तन माटी रो पुतला: कबीर भजन श्रृंखला की चौथी निर्गुण भजन प्रस्तुति

डॉ मुकेश 'असीमित' Jul 19, 2026 Culture 0

“तन माटी रो पुतला” डॉ. मुकेश असीमित की कबीर भजन श्रृंखला की चौथी रचना है। यह निर्गुण भजन देह-अभिमान, माया, धन और जीवन की क्षणभंगुरता पर कबीर-वाणी जैसे सहज लोक-सत्य को सूफ़ियाना-फोक संगीत शैली में प्रस्तुत करता है।

क्या लौटाऊँगा? — जीवन की असली कमाई का प्रश्न

Ram Kumar Joshi Jun 24, 2026 हिंदी लेख 3

जीवनभर नौकरी, परिवार और प्रतिष्ठा के लिए काम करने वाला व्यक्ति जब साठ वर्ष की आयु में अपनी वास्तविक कमाई का हिसाब करता है, तो उसके सामने एक गहरा प्रश्न खड़ा होता है—मृत्यु के बाद वह ईश्वर के पास क्या लेकर जाएगा?

जाना मेरे सेवानिवृत्ति समारोह में

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 20, 2026 व्यंग रचनाएं 0

एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की नज़र से लिखा गया यह हास्य-व्यंग्य लेख रिटायरमेंट समारोह की औपचारिकता, दिखावटी सम्मान और भीतर के खालीपन को चुटीले अंदाज़ में प्रस्तुत करता है। ढोल, भाषण, गिफ्ट और सामाजिक व्यवहार के माध्यम से यह लेख जीवन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े व्यक्ति के मनोभावों को उजागर करता है।

स्वेच्छा है भी… और नहीं भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Apr 4, 2026 Self Help and Improvements 0

क्या मनुष्य वास्तव में स्वतंत्र है या प्रकृति और परिस्थितियों की कठपुतली? यह लेख फ्री विल की अवधारणा को गहराई से समझाते हुए बताता है कि असली स्वतंत्रता हमारे चुनाव में छिपी है।

स्वेच्छा है भी… और नहीं भी

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 31, 2026 Darshan Shastra Philosophy 0

फ्री विल पूर्ण स्वतंत्रता नहीं, बल्कि दिशा चुनने की क्षमता है—जहाँ मनुष्य प्रकृति के प्रवाह से ऊपर उठने का साहस करता है।स्वतंत्र इच्छा वहीं जन्म लेती है, जहाँ मनुष्य अपने भीतर उठे विचारों को केवल देखना नहीं, बल्कि सजगता से चुनना सीखता है।

राम तत्व: सत्ता से संवेदना तक – एक आंतरिक यात्रा

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 27, 2026 Culture 0

क्या राम केवल एक ऐतिहासिक पात्र हैं या हमारे भीतर की एक चेतना? यह लेख राम को देह से तत्व तक समझने की एक गहन यात्रा है, जो बताता है कि राम किसी धर्म तक सीमित नहीं बल्कि मानवता की सर्वोच्च संवेदनशील अवस्था हैं।

दुर्गा सप्तशती: भीतर के असुरों से युद्ध और देवी का जागरण

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 20, 2026 Book Review 0

हम दुर्गा सप्तशती को अक्सर केवल पूजा का ग्रंथ मानते हैं, लेकिन यह हमारे भीतर चल रहे संघर्षों की कथा है। मधु-कैटभ से लेकर रक्तबीज तक—हर असुर हमारे मन के किसी विकार का प्रतीक है, और देवी वह चेतना है जो हमें इनसे मुक्त करती है।

सुविधा या सत्य : कमजोरियों की रक्षा और आत्म-सम्मान की कीमत

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 9, 2026 Self Help and Improvements 1

मनुष्य अक्सर अपनी कमजोरियों को पहचानने के बजाय उन्हें बचाने में अधिक ऊर्जा लगा देता है। सुविधा और स्वीकृति के लिए किया गया हर समझौता धीरे-धीरे आत्म-सम्मान को कमजोर करता है। वास्तविक शक्ति तब जन्म लेती है जब हम अपनी कमजोरियों को स्पष्ट रूप से स्वीकार करके सत्य का मार्ग चुनते हैं।

स्वयं में निवेश: सफल दिखने से आगे का वास्तविक विकास

डॉ मुकेश 'असीमित' Mar 8, 2026 Self Help and Improvements 1

आज के समय में सफल दिखना अक्सर वास्तविक विकास से अधिक महत्व पा गया है। पर सच्चा परिवर्तन बाहरी चमक से नहीं, भीतर की समझ, चरित्र और जागरूकता से जन्म लेता है। जीवन का सबसे मूल्यवान निवेश वही है जो हम स्वयं के विकास में करते हैं।

मिलती पेंशन तो काहे का टेंशन,नो मेंशन?

Dinesh Gangarde Mar 7, 2026 व्यंग रचनाएं 2

जब नौकरी विदा लेती है तो जीवन में एक नई नायिका प्रवेश करती है—पेंशन। यह ऐसी प्रेमिका है जो हर महीने समय पर आती है, मूड नहीं बदलती और बुढ़ापे में आत्मसम्मान और सुकून का सहारा बन जाती है। हास्य-व्यंग्य के अंदाज़ में पेंशन की इसी “वफादार महबूबा” पर यह रोचक लेख।