वर्षा कविता(poem on Rain )-रचियता -महादेव गर्ग प्रेमी
वर्षा के दिन आ गये , भरे तलैया ताल खेती की आशा बनी,कृषक हुए खुशहाल न्रत्य करत है मोर पपहिये ने टेर लगाई “प्रेमी” खुश है आज, किसानो का मन हर्षा वन्धी आशा चहु और की आई सुन्दर वर्षा
वर्षा के दिन आ गये , भरे तलैया ताल खेती की आशा बनी,कृषक हुए खुशहाल न्रत्य करत है मोर पपहिये ने टेर लगाई “प्रेमी” खुश है आज, किसानो का मन हर्षा वन्धी आशा चहु और की आई सुन्दर वर्षा
Here is a beautiful poem composed by Dr. Sanjay Jain. This dialogue of your own conscience will really overwhelm you.