चौबे जी हो गये डब्बे जी-आरोप, गाली और गले मिलन की व्यंग्य गाथा

Ram Kumar Joshi Jun 9, 2026 व्यंग रचनाएं 1

लोकतंत्र, राजनीतिक बहस, आरोप-प्रत्यारोप और पंचायत की अराजकता पर आधारित डॉ. राम कुमार जोशी का तीखा एवं हास्यपूर्ण हिंदी व्यंग्य।

टैंकर देखकर प्यास बुझाओ

Pradeep Audichya Jun 7, 2026 व्यंग रचनाएं 0

"टैंकर देखकर प्यास बुझाओ" प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रदीप औदिच्य की एक मार्मिक और तीखी व्यंग्य रचना है, जिसमें ग्रामीण भारत की जल समस्या, सरकारी विभागों की लालफीताशाही, कागजी विकास, हैंडपंपों की दुर्दशा और फोटो-आधारित राजनीति पर करारा कटाक्ष किया गया है।

बात में वज़न होना चाहिए

डॉ मुकेश 'असीमित' May 29, 2026 व्यंग रचनाएं 0

आज के समय में सिर्फ बात करना काफी नहीं है, बात में वज़न भी होना चाहिए। राजनीति से लेकर मीडिया, ज्योतिष, अर्थव्यवस्था और चिकित्सा जगत तक हर जगह "भारी" शब्द का बोलबाला है। डॉ. मुकेश असीमित का यह व्यंग्य उसी मानसिकता पर चुटीला कटाक्ष है, जहाँ हल्की बातों की कोई कीमत नहीं और हर चीज़ को खबर बनने के लिए भारी होना ज़रूरी है।

हालात काबू में हैं

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 8, 2026 लघु कथा 0

चीखें हवा में तैर रही थीं, पर सायरनों की आवाज़ ने उन्हें ढँक लिया—व्यवस्था का संगीत शुरू हो चुका था। लाशें लाइन में सजा दी गईं—मृत्यु के बाद भी अनुशासन लागू था। कैमरे तैयार थे, आँसू भी—बस ‘सीन’ सेट होना बाकी था। और अंत में वही वाक्य—“हालात काबू में हैं।”

पुष्पक विमान से पुष्प वर्षा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 14, 2026 व्यंग रचनाएं 0

शहर की टूटी सड़कों और बजबजाती नालियों के बीच जब नेताजी की छवि भी पैबंददार हो गई, तो समाधान आसमान से उतरा—हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा। फर्क बस इतना पड़ा कि फूल जनता पर कम और नालियों में ज़्यादा गिरे, मगर नेताजी की छवि पर चढ़ा नया प्लास्टर खूब चमक गया।

मोगली आज़म (लघु नाटिका)

Ram Kumar Joshi Dec 13, 2025 हिंदी लेख 2

“मुगल-ए-आज़म के आधुनिकीकरण पर आधारित यह व्यंग्य-नाटिका सोलहवीं सदी के ठाठ-बाट को इक्कीसवीं सदी की भोंडी आधुनिकता से टकराते हुए दिखाती है—जहाँ बादशाह का दरबार दारू, डांस, ड्रामा और डिजिटल विद्रोह में बदल जाता है।”

नेता जी का इंटरव्यू – हम झूटन के बाप

डॉ मुकेश 'असीमित' Dec 7, 2025 व्यंग रचनाएं 0

नेता जी का यह इंटरव्यू लोकतंत्र के नाम पर एक शानदार हास्य-नाट्य है। हर सवाल का जवाब वे इतनी आत्मा-तुष्ट गंभीरता से देते हैं कि सच्चाई उनसे सावधान दूरी बनाकर खड़ी रहती है। बेहतरीन व्यंग्य, तीखे संवाद और कैमरे के सामने झूठ की अग्निपरीक्षा—सब कुछ यहाँ मौजूद है।

जय भारत वंदेमातरम्!वंदेमातरम्!!

Prahalad Shrimali Nov 20, 2025 हिंदी कविता 0

यह कविता भारत-जन के महा स्वरों की गूंज “वंदेमातरम्” से शुरू होकर राष्ट्रहित, देशभक्ति, असल–नकली देशप्रेम, मीडिया की गिरावट, आतंकी तत्वों की धूर्तता और नागरिक कर्तव्यनिष्ठा जैसे मुद्दों पर तेज़ और सीधी चोट करती है। व्यंग्य और राष्ट्रभाव का मेल इसे और प्रभावी बनाता है। यह रचना केवल भावुक नहीं—एक चेतावनी, एक संदेश और एक सख्त सामाजिक निरीक्षण भी है।

मेरा कमरा मेरा सलाहकार

Vivek Ranjan Shreevastav Nov 19, 2025 व्यंग रचनाएं 0

कमरे में घुसते ही लगा जैसे पूरा देश भीतर उतर आया हो। छत ऊँचा सोचने का उपदेश दे रही थी, पंखा शोर मचाते हुए ठंडा दिमाग रखने को कह रहा था, घड़ी और कैलेंडर समय का महत्व जता रहे थे, जबकि हल्का पर्स भविष्य बचाने की सलाह दे रहा था। हर वस्तु अपने दोषों के साथ दर्शन बाँट रही थी—एक सचमुच का व्यंग्यमय गृह-संसद।

वोट का हाट बाजार-हास्य व्यंग्य रचना

Pradeep Audichya Nov 10, 2025 व्यंग रचनाएं 0

भरोसीलाल ने चाय के डिस्पोज़ल कप को देखते हुए कहा — “ये चाय है चुनाव और कप है जनता, चुनाव खत्म तो जनता कचरे में!” चुनाव के मौसम में बिजली ओवरटाइम करती है, सड़कें अचानक स्वस्थ हो जाती हैं, और नेता जनता की “कीमत” लगाते हुए मंडी में उतर आते हैं। वोट की कीमत कभी दस हज़ार, कभी तीस हज़ार, तो कभी एक साड़ी और पेय पदार्थ में तय होती है। भरोसीलाल का निष्कर्ष था — “इससे बढ़िया हाट बाजार तो कोई हो ही नहीं सकता!”