मातृभूमि-कविता देश भक्ति की

Meenakshi Anand Jun 25, 2025 Poems 1

यहकविता मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, बलिदान और गौरव की भावना को दर्शाती है। हिमालय से सागर तक फैली इस पुण्यभूमि को नमन करते हुए व्यक्ति की भक्ति और भारत माता की आभा इस चित्र को भावपूर्ण बनाती है।

” चला ढूढ़ने जीवन को ” 

Uttam Kumar Jun 25, 2025 Poems 0

यह कविता जीवन की उस रहस्यमय दिशा की तलाश है, जहाँ कोई पदचिन्ह नहीं और कोई उत्तर नहीं। कवि उस अज्ञात छोर की ओर देखता है, जहाँ जीवन कभी मुस्कराता, कभी मौन चलता चला जाता है। यह आत्ममंथन की यात्रा है — जिसमें कवि न केवल जीवन को खोजता है, बल्कि स्वयं से भी प्रश्न करता है। हर पंक्ति एक सूक्ष्म पीड़ा को उद्घाटित करती है, जहाँ जीवन का मौन गूंजता है। कविता एक प्रतीक है उस क्षण का, जब मनुष्य समझना चाहता है — क्या सच में जीवन कुछ कहे बिना ही चला जाता है, और पीछे छोड़ जाता है... एक खालीपन।

“रिश्ते (गजल ) दो छायाओं के बीच अनकहे जुड़ाव ।”

Babita Kumawat Jun 23, 2025 Poems 4

गजल – रिश्ते रिश्तों में विसाल उतना है जरूरी, मेरे लिए हर सिम्त में रिश्ते है जरूरी पर कुछ लोग बना देते है मैदान-ए-मतकल, मेरी ख्वाहिश है बनाना रिश्तों में खुशी हर पल कैद-ए-बाम मिलते कुछ लोग ऐसे है, जो पेच-ओ-खम रिश्तों में डाल देते हैं मैं हर शाख, हर खार, हर कली से मिली, […]

रिश्ते -कविता हिंदी रचियता महादेव प्रेमी Hindi Poem Rishte

Mahadev Prashad Premi May 1, 2024 हिंदी कविता 0

जब रिश्तों में स्वार्थ और लोभ का ज़हर घुल जाता है, तब वर्षों से सहेजे संबंध भी टूटने लगते हैं। मनुष्यता की नींव पर जब निजी लाभ हावी हो जाता है, तो नाते सिर्फ समझौते बनकर रह जाते हैं। यह पंक्ति आज के स्वार्थी सामाजिक परिवेश की सच्चाई बयां करती है।

शिव और शक्ति: एकत्व का परिवेश-कविता रचना -डॉ मुकेश

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 9, 2024 Poems 0

शिव समाधि हैं, शक्ति संचलन। एक निःशब्द ऊर्जा, दूसरी जीवंत स्पंदन। जब दोनों मिलते हैं, तब ब्रह्मांड बोल पड़ता है—सृष्टि का रहस्य, शिव-शक्ति की अद्वितीयता में छिपा है। यही जीवन की शाश्वत अभिव्यक्ति है।

“Social distancing के दौर में कोरोना” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi Feb 2, 2024 Poems 0

कोरोना के दौर में जब कवियों की भीड़ ग़ज़लों को ‘वायरल’ करने में लगी है, कवि व्यंग्य में यही कामना करता है कि खुद कोरोना किसी पुराने रोग की तरह बीमार हो जाए। यह कविता महामारी पर मानवीय पीड़ा और हास्य का मिश्रित भाव प्रस्तुत करती है।

कुछ चुनिंदा शायरियां डॉ दिनेश द्वारा रचित

Dr Dinesh Gupta Jun 19, 2020 Poems 0

पढ़े डॉ दिनेश गुप्ता द्वारा रचित कुछ चुनिंदा शायरियां। चुने बात अपने देश की को अपने लेख कविता विचार प्रकाशन हेतु ज्यादा जानकारी के लिए सम्पर्क करें 8619811757 पर