मूषक राज ,औकात के लिये किसी सेलिब्रिटी को मैनेज करो !
डॉ प्रेमचंद द्वितीय
फर्स्ट एसी में चूहे कॉकरोच का सफर इंदौर – दौंड एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी में चूहे कॉकरोच की शिकायत यात्रियों ने की और 5 माह की बेटी के साथ 16 घंटे का सफर बूरे सपने जैसा रहने का जिक्र किया ।बच्ची की सुरक्षा एसी डक्ट में करने के लिए जागना पड़ा,चूहे बार-बार बाहर आते जाते रहे, कोच में कांकरोच भी थे ,जिसका वीडियो रेलवे प्रशासन को दिखाया गया।
यह खबर पढ़कर पंडित शिवनारायण जी का नाती बोला नाना कॉकरोच चूहे सुर्खियों में है, इन्हें भी विलासिता सुख सुविधा चाहिए। ये साधारण कोच में यात्रा करने से कतराते हैं भीड़भाड़ से भरे जनरल कोच से ये दूर रहते हैं ,इस कारण उन्होंने फर्स्ट एसी को अपना अड्डा बना लिया ।
कॉकरोचो की लोकप्रियता से चूहे कुपित है तथा पीछे रहने से प्रतिस्पर्धा पर उतारु है । कॉकरोचों ने राजनीतिक पार्टी बनवा दी इस पर चूहे क्यों पीछे रहे ,चूहो को यह दर्द है कि वे एरोड्रम, रेलवे ,बस , रेस्तरां, होटल, लाज, भोजनालय , खेत खलिहान ,गोदाम ,घर आंगन नदी नाले आदि स्थानों पर उनका रुतबा होने के बाद भी कोई उनके नाम से पार्टी या सामाजिक संगठन बनाने के लिए आगे नहीं आया और साले कांकरोच जिनकी न कोई आस है , न औकात है उनके नाम से पार्टी बन गई। आंदोलन हो गया ।मंत्री से इस्तीफा करवा दिया ,इन कॉकरोचो से सरकार हिल गई, समझौता वार्ता करना पड़ी ,बड़े-बड़े मंत्री रात दिन इन कॉकरोच के भय से आक्रांत होकर समझौता के कदम बढ़ाने के लिए हलातोल करने लगे ।कॉकरोच पार्टी ने जब जंतर मंतर से अपने तंतर करने वाले ,दीप -के ,माध्यम से रोशनी करने वालों को सेट नहीं किया तब तक सरकार चैन से नहीं बैठी और बेचैन रही।
कॉकरोचो की महिमा का बखान सुनकर सुनील भैया बोले अरे चूहों भले ही तुम रेल , हवाई जहाज में सफर कर लो जब तक तुम्हारे नाम पर कोई सेलिब्रिटी नहीं वोलेगा तुम भले ही इन स्थलों पर जाकर कुतरते रहो तुम्हें कोई घास नहीं डालेगा, इसलिए तुम इन स्थानों को छोड़ो और किसी सेलिब्रिटी के बंगले में अपना बिल बनाओ तो तुम्हारी कदर होगी वरना तुम इन स्थानों पर बिल बनाओगे तो राजनीति के आस्तीन के सांप अपना डेरा जमा लेंगे और तुम्हें बिल में घुसने के काबिल भी नहीं छोडेंगे ।
वे बोले भले ही तुम बड़े-बड़े भवनों से लेकर झोपड़ी तक अपनी जगह बना लेने में कामयाब होते हो, रेलवे स्टेशन हो या हवाई अड्डे अपना अड्डा जमा लेते हो। रेलवे के बिजली तारो को काटकर रेल लेट कर देते हो। इन्हीं तारो को कुतर कर शॉर्ट सर्किट से आग लगवा देते हो। अनाज के भंडारों को चट कर जाते हो ,फसलों को नष्ट कर देते हो। आबादी की पैदाइश में अनेक जानवरों को तुम ने पीछे छोड़ रखा है । चुहिया करीब दो हजार बच्चे एक साल में देने की क्षमता रखती है। तुम्हारे आतंक के आगे अच्छे-अच्छे आतंकवादी कहीं नहीं लगते है दुनिया भर में तुम्हारे आतंक से अनेक देश परेशान है। अनेक समाज के बहुत से लोग। हे मूषक तुम्हें गणेश जी की सवारी मानकर गणेश जी की पूजा के कारण तुम्हें बक्श रहे है ।वरना अभी तक तुम तो गिद्ध की तरह विलुप्त जाति में शामिल हो जाते हैं ।इतनी सारी लोकप्रियता ,विशेषता के बावजूद कॉकरोच जैसे पिद्दी जानवर ने तुम्हें पीछे छोड़ दिया ,उसके नाम पार्टी बन गई और तुम निर्दलिय चुनाव चिन्ह में भी अपनी एंट्री नहीं करा सके । अरे तुम्हारे ऊपर विघ्नहर्ता गणेश जी विराजे थे लेकिन तुम अपने कुतरने के स्वभाव, आतंक और सूंघकर काटने की आदत के कारण लोकप्रिय नहीं हो सके। और लोग तुम्हें पकड़ने के लिए पिंजरे घरों में रखते हैं और तुम गरीबों की दो जून की रोटी की तरह लालच में पिंजरे में, बुक, हो जाते हो। तुम्हारी इन आदतों के कारण कोई भी सेलिब्रिटी तुम्हारा नाम लेने से कतराता हैं । और तुम छोटे-मोटे जलवे दिखाकर आतंक के पर्याय बन गए हो । कॉकरोच जो तुम्हारे पासंग में भी नहीं लगते हैं उनके पास तुम्हारे जैसा नाम और काम भी नहीं है लेकिन एक बड़े सेलिब्रिटी के जबान पर कॉकरोच क्या आया रातों-रात लोकप्रिय हो गये ,हीरो बन गए ।अब वह घर में अलमारी ,छोटी मोटी दीवार, किचन में जब रोज दिखता है तो बच्चे से लेकर बूढ़े तक, गृहिणी से लेकर झाड़ू पोछा करने वाली बाई तक यह कहते हैं कि देखो एक विशाल पार्टी बनाने की ताकत रखने वाला छोटा सा कॉकरोच अस्तित्व में आ गया है । इसकी लोकप्रियता से अनेक राजनीति की प्रतिस्पर्धी पार्टियां उन्हें औंधे मुंह गिराना चाह रही है ताकि या फिर कभी सीधे नहीं हो सके। लेकिन उन्हें औंधे मुंह गिराने वाले खुद ही जनता की निगाह में गिर रहे हैं, इसलिए मूषक जी अपनी औकात बनाने के लिए मात्र कुतरने से काम नहीं चलेगा ,सेलिब्रिटी को मैनेज करना पड़ता है। और तुम न जाने किस दंभ में आतंक मचा रहे हो , मूषक महाराज !
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