‘ जुवान को समेट कर रखें ‘-Hindi poem

Mahadev Prashad Premi Jul 24, 2021 Poems 0

‘ जुवान को समेट कर रखें ‘ जुवान पर लगाम औरफलों में आम,ये श्रेष्ठ माने जाते है, किसी ने क्या खूव कहा है,लम्वा धागा और लम्वी जुवान,हमेशा उलझ जाती है, इसलिये धागे को लपेट कर,और जुवान को समेट कर रखें ।

‘उठाना नहीं’ Hindi Kavita Poem अतुकांत कविता-Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi Jul 24, 2021 Poems 0

‘उठाना नहीं‘ जिन्दगी का एक सीधा सा गणित याद रखो, जहाँ कदर नहीं,वहां जाना नहीं, जो पचता नहीं,उसे खाना नहीं, और जो सच वोलने पर रूठ जांय,उसे मनाना नहीं, और जो नजरों से गिर जाय,उसे उठाना नहीं ।

सपना बन जाए-हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi Jul 24, 2021 Poems 0

कोई खुशियों की चाह में रोया,कोई दु:खों की परवाह में रोया,अजीव सिलसिला है इस जिंदगी का,कोई भरोसे के लिए रोया,कोई भरोसा करके रोया,कभी कोई जिन्दगी से नाराज ना होना,क्या पता आप जैसी जिन्दगी,किसी और का सपना बन जाय

Laadu-लाडू कविता हिंदी में

Mahadev Prashad Premi Jul 22, 2021 हिंदी लेख 0

लाडू -कुंडली ६ चरण लाडू बोला गोल हु,जायके में आनंद रस से भरी जलेबिया,या खाओ कलाकंद खाओ कलाकंद की अब रसगुल्ले भी खाओ बर्फी,खीरमोहन ,इमरती चमचम भी लाओ “प्रेमी” काला जाम ,खाय है मेरा साढू साढू जैसा प्यारा सा रिश्ता लागे लाडू

आतंकवाद कविता -रचियता महादेव प्रेमी

Mahadev Prashad Premi Jul 15, 2021 Blogs 1

आतंक वाद।आतंक वाद से पीडित,ज्यादा भारत देश,इसी देश की संस्कृति,देती हर संदेश,देती हर संदेश,और हर सुविधा देते,जिस थाली में खांय,उसे छेदों से भरते,“प्रेमी”लव जेहाद से,वहुत हुए अपराध,धर्म कर्म विचलित,करे तो ये है आतंक वाद।

“कुण्डली” 6चरण “अखवार”-रचियता -महादेव “प्रेमी”-Newspaper Reading Poem

Mahadev Prashad Premi Jul 12, 2021 Poems 0

“कुण्डली”6चरण।“अखवार”अखवार प्रात ही घरपर,ले आता समचार,हिंसा चोरी लूट हो,होवे अत्याचार।होवे अत्याचार,सुसाइड वलत्कार हो।खूव फजीती होय,जो नेता भृष्टखोर हो,राजनीति की चाल,से काम करे सरकार,देश विदेशी खवर,सव छाप रहे अखवार।

“बर्षा” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi Jun 29, 2020 Blogs 0

वर्षा का मौसम है ,इस सुहाने मौसम को समर्पित कुंडीली विधा रचित ये कविता पाठको के लिए प्रस्तुत है

Patang (kite) पतंग Hindi poem by Mahadev Premi

Mahadev Prashad Premi May 2, 2020 Poems 1

आज की मेरी कविता पतंग और पतंग बाजी को समर्पित. हमारे देश में पतंगबाजी खेल एवं मनोरंजन की ऐसी विधा है जो देश के हर कोने में पायी जाती है. लोग त्यौहार या किसी खुशी के अवसर पर परिवार के साथ इस पतंबाजी का शौक पूरा करते है. देश में कई जगह पतंग महोत्सव भी […]

Rituraaj(ऋतुराज ) Hindi Poem by mahadev premi

Mahadev Prashad Premi Apr 28, 2020 Poems 1

When the season of Rituraaj (spring) comes, it is as if the whole nature of the world is in its full swing, enjoying and celebrating the youth. Suppose that the entire earth's makeup is being done. Kavi has put these feelings in the poem and presented it to you.