पान !भगत जी […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 23, 2020
India Story
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कोरोना काल में बहुत कुछ बदल सकता है पर पति पत्नी के बीच सनातन काल से चली आ रही नोक झोंक की परम्परा सैदेव बनी रहेगी हा बस कुछ इस्तेमाल किये हुए शब्दों में फेरबदल हो सकता है. मसलन अब कुछ कोरोना काल के दौरान जुबान पर चढ़े शब्द कैसे काम आते है वो इस पोस्ट से देखा जा सकता है
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 23, 2020
Blogs
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in the last several decades everything in the world has changed, the methods of fighting the war have changed, the way of working has changed, the way of travel has changed but the way of campaigning among the people has not changed. But now for the first time in history, this method of mass democracy […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 23, 2020
Blogs
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अब कुछ व्यावहारिक और ईमानदार बाते इस कोरोना काल के लिए,जो आपको इस कोरोना वायरस के साथ जीना सिखाएंगी. आइये घबराए नहीं,इस के साथ जीना सीखे जब तक की कोई कारगर उपाय इस संक्रमण को खत्म करने का नहीं आ जाता. शायद अभी साल भी लग सकता है ऐसे में हमे कैसे अपने आपको इन […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 22, 2020
Lifestyle
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read this special blog on wonderful tea is for tea lovers like me. You can click this post with a picture. The post that will fill your morning with fresh tea. This post is especially for all you lovers who do their morning good morning tea and wonderful status.
Dr Shree Gopal Kabra
May 22, 2020
Blogs
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जैविक संसार, जीव जगत।प्राणियों में श्रेष्ठ मानव। उसकी श्रेष्ठता का आधार उसकीसोच, विचार, चिंतन, कल्पना और परिकल्पना की शक्ति। अपनीपरिकल्पना को परखनेकी जिजीविषा। इसके लिए तकनीक विकसित करना। हमारे पुरखों को भान था कि अदृष्य जीवोंका संसार है। करोडों योनियों की परिकल्पना। उस परिकल्पना को परखने की उन्नत तकनीक विकसित की गई। यह केवल मनुष्य […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 22, 2020
Poems
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“बचपन” (कुण्डली8चरण) बचपन आप सम्हालिए ,देकर प्रेम दुलार,नीति नियम संस्कार दे,बन के दक्ष कुम्हार, बन के दक्ष कुम्हार,जैसे मिट्टी को ढाले,घुमा चाक पर कूट,पीट अग्नि में डाले, ऐसे हर परिवार,बाल बच्चों को पालो,दे संस्कार उदार,नेक जीवन में ढालों, “प्रेमी”इतना करो,लगे उनको अपनापन,मात पिता गुरु शिक्षा,दें तब सुधरे बचपन। रचियता -महादेव प्रेमी
Mahadev Prashad Premi
May 21, 2020
Poems
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“जग में भारी ” आज के युग में मोबाइल की महत्ता को दर्शाती कविता है. कैसे मोबाइल आज एक आवश्यक निजी साथी बन गया है. कविता कुंदिली विधा में रची गयी है जिसके ८ चरण है “जग में भारी” (कुण्डली 8चरण) जग में भारी हो रहा,मोबाइल का भूत,झगड़ा दंगे हो ज़हां,पक्का लेय सबूत, पक्का लेय […]
Mahadev Prashad Premi
May 21, 2020
Poems
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आज के युग में वृद्ध जानो की व्यथा को बाया करती मेरी यह कविता “वर्द्ध जनों का ” आपको बहुत पसंद आएगी. कविता कुंडली विधा में रचित है जिसमे ८ चरण है. “वृद्ध जनों का”वृद्ध जनों का इस समय,नहीं है चोखो हाल?युवा वाल की इस समय ,बदल रही है चाल , बदल रही है चाल,भुले […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 21, 2020
Lifestyle
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Tips for safety measures while working in OfficeTill now, some companies had allowed their workers to work from home in the situation of Lockdown. Now in many cities which are in Orange and Green Zone, Ofiicesr has opened and employees are being called to the office. In such a situation, you have to take care […]