सावन आया-हिंदी कविता
इस कविता में सावन का रसभीना चित्र है—जहाँ झूले हैं, कजरी है, और बदरा की फुहारें हैं, वहीं किसी के पिया की दूरी आँखों में तड़प बनकर उतरती है। यह रचना सावन की सौंदर्याभिव्यक्ति और विरह के भाव का सुंदर संगम है।
India Ki Baat
इस कविता में सावन का रसभीना चित्र है—जहाँ झूले हैं, कजरी है, और बदरा की फुहारें हैं, वहीं किसी के पिया की दूरी आँखों में तड़प बनकर उतरती है। यह रचना सावन की सौंदर्याभिव्यक्ति और विरह के भाव का सुंदर संगम है।
यह आलेख हिंदी भाषा की ऐतिहासिक जड़ों, संवैधानिक स्थिति, डिजिटल युग में इसकी भूमिका और वैश्विक पहचान की गहराई से पड़ताल करता है। हिंदी के सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक विकास को रेखांकित करते हुए, इसे एक प्रभावी राजभाषा और सांस्कृतिक संवाहक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
प्राइवेट अस्पतालों पर लूट के आरोप लगाने से पहले समाज को याद रखना चाहिए कि हमने ही इन्हें 'उपभोक्ता वस्तु' बना दिया। जिस प्रोफेशन पर सबसे ज़्यादा कानून लागू हों, जहां हर चूक पर जुर्माना लगे, और फिर भी हम मुफ्त सेवा की अपेक्षा करें — क्या ये किसी एनकाउंटर से कम है?
Focus-Set goal; and set priorities around that goal. जीवन में Focus करने के लिए, हमें अपनी long term vision पर बहुत स्पष्ट होना चाहिए। यदि हम ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, तो हमें यह जानना आवश्यक है कि हमारी ऊर्जा को कहां तक पहुंचाना है। और यही “Habits of highl;y effective people ” पुस्तक की […]
Peter Drucker की किताब Effective Execution में बताया गया सिद्धांत — "Large Chunks of Uninterrupted Time" — उच्च गुणवत्ता वाले कार्य का रहस्य है। यदि आप distractions हटाकर गहन एकाग्रता में काम करें, तो आपकी productivity दोगुनी हो सकती है। बस एक टाइमर सेट करें, फोकस करें और अपने MVA को पूरा करें।
महान कंपनियाँ केवल लाभ नहीं, एक दृष्टिकोण और विरासत बनाती हैं। 'गुड इज़ द एनिमी ऑफ़ ग्रेट' की अवधारणा पर आधारित यह लेख बताता है कि कैसे सही नेतृत्व, हेजहॉग कॉन्सेप्ट और सच्चे मूल्य एक कंपनी को औसत से महान बना देते हैं। एक जरूरी विचारशील पढ़ाई।
माँ बनने से कठिन है माँ बने रहना !डॉ. श्रीगोपाल काबरा उसने नौ महीने गर्भ वहन किया। प्रसव हुआ। प्यारा सा खूबसूरत बच्चा। शहर आई और बच्चे को मुँह-अंधेरे चुपके से बालगृह के पालने में छोड़ दिया। नहीं, बच्चा अवैध नहीं था। पति साथ था, दूर कोने में खड़ा था। वह पलट कर देखने लगी […]
Today is International Biodiversity Day. It is celebrated every year on 22 May all over the world. It was first celebrated in the year 1993. At that time it was celebrated on 29th December. After this, since 2001, it is celebrated every year on 22 May. Its main objective is to make people aware of […]
रिश्वत नहीं ये सुविधा शुल्क है -व्यंग रचना भगवत पुराण में ऐसे कई अध्याय हैं जो मौखिक रूप से ही पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित हुए हैं, उन्हें गीता के 18 अध्यायों में जोड़ने से जानबूझकर वंचित रखा गया है, क्योंकि ये मृत्युलोक में आगे कलियुग के राक्षसी रूप की भयानकता के अंश स्वरूप पृथ्वी पर […]
आजकल के 99% अंक बच्चों की प्रतिभा नहीं, शिक्षा व्यवस्था की उदारता दर्शाते हैं। जहां पहले पास होना जश्न था, अब मेरिट भी बोझ है। बचपन किताबों, कोचिंग और प्रतियोगिता में गुम है। बच्चों की मासूमियत खो चुकी है, और माता-पिता की महत्वाकांक्षाएं उनका बचपन खा रही हैं।