लोकतंत्र में सरकार की आलोचना देशद्रोह नहीं: प्रेस स्वतंत्रता पर गंभीर विमर्श

Dr Shailesh Shukla May 22, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति सत्ता से प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता में निहित होती है। यह लेख अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वायत्तता, मीडिया की जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन चिंतन प्रस्तुत करता है।

हिंदी पत्रकारिता में महिलाएं : 200 साल बाद भी अधूरी यात्रा

Dr Shailesh Shukla May 22, 2026 आलोचना ,समीक्षा 1

हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों के इतिहास में महिलाओं की भागीदारी अब भी बेहद सीमित है। यह लेख हिंदी मीडिया में महिला पत्रकारों की स्थिति, नेतृत्व में असमानता, लैंगिक पूर्वाग्रह और बदलाव की संभावनाओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

“हम ही हैं राष्ट्र, हमसे ही है राष्ट्र”

Dr Shailesh Shukla May 15, 2026 व्यंग रचनाएं 1

“जनता भविष्य नहीं देख पाती, इसलिए जनता है; और हम भविष्य पहले देख लेते हैं, इसलिए अधिकारी हैं।” “व्यवस्था नहीं सड़ी… व्यवस्था तो बहुत फलदायी है।” “मैंने केवल अवसर लिए, नियमों को समझा और संबंध निभाए।” “जब ‘मैं ही राष्ट्र’ हूँ, तो राष्ट्र की संपत्ति और मेरी संपत्ति में अंतर कैसा?” “पहले जमीन अपने नाम कराओ, फिर विकास का इंतजार करो।”

वादों की वाणी, विश्वास का विध्वंस : घोषणा पत्र की राजनीति पर लोकतांत्रिक लगाम

Dr Shailesh Shukla May 11, 2026 आलोचना ,समीक्षा 0

चुनावी घोषणा पत्र लोकतंत्र का सार्वजनिक वचन होते हैं, लेकिन आज वे अक्सर राजनीतिक प्रचार का साधन बनकर रह गए हैं। यह लेख चुनावी वादों की जवाबदेही, राजनीतिक नैतिकता और लोकतांत्रिक विश्वास की पुनर्स्थापना पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है।

पर्यावरण संरक्षण एवं सुधार पर केंद्रित हो विकास की हर नीति

Dr Shailesh Shukla May 8, 2026 Agriculture/environment 0

पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन क्यों आवश्यक है? जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, सतत विकास, जल संरक्षण, जंगल, ऊर्जा और भारत के भविष्य पर आधारित विस्तृत हिंदी लेख पढ़ें।

न्यायपालिका, आलोचना और लोकतंत्र : क्या न्यायालयों को आलोचना से भयभीत होना चाहिए?

Dr Shailesh Shukla May 6, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी आलोचना सहने की क्षमता होती है। न्यायपालिका संविधान की संरक्षक अवश्य है, किंतु क्या वह आलोचना से ऊपर हो सकती है? यह लेख न्यायपालिका की गरिमा, अवमानना कानून, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच संतुलन की गंभीर पड़ताल करता है।

शब्द से एल्गोरिद्म तक : हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की तकनीकी यात्रा

Dr Shailesh Shukla May 3, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की यात्रा केवल समाचारों का इतिहास नहीं, बल्कि तकनीकी विकास, सामाजिक परिवर्तन और विचारों के विस्तार की जीवंत गाथा है—जो आज कृत्रिम बुद्धि के युग तक पहुँच चुकी है।

हिंदी पत्रकारिता में कृत्रिम मेधा के प्रयोग का भारतीय समाज पर प्रभाव

Dr Shailesh Shukla May 3, 2026 शोध लेख/विमर्श 0

हिंदी पत्रकारिता में कृत्रिम मेधा का प्रवेश केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषिक और नैतिक चुनौती भी है। यह लेख इसी बदलाव के प्रभावों का गंभीर विवेचन करता है।

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: संघर्ष, चेतना और डिजिटल युग की नई दिशा

Dr Shailesh Shukla Apr 28, 2026 India Story \बात अपने देश की 0

1826 के उदन्त मार्तण्ड से लेकर डिजिटल और AI युग तक हिंदी पत्रकारिता की 200 वर्षों की यात्रा, संघर्ष, विकास और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण।