एन सुबह जब मैं कॉलोनी में पंडित शिवनारायण जी के घर पहुंचा तो वह अपने बेटे को लाइन में खड़े रहने का हुनर सीखा रहे थे !बेटे से बोल रहे थे कि लाइन में सीधे खड़े रहो, किसी को घुसने मत दो ,अपनी बारी आने तक धूप छांव के लिए मत तरसो, आगे खड़े व्यक्ति को कोहनी मारना सीखो और पीछे वाले को पीछे धकेलो ….जिंदगी में यदि लाइन में खड़े रहने की दक्षता हासिल कर ली तो देव दर्शन से लेकर बुकिंग, ट्रैफिक, गैस सिलेंडर, पेट्रोल डीजल और राशन की झोली यह लाइन भर देगी ।यदि लाइन मारने और लाइन में लगने में महारत हासिल कर ली तो जिंदगी बे लाइन होने से बच जाएगी वरना पुलिस की तरह लाइन में पहुंचा दिए जाओगें और जिन्होंने लाइन का प्रशिक्षण नहीं लिया वह लाइन के बगैर मारे मारे फिरते हैं।
मेरे पहुंचने पर बेटे आशु को
लाइन से बाहर कर मुझ पर लाइन मारते हुए बोले यह सभी को पता है लाइनें इंटरनेशनल है ।युद्ध इसराइल और ईरान का हो या रूस यूक्रेन का, ज्यादातर मामलों में लाइन लग जाती है ।अभी डीजल पेट्रोल ,एलपीजी को लेकर लाइनें चर्चा में है तो कभी कोरोना काल में लाइनों ने एक दूसरे के कनेक्ट किया था ।लाइन ऑफलाइन में लाइन मारती है तो ,ऑनलाइन ,में भी इसके कारण इन लाइनों का भी बहुत बड़ा वजूद हो चुका है।
एलपीजी की लाइन में लगे गैस सिलिंडर को फतह कर घीसू चाचा जब कॉलोनी में आए तो कॉलोनी वालों ने उनका अभिनंदन किया ,सिलिंडर की आरती उतारी ।इस पर गैस पाकर भी घीसू जी खुश नहीं हुए और भन्नाए कि क्या खाक आरती और खाक अभिनंदन ! सुबह 9 बजे से लाइन में खड़ा था 12 बजे नंबर आया एक तो सिर पर दोपहरी की गर्मी उल्टा सिलिंडर कांधे पर उठाकर लाया । वे बोले लाइन में खड़े रहना भी सहज नहीं है । लाइन में आया हर व्यक्ति एक तो बाद में आता है और बीच में भराने की कोशिश करता है ,उसे डॉग की तरह
टरकाते हैं उसको लाइन में पीछे खड़े रहने के लिए पहुंचाते हैं ,लाइन में खड़े रहने के दौरान आगे पीछे वाला अपनी चाहे जैसी बातें करने लगता है तो उसे सुनना और सहन करना पड़ती है। कोई पड़ोसी की बुराई तो कोई मित्र की,कोई भाई बंदों की पोल खोलता है ,इन सब को सुनना मजबूरी होती है क्योंकि खड़े तो लाइन में ही रहना है ।जब तीन घंटे तक लाइन में लगने पर भी नंबर नहीं आया लेकिन लघु शंका आ गई तो फिर क्या करता, पैरों के जूते निकाल कर लाइन में रखकर लघु शंख से निवृत तो हो गया लेकिन कतिपई लोगों ने जूते पीछे सरका सरका कर परेशानी से मुझे आवृत्त कर दिया।
खैर जैसे तैसे लाइन में नंबर जब काउंटर पर पहुंचा तो सर्वर बंद हो गया । और लाइन लीकेज हो गई।
इधर घीसू जी के लाइन में खड़े रहकर गैस सिलिंडर की विजय पर प्रोफेसर रामानंद जी बोले बफेट में रोटी के लिए लाइन में लगना पड़ता है और जब रोटी प्लेट में आ जाती है तब कतार के अनुशासन से मिली रोटी से चेहरे पर विजेता जैसी चमक आ जाती है। प्रोफेसर के बयानों को सुनकर निर्मल जी बोले, लाइन ,का अपना वजूद है। लाइन की भी अपनी वैल्यू है ।मौजूदा सारा संसार ऑनलाइन में समा गया है। यही नहीं नोटबंदी पर तो खुद के नोटों को लिए ,खुद की सरकार बनाने के लिए पोलिंग बूथ पर ,आधार कार्ड बनाने के लिए लाइनों का आधार ही जरूरी हो गया है। रसोई गैस के अलावा ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए, कोरोना का वैक्सीनेशन कराने के लिए, मुफ्त का राशन लेने के लिए ,अस्पताल में मुफ्त सुविधा लेने के लिए , डीजल पेट्रोल के लिए जनता लाइन में सहर्ष दिखती है। वे बोले लाइन है तो इसमें पहले आने वाला पहले पाता है। यदि लाइन न हो तो व्यवस्था बेलाइन हो जाती है ,अराजकता हो जाती है ,लाइन एक के पीछे एक को रखती है और एक दूसरे को टकराने से बचाती है ।
जब ,लाइन, की बात चली तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर विपुल जी आए और बोले ऑपरेटिंग सिस्टम भी बगैर लाइन के अनियंत्रित होता है प्रिंटर, फाइल और संचार लाइन ,डेटा संरचना सभी ऑनलाइन से होती है। वे बोले यही नहीं लाइन को ,क्यू ,भी इसलिए कहते हैं कि क्योंकि क्यू में आने वाला पहले पा लेता है ।क्यू वाले को अपनी क्रमबद्धता से चीज आसानी से मिल जाती है ।इस पर सुनील भैया बोले जिन चीजों के साथ फ्री जुड़ जाता है ,वहां लाइन ही फ्री चीज सहजता से दिलाती है ,चाहे फ्री राशन हो ,फ्री हेल्थ केयर हो फ्री गैस कनेक्शन हो, फ्री सिम हो ,फ्री शिक्षा हो, फ्री स्कॉलरशिप हो ,फ्री डाटा हो ,फ्री वाई-फाई हो इन सब के लिए लाइन लग जाती है । और लाइन में रहने वाला कभी बेहोश नहीं होता है , क्योंकि सरकारी सुख सुविधाकी बात ही अलग है ।इसी कारण कहा जाता है कि लाइन में लगकर आसानी से चीजें पाओ और हमेशा, लाइन,पर रहो चाहे वह ,ऑनलाइन, या ,ऑफलाइन, हो वरना जिंदगी ,बे लाइन ,होने से नहीं बचेगी यानी बे पटरी हो जाएगी ।
Comments ( 1)
Join the conversation and share your thoughts
डॉ मुकेश 'असीमित'
23 minutes agoआज की सबसे जरूरी स्किल क्या है?
डिग्री नहीं… लाइन में खड़े रहने का हुनर! 😄
गैस सिलेंडर से लेकर ऑनलाइन बुकिंग तक—हर जगह लाइन ही लाइन।
पढ़िए यह शानदार व्यंग्य, जो आपको हँसाएगा भी और सोचने पर मजबूर भी करेगा👇