कवि सम्मेलन की रिपोर्ट
डा राम कुमार जोशी
कवियों को बुलाया था
हमने बड़े शान से
मंच भी सजाया था
बड़े इत्मीनान से। (1
लोग उमड़ पड़े
दसियों हजार थे
रोशनी से लटालूब
पाण्डाल तमाम थे। (2
नोटों भरी थैलियां
ले गये वो ठाठ से
चार चुटकले सुना गये
कविताओं के नाम से। (3
राष्ट्र कवियों के खाल में
मसखरें जो आ गये
अश्लील किस्से और लपाडे़
सन्देश जन को दे गये। (4

डा राम कुमार जोशी
बाड़मेर (राज)
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