शोक सभा में जाने की कला: बाब्बन चाचा की फील्ड ट्रेनिंग

डॉ मुकेश 'असीमित' May 8, 2026 व्यंग रचनाएं 0

शोक सभा में जाना भी एक सामाजिक परीक्षा है। बाब्बन चाचा इस परीक्षा में इतने अनुभवी हैं कि संवेदना व्यक्त करते-करते रिश्ता, पुट्टी और प्रॉपर्टी तक की चर्चा छेड़ देते हैं।

अफसरों सेवा धर्म-हास्य व्यंग्य रचना

Ram Kumar Joshi May 5, 2026 व्यंग रचनाएं 1

नई दिल्ली की ट्रेनिंग में उन्हें सिखाया गया था— “धीरे-धीरे खाओ, ठंडा करके खाओ…” लेकिन जब सिस्टम गरम हुआ, तो सबसे पहले जल गया—एक ‘बाबू’।

पति चाहिए: एक आधिकारिक वैवाहिक विज्ञप्ति

डॉ मुकेश 'असीमित' May 5, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब पति भी नौकरी की तरह “फुल-टाइम वैकेंसी” बन जाए, तो समझिए वैवाहिक जीवन ने नया स्टार्टअप मॉडल पकड़ लिया है। यह व्यंग्य न केवल हँसाता है, बल्कि शादी की सच्चाइयों का आईना भी दिखाता है।

ब्रज की एयरलाइंस: ब्रज भाषा में मजेदार फ्लाइट अनाउंसमेंट

डॉ मुकेश 'असीमित' May 3, 2026 हास्य रचनाएं 0

कल्पना कीजिए, अगर ब्रज क्षेत्र की अपनी एयरलाइन होती और पायलट, एयरहोस्टेस, क्रू सब ब्रज भाषा में घोषणाएँ करते—तो सीट बेल्ट से लेकर लैंडिंग तक हर बात रस, ठिठोली और जय श्रीराधे में भीग जाती।

हे ग्रीष्म देवी ,हे प्रचंड तापसी

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 22, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब ग्रीष्म ऋतु देवी का रूप धरकर पृथ्वी पर उतरती है, तो सड़कें सूनी हो जाती हैं, बिजली आंख-मिचौली खेलने लगती है, जलजीरा और आइसक्रीम जीवनदायिनी प्रतीत होते हैं, और मनुष्य वातानुकूलित गुफाओं में शरण लेने लगता है। यह व्यंग्य रचना भारतीय गर्मी की त्रासदी को हास्य, तंज और सांस्कृतिक बिंबों के साथ बेहद रोचक ढंग से प्रस्तुत करती है।

जाना मेरे सेवानिवृत्ति समारोह में

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 20, 2026 व्यंग रचनाएं 0

एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की नज़र से लिखा गया यह हास्य-व्यंग्य लेख रिटायरमेंट समारोह की औपचारिकता, दिखावटी सम्मान और भीतर के खालीपन को चुटीले अंदाज़ में प्रस्तुत करता है। ढोल, भाषण, गिफ्ट और सामाजिक व्यवहार के माध्यम से यह लेख जीवन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े व्यक्ति के मनोभावों को उजागर करता है।

प्रेम पत्र में घोस्ट राइटिंग

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 5, 2026 व्यंग रचनाएं 0

“मैं उस दौर का अनाम प्रेमाचार्य था, जिसने प्रेम के सर्वहारा वर्ग के लिए जनहित याचिका की तरह प्रेमपत्र लिखे—निःशुल्क, निस्वार्थ और निस्संग।” “बिना शायरी के प्रेमपत्र ऐसा ही होता जैसे दाल बिना तड़के।” “एक ही प्रेमिका के लिए लिखते-लिखते हम भी ऊब गए—पर प्रेमियों के दिलों में आग बराबर जलती रही।”

अप्रैल फूल बनाया — उनको ग़ुस्सा आया

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 1, 2026 Important days 0

अप्रैल फूल अब एक दिन का त्योहार नहीं रहा, बल्कि समाज का स्थायी चरित्र बन चुका है—जहाँ राजनीति, मीडिया और सोशल मीडिया मिलकर रोज़ाना जनता को नए-नए रूपों में मूर्ख बनाते हैं, और जनता इसे मनोरंजन समझकर स्वीकार भी कर लेती है।

झूठ का मेगा मॉल

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 व्यंग रचनाएं 0

जब झूठ ने मार्केटिंग का चोला पहन लिया, तो सच आउटडेटेड घोषित कर दिया गया। “झूठ महा-सेल” में हर वर्ग के ग्राहक उमड़े—नेता, एंकर, धर्मगुरु, कोचिंग संचालक—सब अपने-अपने झूठ के पैकेट खरीदते दिखे। इसी भीड़ में एक बूढ़ा आदमी सच खोजता रह गया…

भगवान बचाए ऐसे रिश्तेदारों से!

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 28, 2026 व्यंग रचनाएं 0

बीमारी से ज्यादा थका देने वाला होता है रिश्तेदारों का हाल-चाल महाकुंभ—जहाँ हर कोई डॉक्टर भी है, जज भी और जांच अधिकारी भी।