डॉ मुकेश 'असीमित'
May 23, 2020
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पंडित की कुल्फी , लाला की पताशी , मुरली का पान , जयपुर वालो के दिल मे ऐसे कई नाम !संपत की कचोरी , सम्राट का समोसा , मानसरोवर से आते लोग, खाने स्वामी का डोसा !ब्रजवासी की पताशी से बनती कंवर नगर कि शाम , अनु पान वाले का चॉकलेट वाला पान !भगत जी […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 22, 2020
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“बचपन” (कुण्डली8चरण) बचपन आप सम्हालिए ,देकर प्रेम दुलार,नीति नियम संस्कार दे,बन के दक्ष कुम्हार, बन के दक्ष कुम्हार,जैसे मिट्टी को ढाले,घुमा चाक पर कूट,पीट अग्नि में डाले, ऐसे हर परिवार,बाल बच्चों को पालो,दे संस्कार उदार,नेक जीवन में ढालों, “प्रेमी”इतना करो,लगे उनको अपनापन,मात पिता गुरु शिक्षा,दें तब सुधरे बचपन। रचियता -महादेव प्रेमी
Mahadev Prashad Premi
May 21, 2020
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“जग में भारी ” आज के युग में मोबाइल की महत्ता को दर्शाती कविता है. कैसे मोबाइल आज एक आवश्यक निजी साथी बन गया है. कविता कुंदिली विधा में रची गयी है जिसके ८ चरण है “जग में भारी” (कुण्डली 8चरण) जग में भारी हो रहा,मोबाइल का भूत,झगड़ा दंगे हो ज़हां,पक्का लेय सबूत, पक्का लेय […]
Mahadev Prashad Premi
May 21, 2020
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आज के युग में वृद्ध जानो की व्यथा को बाया करती मेरी यह कविता “वर्द्ध जनों का ” आपको बहुत पसंद आएगी. कविता कुंडली विधा में रचित है जिसमे ८ चरण है. “वृद्ध जनों का”वृद्ध जनों का इस समय,नहीं है चोखो हाल?युवा वाल की इस समय ,बदल रही है चाल , बदल रही है चाल,भुले […]
Mahadev Prashad Premi
May 20, 2020
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कविता शीर्षक “बेटी “,भगवान का सर्वश्रेष्ट आशीर्वाद बेटी के लिए समर्पित. “बेटी”कुण्डली 8चरण बेटी घर की लाडली बेटी घर का प्यार,बेटी एक मुस्कान है,कोमल हृदय उदार, कोमल हृदय उदार,आंगन की खुशवु बिटिया,मात पिता का दर्द,सहज अपनाती बिटिया, वह शाख है न फूल,जहां तितलियां नहीं हो,वो घर भी है नहीं,ज़हां बच्चियां नहीं हो, “प्रेमी” ये महमान […]
Mahadev Prashad Premi
May 20, 2020
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“इंग्लिश पटरानी”कुण्डली 8चरण इंग्लिश पटरानी बनी,हिंन्दी है लाचार,झेल रही निज देश में,सोतेला व्यवहार, सोतेला बर्ताव ,झेल रही अपनी हिन्दी,जो संस्कृति आधार,बनी भारत की बिंदी , आज बहुत से चला,रहे इंग्लिश विद्यालय,इंग्लिश में ही वहस , सुनें सवकी न्यायालय, “प्रेमी” इंगलिश वात,करै वो ही तो ज्ञानी,हिन्दि जगह पर बनी,आज इंगलिश पटरानी। रचियता -महादेव प्रेमी यह भी […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 20, 2020
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कविता शीर्षक “चलना सच की राह” हमे कैसी भी विपरीत परिस्थितियों में सच का मार्ग नही छोड़ने की प्रेरणा देती है। “चलना सच की राह” (कुण्डली 8चरणचलना सच की राह पर, आज नहीं आसान,झूठ विके झट पट यहां, सच की बंद दुकान,सच की बंद दुकान, बजी झूठों की तूती,झूठे सव आवाद ,बनी सव दुनियां झूठीभाषण […]
Sunita Sharma
May 20, 2020
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डाॅक्टर, नर्स, सफाईकर्मी, पुलिस या चाहे हो वो पत्रकार विपत्ति की विकट घड़ी में लगते स्वयं ईश्वर का अवतार स्वहित त्याग कर लोकहित के लिए जिन्होंने त्यागा अपना घर-बार उन्हीं में ढूंढो उसको, जिसके लिए तुम जाते मन्दिर मस्जिद या गुरुद्वार शत शत नमन भी कम पड़ते हैं ये मानवता के सच्चे कर्णधार […]
Sunita Sharma
May 20, 2020
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रातें क्यूं है सोई सोई दिन की धूप भी है खोई खोई क्या हुआ ये , कैसा है मंजर हाथों से छूटा, मानव का खंजर इस खंजर से वो, प्रकृति को नोचता था स्वार्थ में हो अन्धा, कुछ न सोचता था पक्षी उन्मुक्त हो, कैसे चहचहाए हवाएं भी सुगन्धित होकर गुनगुनाएं […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
May 19, 2020
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कविता" हरियाली " प्रकृति की खूबसूरती को बयान करती कविता है. किस तरह कवी को श्रावण मास में गाँव का वो स्वछन्द वतावरण और प्रकृति की छटा याद आती है