ओ कान्हा रे: मन को छू लेने वाला नया कृष्ण भजन | Krishna Bhajan
“ओ कान्हा रे” एक soulful Krishna Bhajan है जो राधा-कृष्ण प्रेम, मुरली की मधुरता, भक्ति, समर्पण और श्रीकृष्ण के जीवन-संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है। पूरा गीत सुनें
“ओ कान्हा रे” एक soulful Krishna Bhajan है जो राधा-कृष्ण प्रेम, मुरली की मधुरता, भक्ति, समर्पण और श्रीकृष्ण के जीवन-संदेश को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है। पूरा गीत सुनें
संत कबीर की निर्गुण वाणी से लेकर शिव, कृष्ण, हनुमान, गणेश, लक्ष्मी और दुर्गा स्तुति तक—सुनिए Dr Mukesh Aseemit Creations की दो भावपूर्ण YouTube भजन playlists।
“मैं कौन हूँ?” एक मौलिक निर्गुण सूफ़ियाना भजन है, जो नाम, धर्म, देह और सामाजिक पहचानों से आगे मनुष्य के वास्तविक अस्तित्व की खोज करता है। जानिए गीत का भाव, दर्शन और इसके पीछे छिपा आत्मबोध का संदेश।
माटी का घरौंदा रे… तन भी उधार, साँस भी उधार—फिर किस बात का घमंड? कबीर-भाव से प्रेरित यह मौलिक निर्गुण भजन जीवन की नश्वरता, माया के भ्रम और भीतर के सत्य की ओर लौटने का सुंदर आध्यात्मिक संदेश देता है।
कबीर भजन ‘मेरा–तेरा मनुआ रे’ में अनुभव और किताबी ज्ञान का अंतर जानिए। पढ़ें इसके पदों का भावार्थ और निर्गुण फोक–रॉक संगीत-शैली का परिचय।
कबीर-दर्शन और निर्गुण भक्ति से प्रेरित छह भावपूर्ण गीतों की कहानी, संदेश और अलग-अलग YouTube लिंक पढ़ें तथा अंत में संपूर्ण कबीर भजन जुकबॉक्स सुनें।
यह रचना संत कबीर की किसी मूल वाणी का शब्दशः गायन नहीं, बल्कि कबीर के निर्गुण दर्शन से प्रेरित डॉ. मुकेश असीमित की मौलिक प्रस्तुति है।नाम बिना क्या पाया? — तन माटी रो पुतला एक भावपूर्ण Kabir Nirgun Bhajan है, जो मनुष्य को धन, शरीर और सांसारिक वैभव के अभिमान से ऊपर उठकर सच्चे नाम की ओर देखने का संदेश देता है। यह fast version कबीर-भाव से प्रेरित एक मौलिक निर्गुण रचना है। गीत याद दिलाता है कि राजमहल, सोना-चाँदी, गाजे-बाजे और शरीर का अभिमान—सब यहीं रह जाता है। अंततः मनुष्य के साथ केवल उसके कर्म, भक्ति और सच्चे नाम का सहारा जाता है।
“गुरु मेरे दीपक, गुरु दयाला” गुरु के ज्ञान, करुणा और कृपा को समर्पित मौलिक सूफी-भक्ति गीत है। पढ़िए गीत की रचना-यात्रा और सुनिए इसका संगीतमय वीडियो।
“तन माटी रो पुतला” डॉ. मुकेश असीमित की कबीर भजन श्रृंखला की चौथी रचना है। यह निर्गुण भजन देह-अभिमान, माया, धन और जीवन की क्षणभंगुरता पर कबीर-वाणी जैसे सहज लोक-सत्य को सूफ़ियाना-फोक संगीत शैली में प्रस्तुत करता है।
“दर पे भूखा बैठा रे” कबीर-वाणी से प्रेरित एक भावपूर्ण भजन है, जो दया, सेवा और सच्ची पूजा का संदेश देता है। पढ़िए गीत के सम्पूर्ण बोल और सुनिए Music with Mukesh पर इसकी संगीतमय प्रस्तुति।