“हरित वाटिका” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 31, 2020 Poems 0

“हरित वाटिका”कुण्डली 6चरण हरित वाटिका में युगल,कर रहे मेल मिलाप,होट परस्पर मिल रहे,कर रहे वार्तालाप, कर रहे वार्तालाप,मिली इनको आजादी,हिन्दु संस्क्रति भूल,बने पश्चिम के वादी, “प्रेमी”ये ही हाल कि,वालक और वालिका,नित्य देख मधुपर्व,घूमले हरित वाटिका। रचियता -महदेव “प्रेमी “ आपको हमारी कविताएं कैसी लग रही है,कृपया अपने विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में जरूर […]

चोरी हिंदी कविता महादेव प्रेमी रचित

डॉ मुकेश 'असीमित' May 30, 2020 Poems 0

“चोरी”कुण्डली 6चरण चोरी यद्यपि पाप है,चोरी है अपराध,फिर भी चोरी कीजिये,अधिकारी को साध, अधिकारी को साध,चलेगी रिस्वत खोरी,विजलि पानी टैक्स,कीजिये जमकर चोरी, “प्रेमी”कह ये काम,भरे नोटों से बोरी,बना लीजिये संघ,साथ मिल करिये चोरी। रचियता- महादेव प्रेमी CANVAS AND PAPER PRINTS OF HANDMADE PAINTINGSUltra-premium museum quality with outstanding details

“नीड छोड़” हिंदी कविता महादेव प्रेमी

डॉ मुकेश 'असीमित' May 29, 2020 Poems 0

मेरी कविता शीर्षक नीड छोड़ उन प्रवासी मजदूरों को समर्पित जो अपने पेट पालने खतिर अपना घरबार छोड़ कर दूर देश में अन्य राज्यों में या बाहर विदेश में मजबूरी में अपना जीवन यापन कर रहे है. “नीड़ छोड”कुण्डली 8चरण नीड़ छोड़ पंछी उड़ा,सात समुन्दर पार,दो रोटी की फिक्र में,जीवन रहा गुजार, जीवन रहा गुजार,फक्र […]

“माँ मंदिर का दीप” हिंदी कविता

डॉ मुकेश 'असीमित' May 28, 2020 Poems 1

“मां मन्दिर का दीप”कुण्डली 8चरण मां मन्दिर का दीप हैं, मां पूजा का थाल,जिसे दुआ मिलती रहे,सदा रहे खुशिहाल, सदा रहे खुशहाल, नहीं कोई दुविधा आती,राहू केतू शनी,आदि की ग्रह टल जाती, मां जगह कोइ और,नहीं करता भरपाती,मां का आशीर्वाद,डुबी नौका तर जाती, “प्रेमी”नेक नसीव,तो मां को रखो समीप,मां की सेवा करो ,है मां मन्दिर […]

“हाथ पैर यदि पास” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 27, 2020 Poems 0

“हाथ पैर यदि पास”कुण्डली 8चरण हाथ पैर यदि पास हों,मांग कभी ना भीख,साहस पंखों में जगा,नभ में उड़ना सीख, उड़ना नभ में सीख,कभी झोली न पसारो,कर्म कोइ भी करो,ताहि सो होय गुजारो, हाथ पैर यदि साथ,देय तो मांग न जइहैं,मांगन मरण समान, तु जीते जी नहिं मरिहैं, “प्रेमी”मांग न कभी,भी जब तक तन की आस,काम […]

“अपनी राह” हिंदी कविता महादेव प्रेमी रचित

Mahadev Prashad Premi May 26, 2020 Poems 0

“अपनी राह”कुण्डली 8चरण अपनी राह स्वयम् चुनो,तव पाओगे मान,नदियां सागर में मिले,खो अपनी पहचान, खो अपनी पहचान,नदी सागर में मिलती,मीठे जल को छोड़,सभी सागर में ढलती, जव तक अपनी राह,चली पूज्यनिय बनी थी,प्रथक नदी के नाम,साथ सम्मान वही थी, “प्रेमी”मार्ग नेक ,तो सफल होयगी चाह,,सुयश चाहत हो यदि,मत छोडो अपनी राह। रचियता महादेव प्रेमी

“आलोचना प्रशंसा” हिंदी कविता महादेव प्रेमी

Mahadev Prashad Premi May 25, 2020 Poems 0

“आलोचना प्रशंसा”कुण्डली 8 चरण आलोचना अरु प्रशंसा,एक दूजे विपरीत,करते सव ही है सदा,यह दुनियां की रीत, यह दुनियां की रीत,न रीझ प्रशंसा सुनकर,निंदा कोई करै,कभी नहिं बोल उवल कर, स्तुती करने वालों, को मौका ना मिलेगा,निंदा करने चले,उ का सर ज़मीं झुकेगा, “प्रेमी” जग की रीत,देख मैंने की मन्शा,रीझो उवलो नांहि ,कि सुन आलोच प्रशंसा। […]

“नित सुवह से शाम” हिंदी कविता

Mahadev Prashad Premi May 24, 2020 Poems 0

“नित सुवह से शाम”कुण्डली 8चरण नित सुवह से श्याम तक,उछल कूद हुडदंग,योवन तक धूमिल हुए,बचपन के सव रंग, बचपन के रंग भूल,राह कुछ ऐसी पकड़ी,तीन चीज रहि याद,नमक तेलहि अरु लकडी, गिल्ली डंडा और,कबड्डी दौड रेल में,चोर सिपाही खो कि,सु मस्ती बनी खेल में, “प्रेमी”योवन साथ,हुए सव पारिवारिक काम,धूमिल हुआ बचपन,खेला नित सुवह से शाम। […]

“सुख अरु शान्ति ” हिंदी कविता

डॉ मुकेश 'असीमित' May 24, 2020 Poems 0

कविता शीर्षक “सुख अरु शांति” मानव मन को सच्ची शांति का मार्ग दिखलाती है. कविता का भावार्थ है की हे मनुष्य तू जहा शांति खोज रहा है,बाहर संसार के भौतिक सुखो में शांति पाना असंभव है. असली शांति मनुष्य को तभी मिलेगी जब वो अपने अन्दर झांक कर देखेगा. “सुख अरु शान्ति “कुण्डली 8चरण सुख […]

“चिड़ियों को दाना” हिंदी कविता महादेव प्रेमी

डॉ मुकेश 'असीमित' May 24, 2020 Poems 0

“चिडियों को दाना “हिंदी कविता कुंडीली विधा ८ चरण में प्रस्तुत है. कविता का भावार्थ छल और कपट द्वारा मनुष्य जिस तरह एक दुसरे को धोखा दे रहे है ,उसको दर्शाती हुई है. “चिड़ियों को दाना”कुण्डली8चरण चिड़ियों को दाना दिखा,पैर पकड़ता जाल,लोभ करै संसार में,कुछ ऐसा ही हाल, कुछ ऐसा ही हाल,लोभ वश होता रहता,लोभ […]