डॉ मुकेश 'असीमित'
May 4, 2026
संस्मरण
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थर्ड एसी की एक साधारण-सी यात्रा कैसे दो बच्चों की वजह से हास्य और अराजकता का महाकाव्य बन जाती है—यह संस्मरण उसी अविस्मरणीय रात की कहानी है, जहाँ नींद शहीद हो जाती है और व्यंग्य जन्म लेता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Mar 28, 2026
व्यंग रचनाएं
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बीमारी से ज्यादा थका देने वाला होता है रिश्तेदारों का हाल-चाल महाकुंभ—जहाँ हर कोई डॉक्टर भी है, जज भी और जांच अधिकारी भी।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Jun 2, 2024
व्यंग रचनाएं
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हे! छाती पर मूंग दलने वाली हिरद्येशा प्राणप्रिये , पड़ोस के शर्मा जी को ही देख लो, कैसे गर्मी और सर्दी की छुट्टियां आते ही उनकी बीवी उन्हें छोड़कर मायके चली जाती है। उनके चेहरे की प्रसन्नता देख कर मुझे कुढ़न होती है। सुबह मेरा मॉर्निंग वॉक जाना दुर्लभ हो गया है। पड़ोसी ताने मारते […]