चार्जर खोजता भविष्य और ज्ञान बाँटता अतीत

डॉ मुकेश 'असीमित' Feb 4, 2026 व्यंग रचनाएं 1

डायल-अप की खटखट से लेकर 5G की बेचैनी तक—यह व्यंग्यात्मक लेख पीढ़ियों की उस यात्रा को पकड़ता है जहाँ रिश्ते तारों से जुड़े थे, सपने EMI पर चले और अब अस्तित्व चार्जिंग पॉइंट ढूँढ रहा है। Gen X की स्मृतियाँ, Gen Y की व्यावहारिकता, Gen Z की रील-हक़ीक़त और Gen Alpha की स्क्रीन-सभ्यता—सब एक कमरे में, एक ही नेटवर्क पर।

टंकी का बयान : एक गिरावट की आत्मकथा

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 21, 2026 व्यंग रचनाएं 0

यह टंकी सिर्फ़ कंक्रीट का ढाँचा नहीं थी, यह व्यवस्था का आईना थी। उद्घाटन से पहले गिरकर इसने बता दिया कि जब नीयत खोखली हो, तो सबसे मज़बूत ढांचा भी बैठ जाता है।

कागजों में मरण-

Ram Kumar Joshi Jan 9, 2026 व्यंग रचनाएं 1

मेरा बाप घर में मर गया, पर बाबूजी की फ़ाइल में अभी ज़िंदा है। बिन पैसे के यहाँ कोई मरता नहीं— यहाँ मौत भी सरकारी प्रक्रिया है।

नया साल : तारीख नहीं, दृष्टि का उत्सव

डॉ मुकेश 'असीमित' Jan 1, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

नया साल कोई तारीख नहीं, भीतर की एक हल्की-सी हलचल है। उत्सव का सवाल नहीं, चेतना का सवाल है। जो छूट गया, वही नया है; जो थाम लिया, वही बोझ। कैलेंडर बदलते रहते हैं, साल तभी बदलता है जब दृष्टि बदलती है।

चौराहे पर बैठा राजा

Pradeep Audichya Dec 16, 2025 व्यंग रचनाएं 0

चौराहे पर बैठा वह कोई साधारण जानवर नहीं था—वह डर, लापरवाही और व्यवस्था की मिली-जुली पैदाइश था। उसकी गुर्राहट में कानून की चुप्पी और उसके सींगों में सत्ता की स्वीकृति चमक रही थी।

वाह रे ज़माना — डिज़ाइनर बेबी का

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 16, 2025 व्यंग रचनाएं 0

अब बच्चा भगवान की देन नहीं, माता-पिता की पसंद बनता जा रहा है। आँखों का रंग, करियर, आईक्यू—सब कुछ पैकेज में मिलेगा। पर सवाल यह है कि डिज़ाइन में मासूमियत का कॉलम क्यों छूट गया?

बधाई हो, शर्मा जी अंकल बन गए!

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 8, 2025 व्यंग रचनाएं 0

"जितना सफेद बाल छुपाते हैं, वो उतनी ही तेजी से अपनी असलियत दिखाता है—जैसे व्यवस्था की कालिख सफ़ेदपोशों पर।" Excerpt 2:

नेता जी का इंटरव्यू – हम झूटन के बाप

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 7, 2025 व्यंग रचनाएं 0

नेता जी का यह इंटरव्यू लोकतंत्र के नाम पर एक शानदार हास्य-नाट्य है। हर सवाल का जवाब वे इतनी आत्मा-तुष्ट गंभीरता से देते हैं कि सच्चाई उनसे सावधान दूरी बनाकर खड़ी रहती है। बेहतरीन व्यंग्य, तीखे संवाद और कैमरे के सामने झूठ की अग्निपरीक्षा—सब कुछ यहाँ मौजूद है।

पानी–पूरी दर्शन : भारतीय ज्ञान–परंपरा का सबसे कुरकुरा, चटपटा और लोकतांत्रिक उपनिषद

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 4, 2025 हास्य रचनाएं 0

“गोलगप्पा केवल चाट नहीं—भारत का चलित विश्वविद्यालय है, जहाँ मीठा, खट्टा और तीखा स्वाद जीवन-दर्शन बनकर उतरता है।” गोलगप्पा–लाइन भारतीय लोकतंत्र की असली प्रयोगशाला है—आईएएस हो या कवि, सबकी कटोरी बराबर काँपती है

समोसे का सार्वभौमिक सत्य

डॉ मुकेश 'असीमित' Nov 29, 2025 व्यंग रचनाएं 0

“समोसा सिर्फ नाश्ता नहीं—भारतीय समाज, राजनीति और प्रेमकथाओं का सबसे स्थायी त्रिकोण है। डॉक्टर से लेकर दफ़्तर और दाम्पत्य तक, हर मोड़ पर यह तला-भुना फल अपना प्रभाव दिखाता है। बर्गर रोए या बाबू सोए—पर समोसा आए तो सब जग जाएं! यही है समोसे का सार्वभौमिक सत्य।”