डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 21, 2025
व्यंग रचनाएं
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हर कोई अपने पदचिन्ह छोड़ जाना चाहता है, लेकिन अब ये निशान कदमों से नहीं, जूतों से पहचाने जाते हैं। महापुरुषों के घिसे जूतों में वैचारिक उभार चिपका दिए गए हैं, ताकि गहरे पदचिन्ह बन सकें। नेता, जनता, डॉक्टर और यहां तक कि श्रीमती जी तक—सब अपने-अपने क्षेत्र में फुटप्रिंट छोड़ने की होड़ में हैं। पर दिशा रहित कदमों से क्या पदचिन्ह बनेंगे?
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 15, 2025
Book Review
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डॉ. मुकेश असीमित का व्यंग्य संग्रह ‘गिरने में क्या हर्ज़ है’ न केवल भाषा की रवानगी दिखाता है, बल्कि विसंगतियों की गहरी पड़ताल भी करता है। समकालीन व्यंग्य की धारा में यह संग्रह एक उम्मीद की रेखा खींचता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 14, 2025
संस्मरण
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हॉस्टल की 'थ्रिल भरी' दुनिया से निकली एक रोमांचक रेल यात्रा की कहानी, जहाँ एक मेडिकल छात्र पुरानी आदतों के नशे में बिना टिकट कोटा पहुँचने की जुगत भिड़ाता है। कभी पचास के खुले न मिलने की मजबूरी, कभी टीटी से आँख-मिचौली, तो कभी जनरल डिब्बे में ‘इंच भर की सीट’ पर संतुलन साधना — हर दृश्य हास्य से लबरेज़ है। डर की कई 'किश्तों' के बीच चलती ट्रेन में 'किक' का अहसास, और आखिर में स्टेशन पर छलांग मारकर जीत का रोमांच। एक बेधड़क, बेपरवाह, लेकिन दिलचस्प रेल यात्रा — सिर्फ़ व्यंग्य की भाषा में!
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jul 10, 2025
व्यंग रचनाएं
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गुरु अब ज्ञान के प्रतीक नहीं, शॉर्टकट और टिप्स देने वाले बाज़ारू ब्रांड बन चुके हैं। चेला बनना खतरे से खाली नहीं, क्योंकि हर चेला गुरु बनने की फिराक में है। गुरु-शिष्य परंपरा अब कोर्ट-कचहरी, दलाली, और सट्टे की दुनिया में ‘गुरु मंत्र’ से ज़्यादा ‘टिप्स मंत्र’ में बदल चुकी है।
Vivek Ranjan Shreevastav
Jul 5, 2025
व्यंग रचनाएं
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आज की डिजिटल दुनिया में अधजल गगरी का छलकना नए ट्रेंड का प्रतीक बन गया है। सोशल मीडिया पर ज्ञान कम और आत्मविश्वास ज़्यादा दिखाई देता है। व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी, ट्विटर वॉरियर्स और इंस्टाग्राम फिलॉसफर — सभी अधूरे ज्ञान से ज़ोरदार शोर करते हैं, जबकि असल ज्ञानी मौन रहते हैं।
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 11, 2025
Blogs
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एक तीखा हास्य-व्यंग्य जो दिखावे के मदर्स डे और असल माँ के संघर्षों के बीच की खाई को उजागर करता है। सोशल मीडिया की चमक के पीछे वो माँ छुपी है, जो आज भी बिना शिकायत अपने बच्चों की खुशियाँ बुन रही है — रोटी सेंकते हुए, ममता लुटाते हुए। पढ़िए, मुस्कुराइए और सोचिए — क्या एक पोस्ट ही काफी है उस ममता के लिए?