Wasim Alam
Dec 7, 2025
Blogs
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लेखक लेख भेज देता है, पर जवाब का इंतज़ार ही उसका असली रोमांच बन जाता है। ‘यथासमय’ जैसे रहस्यमय शब्दों, संपादकों की कवि-सुलभ भाषा और अनंत प्रतीक्षा के बीच लेखक खुद ही व्यंग्य का विषय बन जाता है—पेपर पर नहीं, अपने मन की डायरी में।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 7, 2025
व्यंग रचनाएं
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नेता जी का यह इंटरव्यू लोकतंत्र के नाम पर एक शानदार हास्य-नाट्य है। हर सवाल का जवाब वे इतनी आत्मा-तुष्ट गंभीरता से देते हैं कि सच्चाई उनसे सावधान दूरी बनाकर खड़ी रहती है। बेहतरीन व्यंग्य, तीखे संवाद और कैमरे के सामने झूठ की अग्निपरीक्षा—सब कुछ यहाँ मौजूद है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 6, 2025
समसामयिकी
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हवाई जहाज़ के टिकट बुक करते समय हम लोग बड़े भोले होते हैं। वेबसाइट पर लिखा होता है – “ऑन टाइम इज़ अ वन्डरफुल थिंग” और हम मान लेते हैं कि यह कोई वादा नहीं, वेद मंत्र है। क्रेडिट कार्ड से पैसा कटते ही हमें लगता है कि हमने अपने भाग्य पर भी एक “कन्फर्म […]
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 5, 2025
Health And Hospitals
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एक ताँत की कुर्सी और एक टेबल से शुरू हुई यह यात्रा—आज 30 बेड के पंजीकृत हॉस्पिटल, MRI, CT, C-ARM और डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाओं तक पहुँच चुकी है। ५ दिसंबर न सिर्फ अस्पताल का स्थापना दिवस है, बल्कि उस लेखकीय यात्रा की भी याद दिलाता है, जिसकी शुरुआत ‘ख़ाँ की बारात’ से हुई थी। यही दिन सिखाता है कि सेवा छोटे कदमों से शुरू होती है, पर मंज़िल सामूहिक भरोसे से बनती है
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 5, 2025
Darshan Shastra Philosophy
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देवव्रत महेश रेखे ने सिर्फ 19 वर्ष की उम्र में शुक्ल यजुर्वेद के 2000 मंत्रों का दंडक्रम स्मृति से पारायण कर दिखाया। यह केवल धार्मिक चमत्कार नहीं, बल्कि मानव मस्तिष्क की क्षमता, वैदिक स्मृति-विज्ञान और हमारी श्रुति-परंपरा की जीवंत प्रयोगशाला है। यह कथा बताती है कि जहाँ दुनिया किताबों पर निर्भर है, वहाँ भारत अब भी चेतना पर ज्ञान लिखता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 4, 2025
हास्य रचनाएं
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“गोलगप्पा केवल चाट नहीं—भारत का चलित विश्वविद्यालय है, जहाँ मीठा, खट्टा और तीखा स्वाद जीवन-दर्शन बनकर उतरता है।”
गोलगप्पा–लाइन भारतीय लोकतंत्र की असली प्रयोगशाला है—आईएएस हो या कवि, सबकी कटोरी बराबर काँपती है
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 4, 2025
व्यंग रचनाएं
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“नवराष्ट्रवाद वह चूर्ण है जिसमें दो चुटकी डालते ही कोई भी बहस राष्ट्रभक्ति की आँच पर तवे की तरह लाल हो जाती है।”
“आजकल सवाल पूछना विचार नहीं, ‘कौन भेजा तुम्हें’ परीक्षा का पहला प्रश्नपत्र बन गया है।”
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 3, 2025
Important days
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दिव्यांग दिवस हमें याद दिलाता है कि मनुष्य का माप उसकी देह की सीमाओं से नहीं, उसके हृदय की ऊँचाई से होता है। जो अपूर्ण देह में भी पूर्ण आकाश लेकर चलते हैं—उनकी तेजस्विता, साहस और जीवन-संघर्ष समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं। यह दिवस हमें दया नहीं, सम्मान और समानता का संकल्प देता है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 3, 2025
Blogs
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अधूरी देह में भी पूरा आकाश बसता है—यह कविता जीवन की बाधाओं में छिपी अनंत संभावनाओं और साहस के उजाले को आवाज़ देती है।जब दुनिया सीमाएँ गिनाती है, तब हम अपने भीतर की उड़ान खोजते हैं। यह गीत प्रतिकूलताओं के बीच जिजीविषा का घोष है।
डॉ मुकेश 'असीमित'
Dec 3, 2025
व्यंग रचनाएं
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कला का ब्रह्मांड जहाँ खत्म होता है, समोसा वहीं से अपना दर्शन शुरू करता है—तीन कोनों में आत्मा, पदार्थ और ऊर्जा समाहित।”
“यूरी मायस्को ने शायद संगमरमर देखने से पहले भारतीय कैंटीन का समोसा खाया होगा—नहीं तो ‘ट्रिनिटी’ इतनी भूख-भरी क्यों बनती?”
“संगमरमर की मूर्ति प्रकाश पकड़ती है, और समोसा हमारे दिल… और पेट।”
“अगर इस देश की असल त्रिमूर्ति कोई है, तो वह तेल, आलू और मैदा है—बाकी सब कलात्मक विस्तार हैं।”