“कलयुग वुड्ढा” हिंदी कविता

“कलयुग वुड्ढा”
कुण्डली 6चरण

कल युग वुड्ढा अधिकतर,रखता उम्र छिपाय,
असल उम्र हो साठ की चालिस रहा वताय,

चालिस रहा वताय ,बनै तिस मारख दिल में,
कौन माल कब पटै,खोज चूहे के विल में,

“प्रेमी”तज मर्याद,खोदें हैं खुद कु गड्ढा,
लाज शर्म नहिं बची,कि ये है कलयुग बुड्ढा।

रचियता-महादेव “प्रेमी”

fotocons पर पाए ढेरो हस्तनिर्मित पेंटिंग्स

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Mahadev Prashad Premi

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी…

साहित्यिक नाम-महादेव प्रेमी जन्म स्थान-ग्राम परीता स्थाई पता- संजय कालोनी गर्ग होस्पीटल गंगापुर सिटी ,स0 मा0 (राज0)322201 मोबाईल 9667627720 संप्रति:चिकित्सा कर्मी कार्य क्षेत्र:चिकित्सा कार्य लेखन विधा-गजल,गीत,कविता और पहेली लेखन आदि प्रकाशन:(1)”बूझोबल” पहेली संग्रह प्राप्त सम्मान:कई सामाजिक व साहित्यिक सम्मान प्राप्त लेखनी उद्देश:सामाजिक विसंगतियों पर लिखना प्रेरणा पुञ्ज:स्वयम एवम अन्य लेखक रुचियां: साहित्य लेखन/अध्यापन

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