“माँ मंदिर का दीप” हिंदी कविता

“मां मन्दिर का दीप”
कुण्डली 8चरण

मां मन्दिर का दीप हैं, मां पूजा का थाल,
जिसे दुआ मिलती रहे,सदा रहे खुशिहाल,

सदा रहे खुशहाल, नहीं कोई दुविधा आती,
राहू केतू शनी,आदि की ग्रह टल जाती,

मां जगह कोइ और,नहीं करता भरपाती,
मां का आशीर्वाद,डुबी नौका तर जाती,

“प्रेमी”नेक नसीव,तो मां को रखो समीप,
मां की सेवा करो ,है मां मन्दिर का दीप।

रचियता-महादेव प्रेमी

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डॉ मुकेश 'असीमित'

डॉ मुकेश 'असीमित'

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी,…

लेखक का नाम: डॉ. मुकेश गर्ग निवास स्थान: गंगापुर सिटी, राजस्थान पिन कोड -३२२२०१ मेल आई डी -thefocusunlimited€@gmail.com पेशा: अस्थि एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ लेखन रुचि: कविताएं, संस्मरण, व्यंग्य और हास्य रचनाएं प्रकाशित  पुस्तक “नरेंद्र मोदी का निर्माण: चायवाला से चौकीदार तक” (किताबगंज प्रकाशन से ) काव्य कुम्भ (साझा संकलन ) नीलम पब्लिकेशन से  काव्य ग्रन्थ भाग प्रथम (साझा संकलन ) लायंस पब्लिकेशन से  अंग्रेजी भाषा में-रोजेज एंड थोर्न्स -(एक व्यंग्य  संग्रह ) नोशन प्रेस से  –गिरने में क्या हर्ज है   -(५१ व्यंग्य रचनाओं का संग्रह ) भावना प्रकाशन से  प्रकाशनाधीन -व्यंग्य चालीसा (साझा संकलन )  किताबगंज   प्रकाशन  से  देश विदेश के जाने माने दैनिकी,साप्ताहिक पत्र और साहित्यिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लेख प्रकाशित  सम्मान एवं पुरस्कार -स्टेट आई एम ए द्वारा प्रेसिडेंशियल एप्रिसिएशन  अवार्ड  ”

Comments ( 1)

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Raj Kumar

3 years ago

Excellent 👍👍